मंगलवार, 6 जुलाई 2021

नवजात शिशुओं को होने वाली बिमारियां


बच्चे जब बीमार होते हैं तो आपकी चिंताएं बढ़ जाती हैं। घर पर नवजात शिशु (Newborn) की किलकारी गूंजने से जो खुशी होती है वो उसके बीमार होते ही चिंता में बदल जाती है। हालांकि नवजात शिशु को शुरुआती एक साल में होने वाली कई कॉमन बिमारियां गंभीर नहीं होती है बशर्ते उनका सही इलाज हो और देखभाल सही तरीके से हो।

सर्दी, कफ, बुखार, उल्टी, दस्त, स्किन रैशेज (डायपर रैश), क्रेडल कैप (सिर में घाव होना) आदि कई ऐसी बीमारियां है जो परेशान तो करती है मगर सही इलाज और देखभाल के बाद सब ठीक हो जाती है।

दूसरी तरफ, कुछ ऐसी गंभीर बीमारियां भी हैं जो बच्चे को परेशान करती हैं। मगर इसकी चेतावनी यानि लक्षण-संकेत मिलते ही एक्सपर्ट डॉक्टर से इलाज तत्काल शुरु हो जाए तो बच्चे को ज्यादा खतरा नहीं रहता है।

नवजात शिशुओं की कॉमन बिमारियां (Common Health Problems of Newborn)

सर्दी-खांसी-कफ (Cold and Cough in Infant)

आमतौर पर वातावरण में हुए बदलाव से नवजात शिशु को सर्दी-कफ की शिकायत होती है। मां के गर्भ से निकलने के बाद उसके शरीर पर मौसम का प्रभाव पड़ता है। एलर्जी और संक्रमण से भी बच्चों को सर्दी-कफ हो सकती है। इसके लक्षण को जानते ही जल्दी उपचार करने से बीमारी ठीक हो जाती है। कभी-कभी कफ की बीमारी गंभीर हो सकती है जब आपके बच्चे को गैस्ट्रोफेगल रिफलक्स की शिकायत हो। इसमें कफ होने पर बच्चा जब खांसता है तो उल्टी होने लगती है।
 
गैस्ट्रोफेगल रिफ्लक्स (Gastroesophageal Reflux Diseases or GERD in Infant)

गैस्ट्रोफेगल रिफलक्स बच्चे की पेट की बीमारी है, जिसमें पेट में दर्द हो सकता है, अपच होने से दूध पीने के बाद उल्टी हो सकती है। यह नवजात में होने वाली एक कॉमन बीमारी है। बच्चा दूध पीने के बाद डकार लेता है और उसे उल्टी आ जाती है। इनके पीछे कई आम कारण हैं। दूध नहीं पचने के कारण या फिर मां ने कुछ ऐसी चीज खाई हो जिससे एसिडिटी बढ़ जाए।

उल्टी (Vomiting in Infant)

उल्टी भी बच्चों की एक आम बीमारी है। अगर यह कभी-कभी अपच या गैस्ट्रोफेगल रिफलक्स से होती है तो घबराने की बात नहीं है। मगर जब यह बराबर हो, दूध पिलाने के बाद खासकर तो यह गंभीर हो सकती है। डायरिया के साथ भी अगर उल्टी आए तो यह गंभीर मामला है। बोतल से दूध पिलाने में ऐसी शिकायत बराबर होती है। ऐसे मामले में बच्चे को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर देना चाहिए और उसके वजन पर ध्यान देना चाहिए।

ध्यान रहे बच्चे को दूध पिलाने के बाद अगर उसे आप कंधे पर लिटा देते हैं तो उल्टी होना स्वाभाविक है। अगर बच्चा डकार ले तो ठीक है, नहीं तो उसे सीधे के पोजीशन में रखें या फिर लिटा दें।

बुखार (Fever in Infant)

बुखार लगना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसमें शरीर संक्रमण से लड़ता है। सामान्य बुखार ज्यादा चिंताजनक नहीं है, मगर वायरल इंफेक्शन या फिर निमोनिया और टाइफाइड जरुर गंभीर है। बुखार अगर ज्यादा हो तो डॉक्टर के पास जरुर जाएं। खासकर तब जबकि -

1. आपके नवजात की उम्र 3 महीना या उससे कम है और उसे 100.4°F या इससे ज्यादा बुखार हो।

2. आपके नवजात की उम्र 3 महीने से ज्यादा है है और उसे 102.2°F या इससे ज्यादा बुखार हो।

उदरशूल (Colic in Infant)

उदरशूल में पेट में दर्द होता है। आंत में अम्ल बनने या कुछ फंस जाने के कारण यह होता है। बच्चों को पेट दर्द है यह आसानी से पता नहीं चलता है। अगर वो लगातार रो रहा है और कुछ असामान्य महसूस कर रहा है तो मां को इस बात की जानकारी पहले होती है।

अगर बच्चा एक दिन में 3 घंटा से ज्यादा रोता है तो यह समझ लेना चाहिए कि उसे पेट में दर्द हो रहा है या कुछ गड़ब़ड़ी है। हालांकि रोने की कोई और भी वजह हो सकती है।

पीलिया (Jaundice in Infant)

पीलिया बच्चों में एक कॉमन बीमारी हो गई है। मां के गर्भ से निकलते ही कई मामलों में नवजात को पीलिया की शिकायत देखी जा रही है। डॉक्टर ऐसे बच्चों को आमतौर पर फोटोथेरेपी देते हैं। पीलिया में बच्चे की त्वचा, आंख और छाती का रंग पीला हो जाता है।

पीला रंग रक्त में बिलुबरीन बनने से होता है। सामान्यतया लीवर का काम है कि वो बिलुबरीन को बनने नहीं देता या उसे कम कर देता है। अक्सर होता यह है कि जन्म के तुरंत बाद कई बच्चों का लीवर सही से काम नहीं करता है और ऐसे केस में पीलिया हो जाती है।

जन्म के साथ ही जिस बच्चे को पीलिया की शिकायत होती है उसे मानसिक रोग, बहरापन समेत और भी कई बीमारी होने की संभावना रहती है। मगर जन्म के तुरंत बाद बिना कोई इलाज के पीलिया छूट जाए तो घबराने की जरुरत नहीं है। इसके लिए डॉक्टर फोटोथेरेपी करते हैं, जिसमें एक खास तरह की रोशनी में बच्चे को एक शीशे के जार में रखा जाता है। इस खास लाइट में रहने से रक्त में बिलुबरीन की मात्रा कम हो जाती है।

आरएसवी (Respiratory Syncytial Virus or RSV in Infant)

आरएसवी एक वायरल बीमारी है जिसमें बच्चे को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और अस्पताल में भर्ती करने तक की नौबत आ जाती है। यह जन्म लेने के एक साल तक हो सकती है। सामान्य सर्दी, नाक बहना, बुखार, कफ जो हफ्ता भर तक रहे, इसके लक्षण हैं। यह तब गंभीर हो जाती है जब यह सांस के नली को च़ॉक कर दे या फिर फेफड़ा को प्रभावित करने लगे।

अगर RSV का संक्रमण फेफड़ा को प्रभावित करती है तो फिर वायरल निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है। इसमें डॉक्टर भाप लेने और नमी वाले जगह में नहीं रहने की सलाह देते हैं। बच्चे के आसपास किसी को धुंआ करने नहीं दे, खतरनाक हो सकता है।

निमोनिया (Pneumonia in Infant)

निमोनिया आम सर्दी-खांसी और बुखार से अलग है। निमोनिया बच्चों के लिए जानलेवा भी कभी-कभी साबित हो जाती है। यह फेफड़े में संक्रमण की बीमारी है। यह वायरल और बैक्टेरियल दोनों तरह के संक्रमण से हो सकता है। आमतौर पर नवजात को को RSV के संक्रमण से निमोनिया होती है। बड़े बच्चों को दूसरे बैक्टरेयियल और वायरल संक्रमण से निमोनिया होती है।

नवजात को वायरल निमोनिया होने पर तेज बुखार, सांस तेज, सांस लेने में परेशानी, खांसी होने लगती है। बच्चे खाना-पीना छोड़ देता है और काफी कमजोर हो जाते हैं। ज्यादा गंभीर होने पर नाड़ी तेज चलने लगती है और छाती में धौंकनी जिसे चमकी भी कहते हैं शुरु हो जाती है।

कई मामलों में बच्चों को निमोनिया के साथ डायरिया की भी शिकायत होते देखा गया है। निमोनिया में बच्चों को भर्ती किया जाता है और ऑक्सीजन लगाई जाती है। एंटीबायोटिक सुई और दवा से ही इसका इलाज संभव है।

डायरिया (Diarrhea in Hindi)

डायरिया में नवजात शिशु को लगातार पतला दस्त आने लगता है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यह प्रायः वायरल और बैक्टेरियल संक्रमण के कारण होता है। एलर्जी और दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी डायरिया होती है। डायरिया में सबसे खतरनाक है वायरल डायरिया और इसमें दस्त में बिल्कुल पानी ही निकलता है।

स्तनपान कर रहे शिशु को एक दिन में दस से बारह बार दस्त हो सकता है। मगर इससे ज्यादा हो और सिर्फ पानी निकले तो बच्चे को अस्पताल में तुरंत भर्ती कर देना चाहिए। अगर बच्चे के वजन में अचानक कमी हो जाए तो डायरिया खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें डॉक्टर बच्चों को नस के जरिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट (सेलाइन) चढ़ाते हैं ताकि बच्चे के शरीर में पानी की कमी न हो।

ऐसे करें नवजात की देखभाल


नौ महीने तक कोख में पालने और असहनीय प्रसव पीड़ा के बाद जब आपके गोद में बच्चे की किलकारियां गूंजती है तो आपकी खुशी दोगुनी हो जाती है। मगर इस खुशी के साथ आपकी जिम्मेवारियां भी बढ़ जाती है। मां बनने की जिम्मेवारी।

पहली बार मां बनने के समय आपको यह पता नहीं होता है कि बच्चे की देखभाल कैसे करें। कैसे उसे गोद में लें, कैसे उसे दूध पिलाएं, कैसे उसे नहलाएं...। ऐसी कई जिम्मेवारियां है जो माता-पिता को बच्चे के जन्म से लोकर पांच साल तक काफी सावधानी और समझदारी से उठानी पड़ती है। मगर आप घबराएं नहीं, हम आपको बताने जा रहें हैं नवजात के देखभाल के सबसे आसान और सुरक्षित तरीके।

जानें कैसे उठाएं नवजात को गोद में (Know how to handle your newborn)

हो सकता है कि आप अपने कोमल और नाजुक बच्चे को गोद में उठाने से पहले डर से सिहर जाए। आपको डर लगता है कि कहीं कुछ गड़बड़ी हो जाए तो...। मगर डरे नहीं। बस कुछ ऐसे बेसिक तकनीक को आजमाएं और आराम से बच्चे को गोद में उठाएं और उसे लाड़-प्यार करें।

1. नवजात को गोद में उठाने से पहले हाथ को एंटी-सेप्टिक सेनेटाइजर लिक्विड से अच्छी तरह धो लें ताकि बच्चे को कोई संक्रमण का खतरा न हो। बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता उतनी मजबूत नहीं होती है और वो बहुत जल्दी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।

2. बच्चे को उठाते समय उसके सिर और गर्दन को ठीक से पकड़े रहें, जैसे उनको सपोर्ट दे रहे हों। एक हाथ सिर और गर्दन के नीचे और एक हाथ पैर के नीचे रखें और फिर पालने के झूले की तरह बच्चे को सपोर्ट दें।

3. बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वो झूले पर झूल रहा है। बच्चे को पालने की तरह हल्का उपर और नीचे झुलाएं। ध्यान रहे नवजात को ज्यादा उपर या नीचे ना झुलाएं। यह खतरनाक हो सकता है। ना ही बच्चे का सिर ज्यादा हिलाएं। इससे SIDS (Sudden Infant Death Syndrome) का भी खतरा रहता है।

4. नवजात को कभी भी जोर से झकझोरें या हिलाए नहीं, चाहे आप उससे खेल में ठिठोली कर रहे हों या गुस्से में ही क्यों न हो। इससे बच्चे के सिर में खून रिसने लगेगा और मौत भी हो सकती है। कभी भी नवजात को सोते समय झकझोड़ कर नहीं उठाए। इससे बेहतर है कि उसके पैर में हल्की चिकोटी काटे या सहलाएं या फिर गालों को सहलाएं। याद रहें नवजात को हमेशा नर्म और मखमली स्पर्श ही करें।

5. नवजात को नर्म और गर्म कपड़े में लपेट कर रखने के लिए सीखें। इससे बच्चा काफी सुरक्षित महसूस करता है। 0-2 महीने तक शिशु को जरुर लपेटकर रखें। इससे बच्चे को वातावरण के बदलाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है।

जाने नवजात को पकड़ने और संभालने का तरीका (Know how to hold newborn)

नवजात को गोद में लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके हाथ के नीचे बच्चे का सिर और गर्दन सही तरीके से है कि नहीं। जब-जब बच्चे को गोद में लेने के लिए उठाएं तो सिर और गर्दन को जितना सपोर्ट मिलेगा उतना अच्छा रहेगा। गोद में बच्चे के सिर को अपने कोहनी के नीचे आराम करने दे औप पूरे शरीर को अपने बांह पर। जब तक बच्चा गोद में रहे उसके मूवमेंट पर पूरा ध्यान बनाकर रखें।

जाने बच्चे को आराम करने और सुलाने का तरीका (Know how to sleep your newborn)

1. नवजात के सेहत के लिए तीन महीने तक काफी आराम की जरुरत होती है। इस दौरान बच्चे 16 से 20 घंटा तक सो (आराम कर) सकते हैं। तीन महीने के बाद बच्चे 6 से 8 घंटे तक सोते हैं।

2. बच्चे सो रहे हैं या आराम कर रहे हैं तो उन्हें हर चार घंटे पर स्तनपान कराना न भूलें। रात में भी बच्चे तीन महीने तक 6 से 8 घंटे तक पूरी रात सोते हैं। अगर रात में बच्चे ठीक से मतलब 2 से 3 घंटे भी नहीं सो पा रहे हैं तो यह चिंता का विषय है।

3. बच्चे जिस तकिया पर सो रहा है/ रही है वो काफी हल्का और नर्म होना चाहिए, और तकिया पर एक ही जगह बच्चे का सिर ज्यादा देर तक नहीं रहना चाहिए, ऐसा रहने से सिर का आकार गड़बड़ा सकता है और SIDS का खतरा हो सकता है। बच्चे के सिर के पोजीशन को तकिया पर बदलते रहे। पहले दाएं, फिर बाएं और फिर बीच में।

4. नवजात को दिन और रात का अनुभव नहीं होता है। कभी-कभी कोई-कोई बच्चा रात को ज्यादा अलर्ट हो जाता है, जगा रहता है और पूरे दिन सोता रहता है। ऐसी स्थिति में रात में बच्चे के कमरे में नीम अंधेरा कर दें। दिन में हो सके तो बच्चे को थपथपा कर जगाएं और उसके साथ खेलें और बातचीत करें ताकि रात को वो सही से सो सके।

जाने कैसे कराएं स्तनपान (How to breastfeed your Newborn)

मां का दूध एक संपूर्ण और संतुलित आहार है। नवजात शिशुओं को उनके शुरुआती छह महीने में केवल मां के दूध की ही जरुरत होती है। यह शिशु को सभी जरुरी पोषक तत्व प्रदान करता है। अगर आपको दूध आता है तो अपने शिशु को 6 महीने तक जरुर स्तनपान कराएं।

प्रसव के तुरंत बाद मां का दूध पीलेपन वाला और गाढ़ा होता है। इस दूध को कोलोस्ट्रम(गाढ़ा दूध या खीस) कहते हैं। कोलस्ट्रम परिपक्व दूध (मेच्योर मिल्क) से अधिक पोषक होता है, क्योंकि इसमें अधिक प्रोटीन, संक्रमण से लड़ने वाली अधिक खूबियां होती है। यह आपके शिशु को संक्रमण से होने वाली खतरनाक बीमारी से बचाती है। इसमें विटामिन ए की भी मात्रा अधिक होती है।

स्तनपान के लिए शिशु और मां का सही पोस्चर होना जरुरी है। दोनों बाजु में शिशु को उठा कर उसके पूरे शरीर को अपनी और करें। शिशु के उपरी होंठ में अपने स्तन के निपल को सटाएं और जब शिशु अपना पुरा मुंह खोल दे तो अपने स्तन के निपल को अंदर कर दें। आपका शिशु जब जाहे उसे अपने स्तन का निपल चूसने दें।

1. स्तनपान कराने के बाद रोजाना नहाते समय साफ पानी से स्तनों को धोएं। दूध पिलाने के बाद स्तनों को साफ कपड़े से पोछें या दोबारा कपड़े से ढ़कने से पहले उन्हें स्वाभाविक रुप से सूखने दें।

2. अगर आप शिशु को स्तनपान करा रहीं हैं तो ध्यान रहे इसके स्थान पर चीनी घुला पानी, शहद घुला पानी या अन्य कुछ उल्टी-सीधी चीजें कभी न दें।  

3. अगर आपका शिशु काफी देर तक स्तनपान कर रहा है तो वो पूरे दिन में 6 से 8 बार डायपर गीला कर सकता है। पेट भी गड़बड़ हो सकती है। मगर इससे घबराए नहीं। अगर चार बार से ज्यादा डायपर को गीला करता है तो डॉक्टर के पास जाएं।

4. अगर आप स्तनपान करा रहीं है तो कुछ भी उल्टा-सीधा न खाएं। दाल का सेवन ज्यादा करें और पोषक आहार खाएं। इससे स्तन में दूध भरेगा और गाढ़ा होगा। धूम्रपान और नशा न करें।

5. अगर प्रसव के तुरंत बाद स्तन में दूध नहीं आ रहा है तो नर्स से संपर्क करें। धैर्य रखें और पोषक आहार का सेवन करते रहें, दो से तीन दिन में स्तन में दूध आने लगेगा।

जानें कैसे कराएं बोतल फीडिंग (How to Formula feed your Newborn) 

अपने शिशु को स्तनपान कराना है या पाउडर के दूध की बोतल फीडिंग करानी है यह फैसला आपका निजी फैसला है। हालांकि जन्म के छह महीने तक बच्चे को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। नवजात शिशु के लिए दूध पाउडर का उपयोग करने से पहले यह ध्यान रहे कि इसकी एक खास मात्रा होती है और इसे कैसे बनाना है आदि दूध के डिब्बे पर निर्देश पढ़ने के बाद ही शुरु करें। बोतल फीडिंग से पहले इन बातों का रखें ख्याल

1. बोतल को उबले पानी से धोएं। उबले पानी से साफ नहीं की गई बोतल या गलत मात्रा में दूध का पाउडर मिलाने से बच्चा बीमार हो सकता है।

2. हर तीन घंटे पर शिशु को बोतल फीडिंग कराएं या जब भूख लगे तब।

3. भूल कर भी बोतल में बचे दूध को फ्रीज में न रखें और उसी दूध को दोबारा न पिलाएं, हर बार ताजा बना हुआ दूध ही बच्चे को पिलाएं।

4. शिशु को बोतल फीडिंग हमेशा 45 डिग्री के कोण मे रख कर पिलाएं। ध्यान रहे बोतल खाली होने पर बच्चा हवा तो नहीं चूस रहा है।

जाने शिशु को डायपर पहनाने के तरीके (Know how to Diaper your Newborn)

आप डिस्पोजेबल डायपर बच्चों को पहना रही हैं या फिर कपड़े का डायपर, इसकी आपको सही से देखभाल करनी होगी। कब डायपर बदलनी है और साफ-सफाई का कैसे ख्याल रखना है इसके लिए सचेत रहना होगा।

अगर आप कपड़े का डायपर बच्चे को पहना रही है तो ध्यान रहे यह साफ होना चाहिए। कपड़ों के डायपर को गर्म पानी में एंटी सेप्टिक लिक्वड डाल कर साफ करें, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। डायपर पहलाने से पहले जैतून के तेल से बच्चे को मालिश कर दें ताकि कोई स्किन रैशेज नहीं हो। डायपर हर तीन घंटे पर बदलते रहे, ज्यादा गीला होने पर बच्चे को पेशाब के संक्रमण की बीमारी हो सकती है।

डिस्पोजेबल डायपर को भी हर तीन घंटे पर बदलते रहें क्योंकि ज्यादा गीला होने पर बच्चे को पेशाब के संक्रमण की बीमारी हो सकती है। डायपर खोलने के बाद अच्छी तरह से अंदरुनी हिस्से को वाइप्स से पोछ दें। ज्यादा देर तक डायपर पहनने से स्किन पर दाग या रैशेज हो जाए तो मलहम लगाएं।

अगर बच्चे का पेट खराब है तो ध्यान रहे डायपर जितनी जल्दी हो बदलते रहें।

जाने कैसे नहलाएं शिशु को (Know how to Bath your Newborn)

शिशु के जन्म लेने के बाद एक हफ्ते तक बच्चे को स्पांज बाथ दें या भींगे कपड़े से बदन पोंछ दें। जैसे ही बच्चे की नाभि-नाल (Umbilical Chord) के घाव सूख जाए बच्चे को हफ्ते में दो या तीन बार नियमित रुप से नहलाया जा सकता है। नाभि-नाल शिशु मां के गर्भ से जब निकलता है तभी ही ले कर आता है। इसे काटा जाता है और इसके घाव को सूखने में समय लगता है।

1. ध्यान रहे बच्चे को शुरु के छह महीने में ज्यादा ठंडे या गर्म पानी में नहीं नहलाएं। गुनगुना पानी ही बेहतर है।

2. नहलाते समय बच्चे के दोनों कान को हाथ से अच्छी तरह से बंद कर लें ताकि कान में पानी नहीं जाए।

3. बच्चे को नहलाने से पहले उसके कपड़े, तौलिया, डायपर, माइल्ड क्रीम सोप सभी कुछ तैयार रखें। नहलाने के तुरंत बाद बच्चे को सूखे कपड़े में लपेट लें और जल्द ही बदन पोंछ कर कपड़ा पहना दें।

4. अगर आप बच्चे को पहली बार नहला रहीं है तो अपने साथ घर के बुजुर्ग और अनुभवी लोग को साथ रखें।

5. बच्चे को नहलाने के लिए माइल्ड क्रीम सोप या शैंपू ही इस्तेमाल करें ताकि आंख में साबुन के पानी जाने से वो रोए नहीं। .

खतना और नाभि काटने के बाद कैसे करें देखभाल (Circumcision and Umbilical Cord Care)

खतना के तुरंत बाद शिशु के शिश्न को पेट्रोलियम जेली लगे हुए गॉज से कवर कर दें ताकि घाव डायपर में सटे नहीं और घाव जल्दी सूख जाए। डायपर बदलने के बाद शिश्न के उपरी हिस्से को गर्म पाना से अच्छे से साफ कर दें। शिश्न के उपरी हिस्से का घाव हफ्ता दो हफ्ता के बाद आम तौर पर सूख जाता है, मगर घाव नहीं सूखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ठीक उसी तरह मां के गर्भ से निकलने के तुरंत बाद जब बच्चे की नाभि-नाल काटी जाती है तो बच्चे के नाभि के पास घाव हो जाती है। नाभि-नाल काटने के तुरंत बाद स्वाब से उसको ढ़ंक देना चाहिए। घाव पर नीली दवाई जीवी पेंट भी लगाई जाती है , जिससे घाव जल्दी सूख जाती है। तीन हफ्ते के बाद घाव सूख जाती है। अगर इसके बाद भी घाव नहीं सूखे तो डॉक्टर से संपर्क करें।

नवजात को नियमित रुप से डॉक्टर से दिखाएं (Take your Newborn to the Doctor Regularly)

जन्म के एक साल तक अपने नवजात को महीने में दो बार अवश्य डॉक्टर से दिखाएं। जन्म के तुरंत बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद तो माता-पिता बच्चे को बराबर डॉक्टर से दिखाते ही हैं, मगर यह एक साल तक नियमित अभ्यास में रहना चाहिए ताकि आपके शिशु का बेहतर ग्रोथ हो सके और वो सेहतमंद रहे। अगर शिशु में किसी तरह की असमान्य बात या हरकत दिख रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

जन्म के बाद इन लक्षणों पर ध्यान दें (Precautions with Newborn)

डिहाइड्रेशन (Dehydration)- प्रति दिन तीन बार से ज्यादा डायपर गीला होने पर, ज्यादा सोना और मुंह सूखना

शौच या पाखाना (Bowel movement problems)-  जन्म के बाद लगातार दो दिन तक अगर पाखाना नहीं हो तो, पाखाने में सफेद आंव आना, बुखार आना

सांस लेने में परेशानी या चमकी आना (Respiratory problems)- अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही हो, दम फूल रहा हो या बच्चे की छाती तेजी से खींच रही हो जिसे चमकी भी कहते हैं तो बिना लेट किए अस्पताल जाना चाहिए।

पीलिया (Jaundice)-  अगर बच्चे की छाती , शरीर और आंख, नाखून का रंग ज्यादा पीला हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

सोमवार, 5 जुलाई 2021

इन कारणों से न्‍यूबोर्न बेबी और बच्‍चों के पेट में होता है दर्द


बच्‍चों के पेट में दर्द होना यूं तो एक आम समस्‍या है और अलग अलग कारणों से होता है। कुछ गलत खाने से पेट में या इंफेक्‍शन की वजह से भी पेट में दर्द होने लगता है। कई बार होता है कि माता पिता को समझ नहीं आता है कि बच्‍चों में या नवजात शिशु में अचानक से पेट दर्द क्‍यूं हो रहा है।

अगर बच्‍चें 3 साल से बड़े है तो वो तो फिर भी बोलकर अपने दर्द को इजहार कर सकते हैं, लेकिन नवजात शिशुओं का क्‍या? वो तो दर्द के मारे पूरे रात और दिन बिलख ही सकते है। कभी कभी कुछ बच्‍चों में तो पेट दर्द चंद मिनटों में सही हो जाता है, लेकिन कुछ बच्‍चों में यह दर्द काफी दिनों तक रहता है। अगर बच्‍चों में पेट दर्द 24 घंटों से हो रहा है तो ज्‍यादा देर न करें जाकर डॉक्‍टर से मिलिए। वरना थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है।

आइए जानते है कि किन कारणों से बच्‍चों के पेट में दर्द होताहे।

1. पेट में गैस होना

यह एक सबसे आम समस्‍या है, जो हर एक बच्‍चे को होती है। यदि मां के खाने में ऐसा काई खाद्य पदार्थ आ गया है, जिसकी वजह से नवजात शिशु को पेट में गैस हो सकती है तथा पेट दर्द होने लगता है।

2. रोने की वजह से

कुछ नवजात शिशुओं में घंटो तक लगातार रोते ही रहते है। अत्‍यधिक रोने की वजह से अधिक मात्रा में हवा को निगलने के कारण भी उनको पेटदर्द हो सकता है।

3. फूड प्‍वाइजिंग

बच्‍चों में पेट दर्द का एक कारण फूड प्‍वाइजिंग भी होती है। कई बच्‍चों होते है जो छोटी उम्र में चौंक चूना और साबुन जैसी चीजें खाने लगते हैं। जिस वजह से उनमें मौजूद केमिकल्‍स पेट में पहुंचकर रिएक्‍शन करते हैं जिससे पेट में दर्द शुरु हो जाता है।

4. एसिडिटी

ऐसा जरुरी नहीं है कि एसिडिटी सिर्फ बड़ों में ही होती है। आजकल बच्‍चों को भी एसिडिटी होती है। कई बार खाद्य पदार्थ जैसे टॉमेटो सॉस, वसायुक्‍त पदार्थ तथा खट्टे फल अथवा खट्टे फलों के रस से एसिडिटी होती है और पेट दर्द की शिकायत होती है।

5. कब्‍ज

कई बार छोटों बच्‍चों में कब्‍ज की शिकायत हो जाती है। जिसके वजह से उनके पेट में दर्द होना शुरु हो जाता है। स्थिति बहुत असुविधाजनक हो जाती है, जिसकी वजह से अत्‍यंत गम्‍भीर रुप से पेट दर्द होने लगता है।

6. संक्रमण

बच्‍चें कई बार होता है कि कुछ भी उल्‍टा सीधा खा लेते है। इस वजह से आंतों में संक्रमण हो जाता है जिसकी वजह से भी पेट दर्द होने लगता है। ज्‍यादात्‍तर बच्‍चें खाने से पहले सही तरीके से हाथ नहीं धोते है और इस वजह से संक्रमण हो जाता है।

7. पीरियड से पहले दर्द

कुछ लड़कियों में पीरियड शुरु होने से पहले ही दर्द होने लगता है। इसलिए पीरियड से ऐंठन और दर्द होने लगता है। जिन लड़कियों को पहली बार या दूसरी बार पीरियड आ रहा है उन्‍हें पीरियड के इस दर्द को सहन करने में काफी तकलीफ होती है।

इन देसी नुस्‍खों से सही करें बच्‍चों के मुंह के छाले


कब्ज और पेट की गर्मी के कारण अक्सर मुंह में छाले हो जाते हैं। मुंह में छालों की वजह से बहुत परेशानी होती है। बड़े लोग तो इस समस्या को सह लेते हैं लेकिन जब छोटे बच्चों के मुंह में छाले हो जाते हैं तो उन्हें बहुत प्रॉब्लम हो जाती है। छालों की वजह से बच्चे कुछ खा नहीं पाते और चिड़चिड़े हो जाते हैं।

मुंह में दर्द के कारण वे रोते रहते हैं जिस वजह से पेरेंट्स को भी काफी परेशानी होती है। मुंह के छाले कई कारणों से हो सकते हैं। इनको दूर करने के लिए आइए जानते हैं कुछ घरेलू उपाय करने चाहिए।

छालों को दूर करने के घरेलू उपाय -

1. शहद

शहद के इस्तेमाल से छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं। बच्चों के मुंह में छालों की जगह पर थोड़ा-सा शहद लगाएं जिससे काफी फायदा होगा लेकिन 1 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए शहद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

2. हल्दी

हल्दी में शहद मिलाकर छालों पर लगाने से भी फायदा होता है। हल्दी में जलनरोधी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं जो किसी भी तरह के जख्मों को ठीक करने में मदद करते हैं। हल्दी और शहद का पेस्ट लगाने से छालों की दर्द में भी फर्क पड़ता है और यह जल्दी ठीक भी होते हैं।

3. नारियल

मुंह के छालों को दूर करने के लिए नारियल बहुत काम आता है। इसका तेल, पानी और दूध तीनों चीजें छाले दूर करने में फायदेमंद है। छाले होने पर बच्चों को नारियल पानी देना चाहिए या नारियल के दूध से गरारे करने से भी लाभ होता है। बहुत छोटे बच्चों के छालों पर नारियल तेल लगाना चाहिए।

4. घी

दर्द से राहत पाने के लिए छालों पर देसी घी लगाना चाहिए। बच्चों के मुंह में इसको लगाने से कोई समस्या नहीं होती और इससे फायदा भी होता है।

5. छाछ

इसमें लैक्टिक एसिड होता है जो जीवाणुओं के विकास को रोकने में मदद करता है। इसलिए छाछ के सेवन से मुंह में छालों की समस्या दूर होती है।

6.दही

दही के सेवन से भी छाले ठीक होते हैं। अधिकतर बच्चे दही खाने में आनाकानी करते हैं ऐसे में उन्हें दही और शहद की स्मूदी बनाकर पीलानी चाहिए।

7. बेकिंग सोडा

इसमें सोडियम बाइकार्बोनेट होता है जो छालों को ठीक करने में मदद करता है। इसके लिए 1 चम्मच बेकिंग सोडे में पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को छालों पर लगाएं। दिन में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करने से छालों में आराम मिलता है।

8. तुलसी के पत्ते

छालों की समस्या में बच्चों को तुलसी के 2-3 पत्ते चबाने के लिए देने चाहिए। इसके अलावा पत्तों का पेस्ट बनाकर भी उसे छालों पर लगा सकते हैं।

9. गर्म पानी

गुनगुने पानी से भी छालों में फायदा होता है। इसमें थोड़ा-सा नमक डालकर गरारे करने से छाले जल्दी ठीक होते हैं।

10. आइस क्रीम

छालों की जलन और दर्द से राहत पाने के लिए बच्चों को आइस क्रीम खिलानी चाहिए। इससे बच्चों के मुंह का स्वाद भी बदलेगा और छालों में भी फायदा होगा।

11. करी पत्ता

थोड़े से करी पत्तों से बने पेस्ट को छाछ के साथ मिलाने पर यह मुंह के छालों के लिए स्वादिष्ट और कारगर उपचार बन जाता है जिसे ‘सांबरम' के रूप में भी जाना जाता है। आप इसे अपने बच्चे को पीने के लिए या माउथ वॉश के रूप में प्रयोग करने के लिए कह सकती हैं।

करी पत्ता जलनरोधी और रोगाणुरोधी होता है। इसमें बहुत सारे विटामिन भी शामिल होते हैं जैसे विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन ई। इसलिए यदि आपके बच्चे को विटामिन की कमी की वजह से छाल हुआ है तो उसके खाने में करी पत्ता शामिल करना ना भूलें।

आप नारियल और नमक के साथ भुने हुए करी पत्ते का पाउडर भी बना सकती हैं। इसे अपने बच्चे के चावल में घी के साथ डालकर दें।

12. एलोवेरा

एलोवेरा जैल से भी छालों को दूर किया जा सकता है। दिन में 3-4 बार छालों पर जैल लगाने से बहुत जल्दी फर्क पड़ता है।

13. विटामिन सी

विटामिन सी, आयरन या जिंक की कमी की वजह से मुंह के छाले हो सकते हैं। विटामिन सी की कमी की पूर्ति करने के लिए नींबू या संतरे का रस बेबी को थोड़ा सा चटा सकते हो या फिर मुंह में लगा सकते हैं।

14. टी ट्री ऑयल

टी ट्री ऑयल एसेंशियल ऑयल में से एक होता है और यह तेल कई तरह की स्किन प्रॉब्‍लम को दूर करता है। य‍ह एक प्राकृतिक स्किन टोनर है। इसके अलावा टी ट्री ऑयल मुंह के छालों के लिए भी बहुत असरदायक है। 3-4 बूंदे टी ट्री ऑयल की गर्म पानी में मिलाएं। इसके बाद इस पानी से कुल्‍ला करें। यह विधि दिन में 3 से 4 बार दोहराएं।

15. लहसुन

लहसुन मुंह के छालों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एंटीफंगल गुणों की वजह से मुंह के बैक्‍टीरिया और फंगस का खात्‍मा कर इम्‍यूनिटी सिस्‍टम को बढ़ाता है। मुंह के छालों से मुक्ति पाने के लिए शिशु की जीभ में लहसुन का तेल लगाएं, इसके अलावा कुछ लहसुन की कलियां भी खिला सकते हैं।

16. नीम

नीम को कई सालों से पारम्‍पारिक दवाई के तौर पर यूज करते आ रहे हैं। आयुर्वेद में नीम को कई बीमारियों की दवाई के तौर पर बताया गयाहै। इसमें एंटी फंगल, एंटी बैक्‍टीरियल गुण मौजूद होते हैं। मुंह के छालों से बचने के शिशु की जीभ में 3 बूंदे नीम लगाएं या नीम की पत्‍ती भी पीसकर लगा सकती हैं।

17 लौंग का तेल

लौंग के तेल में यूजेनॉल होता है जिसमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं। लौंग के तेल को प्रभावी घरेलू उपचार के रूप में माना जाता है लौंग तेल के एंटीसेप्टिक प्रभाव खमीर और बैक्टीरिया के विकास को बाधित करने में फायदेमंद होते हैं। बच्‍चों के जीभ में दिन में दो से तीन बार लौंग का तेल लगाना चाहिए।

18. केस्‍टर ऑयल

केस्‍टर ऑयल में कई चमत्‍कारी गुण होते हैं। इसी वजह से यह मुंह में हुए छालों के लिए काफी लाभदायक होता है। इसमें मौजूद रिसीनोलिक एसिड में उच्च रोगाणुरोधी और एंटिफंगल गुण होते हैं जो बैक्टीरिया, खमीर और मोल्ड को मार सकते हैं। केस्टर ऑयल शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में सहायक होता है। इसें बच्‍चों के जीभ में लगा दें इससे शिशु को कुछ ही देर में राहत मिल जाएगीं।

19. काले अखरोट

काले अखरोट में मौजूद कैंडिडा मुंह के छालों का खात्‍मा करता है।

काले अखरोट में एक सक्रिय संघटक होता है जुगोन, जिसमें एंटिफंगल गुण होते हैं इसके अलावा, काले अखरोट में तनिन की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तचाप को कम करना, दस्त से राहत देने, थायरॉयड रोग का इलाज करना और गले में खराश का उपचार करता है। शिशुओं और वयस्कों दोनों मुंह के छालें को दूर करने के लिए इसका सेवन कर सकते हैं।

गर्म पानी के गिलास में काले अखरोट के दो से तीन टुकड़ो को भिगोए और फिर इसे सुबह में खाएं इस उपचार को तीन बार दोहराएं।

20. निप्‍पल को धोएं और सुखोएं फिर स्‍तनपान कराएं

स्‍तनपान करवाने वाली मां के लिए यह बहुत जरुरी टिप्‍स है। स्‍तनपान करवाने से पहले निप्‍पल को हल्‍के गुनगुने पानी से धोएं और फिर इसे सुखा दें। इसके बाद ही बच्‍चें को दूध पिलाएं ताकि निप्‍पल पर जमें हुए बैक्‍टीरिया और फंगस साफ हो जाएं और इससे बच्‍चों के मुंह के छाले से बचने में मदद होगी। इसके अलावा अगर शिशु के मुंह में छाले हो गए है और स्‍तनपान कराने के बाद मुंह के फंक्‍शन और बैक्‍टीरिया निप्‍पल में रह जाते है, इसलिए स्‍तनों को बार बार साफ करते रहना चाहिए।

रातभर आपका बच्‍चा खांसता रहता है? इन देसी नुस्‍खों से दूर करें उसकी खिचकिच

थोड़ी सी ठंड होने पर या बारिश में भीगने से बच्‍चों को खांसी और जुकाम हो जाती है। वहीं न्‍यू बोर्न बेबी को पूरे साल में न जाने कितनी बार खांसी और जुकाम हो जाता है। दूषित हवा या संक्रमण की वजह से भी बच्‍चों को बारिश हो जाती है। बच्‍चों को खांसी आने पर आप सबसे पहले क्‍या करते हैं?

किसी डॉक्‍टर को दिखाते या केमिस्‍ट से पूछकर दवाईयां ले लेते है। हालांकि कई स्‍टडीज में ये बात भी सामने आई है कि कई बार ओवर द काउंटर दवाईयां देने से बच्‍चों को कई समस्‍याएं हुई हैं। इसके अलावा बच्‍चें भी इन कड़वी दवाईयां पीने में आनाकानी करते है। इसलिए हम यहां आपको कुछ ऐसे देसी नुस्‍खें बता रहे है जिनसे आप बच्‍चों को खांसी जुकाम से निजात दिला सकते हैं।

शहद

एक साल या उससे छोटी उम्र का बच्चा अगर सर्दी जुकाम से पीड़ित है तो शहद उसका सुरक्षित उपचार है। एक चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच कच्चा शहद मिला लें। 2-3 घंटे बाद बच्चे को थोड़ा थोड़ा पिलाएं। एक गिलास गर्म-दूध, शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी एवं सीने के दर्द में राहत मिलती है। बच्चों की खांसी से राहत के लिए शहद के उपयोग के कोई दुष्प्रभाव या साइड-इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं।

अदरक

6 कप पानी में आधा कप बारीक कटे हुए अदरक की फांके और दालचीनी के 2 छोटे टुकड़ों को 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। बाद में इसे छान लें और शहद के साथ मिलाकर दिन में 3 से 4 बार बच्चे को पिलाएं। 1 साल से कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में गर्म-पानी मिलाकर पिलाएं। वरना अदरक के टुकड़े को हल्‍का सा तवें में सेंककर शहद के साथ मिलाकर चटा दे। इससे भी काफी फर्क पड़ता हैं।

नींबू

एक कढ़ाई में 4 नींबू का रस उसके छिलके और एक चम्मच अदरक की फांके लें। इसमें पानी डालें ताकि सारा सामान पानी इसमें डूब जाए। इस मिश्रण को 10 मिनट तक काढ़े। फिर बाद में पानी को अलग कर लें। अब इस तरल पेय में उतनी ही मात्र में गर्म-पानी तथा स्वाद के लिए शहद मिलाएं। बच्चों को दिन में 3-4 बार पीने को दें। ध्यान दें कि एक-वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए चीनी के स्थान पर शहद मिलाएं।

चिकन का सूपः

एक वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गर्म चिकन का सूप भी एक अच्छा विकल्प है। यह हल्का एवं पोषक होता है, तथा छाती जमने और नाक बंद होने से छुटकारा दिलाता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट ठीक होने की प्रक्रिया को अधिक तेज कर देते हैं। आप दिन में दो से तीन बार यह बच्चों को सूप दे सकते हैं।

पेरेंट्स की ये गलतियां मार देती है बच्‍चों की भूख

जब बच्‍चें खाने लायक हो जाते है तो हर मां बाप की इच्‍छा होती है कि उनका बच्‍चा अच्‍छे से अच्‍छी डाइट खाएं लेकिन छोटी उम्र में बच्‍चें उनकी बाते सुनते ही नहीं है और अटरम शटरम खाना पसंद करते है।

माता पिता कितनी कोशिश क्‍यूं न करें लेकिन बच्‍चों वो ही खाते है जो उनका मन करें। ऐसा नहीं है कि बच्चों को भूख नहीं लगती है बल्कि सच्चाई यह है कि कई बार पेरेंट्स की गलतियों की वजह से ही बच्चों की भूख मिट जाती है।

अधिकतर पेरेंट्स सिर्फ खाने की मात्रा पर ध्यान देते हैं उनका क्वालिटी से कोई लेना देना नहीं होता है। पैरेंट्स को बचपन से बच्‍चों में हेल्‍दी हेबिट डालनी चाहिए, पैरेंट्स को बच्‍चों के खान पान के साथ लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

यह बहुत ही गलत बात है और ऐसी ही कुछ गलतियों के कारण बच्चे ठीक से नहीं खा रहे हैं। इस आर्टिकल में हम आपको उन गलतियों के बारे में ही बता रहे हैं।

स्‍नैक की टाइमिंग भी करें फिक्‍स

अगर आप बच्चों को उनकी जिद पर शाम को चॉकलेट, कूकीज या आइसक्रीम खाने की इजाजत देते हैं तो यह आपकी ही गलती है।

इन चीजों के सेवन से बच्चे ज्यादा कैलोरी हासिल कर लेते हैं जिस वजह से वे खाने के टाइम पर उन्हें भूख ही नहीं लगती है।

एक बात हमेशा ध्यान रखें कि खाने के कुछ देर पहले कभी भी बच्चों को हाई कैलोरी वाली चीजें ना खिलाएं।

खाने की क्‍वालिटी के साथ क्‍वाटिंटी भी देखिए

अगर आपका बच्चा लंच या डिनर में खाना खाते समय ज़रूरत से ज्यादा मात्रा में खा रहा है तो इसका असर भी उसकी भूख पर पड़ता है। कई पेरेंट्स ऐसा सोचते हैं कि घर पर बने खाने को चाहे जितनी मात्रा में खाया जाए वो नुकसानदायक नहीं होता है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। खाना चाहे जैसा भी हो जितना भी पौष्टिक हो लेकिन अगर उसे अधिक मात्रा में खायेंगे तो वह शरीर के लिए नुकसानदायक ही है। इस वजह से बच्चा अगले टाइम का मील नहीं खा पाता है। इसलिए आगे से बच्चों को सीमित मात्रा में खाना खिलाएं।

हेल्‍दी फूड पर ध्‍यान दे

बच्चे के लिए जब तक आप अच्छे से डाइट चार्ट नहीं फॉलो करेंगी तब तक ऐसी मुश्किलें होती रहेंगी। दिन में तीन बार फुल मील और दो बार स्नैक का सेवन बच्चों के लिए एकदम उपयुक्त है।

इससे बच्चे का पाचन तंत्र भी सही रहता है और अगले मील के टाइम पर उसे भूख भी लग जाती है। कभी भी बच्चों को खाना खाने से तुरंत पहले फल ना दें क्योंकि इससे भी उनकी भूख मिट सकती है।

इन फूड को अवॉइड करें

कई पेरेंट्स यह गलती करते हैं कि वे अपने बच्चों को हेल्दी फ़ूड खिलाने के चक्कर में यह सोचते ही नहीं हैं कि कब और कितनी मात्रा में कोई चीज खिलानी है।

सिर्फ हेल्दी पढ़कर कभी भी बच्चों को कोई चीज ना खिलाये बल्कि उससे पहले उसका फ़ूड लेबल अच्छे से चेक करें। कई पैक्ड जूस में शुगर की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि बच्चे उसे खाकर कई बीमारियों के मरीज हो सकते हैं।

इसलिए आगे से कोई भी पैक्ड फ़ूड या जूस खरीदने से पहले उसका फ़ूड लेबल ज़रूर चेक करें।

खाने खाना का समय निश्चित करें

आपको बता दें कि अगर आप बच्चे को सही टाइम पर नाश्ता, लंच और डिनर करा दें तो इससे उसका पाचन तंत्र दुरुस्त होने लगता है और उसे सही समय पर अपने आप भूख लगने लगती है।

दो टाइम के खानों के बीच में कैलोरी युक्त चीजों का सेवन या सही समय पर नाश्ता और डिनर ना करने की वजह से कई बार बच्चों को सही टाइम पर भूख ही नहीं लगती है।

दादी माँ के नुस्खे और घरेलू उपाय भाग 3


22. गुर्दे (किड्नी) के रोगों से बचने और इलाज करने के लिए हर एक घंटे में पानी पिने की आदत डाले। पानी पीने से किड्नी में मौजूद विषैले पदार्थ पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकलते है। नींबू पानी पीने से भी फायदा मिलता है, इससे शरीर को विटामिने सी मिलेगा।

23. अगर आप अपने अधिक खाने की आदतों से परेशान है और भूख कम करने के लिए दादी माँ के नुस्खे अपनाना चाहते है तो खाने में काली और हरी मिर्च का सेवन करे। मिर्च से भूख कम लगती है और मोटापा कम करने में मदद मिलती है।

24. नपुंसकता हो या मर्दाना कमज़ोरी, इसका इलाज आयुर्वेदिक तरीके से करने के लिए 1 चम्मच आंवला चूरण और 1 चम्मच शहद में 2 चम्मच आंवले का रस मिलायें और दिन में 2 बार इसका सेवन करे। इस नुस्खे से यौन शक्ति बढ़ती है और नपुंसकता का इलाज होता है।

25. कब्ज़ खोलने के लिए दही में ईसबगोल की भूसी मिला कर खाये। पत्ता गोभी का जूस और पालक का जूस कब्ज़ का इलाज करने में असरदार है।

26. किसी को बुखार हुआ हो तो पहले बुखार के साथ आने वाले लक्षणों पर ध्यान दे, इससे ये पता चलेगा की ये आम बुखार है या फिर मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू या चिकुनगुनिया की वजह से हुआ है। अगर आपको इनमें से किसी बीमारी के लक्षण दिखे तो एक बार किसी डॉक्टर से मिले और टेस्ट करवाये। बुखार किसी भी वजह से हो गिलोय का काढ़ा पिने से आराम मिलता है। 

27. अगर डेंगू के लक्षण दिखे तो इसके उपाय में भी गिलोय का सेवन अच्छा है।

28. खाना खाने के आधा घंटा पहले नमक के साथ अदरक का सेवन करने से भूख बढ़ती है। 

29. बहुत से लोग अपने दुबले पतले शरीर से परेशान होते है और अपने दुबलेपन से छुटकारा पाने के लिए कोई न कोई उपाय करते रहते है। शरीर का वजन कम हो या जादा इसका प्रमुख कारन है ख़राब पाचन तंत्र। कुछ लोगो को पेट की बीमारियां जैसे कब्ज़, गैस की वजह से भी ये परेशानी होती है। अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते है तो पहले पेट की बीमारियों का उपचार करे और अपनी पाचन क्रिया को दरुस्त करे।

30. अगर आपका वेट अधिक है और अपने पेट की चर्बी और मोटापे से छुटकारा पाना चाहते है

31. कैंसर के इलाज में हल्दी और गोमूत्र का प्रयोग रामबाण उपाय है, ये कैंसर को सेल्स को नष्ट करते है। आधा कप गोमूत्र और आधा चम्मच हल्दी मिलकर गरम करे और रोगी को चाय के जैसे पिने को कहे। इस उपाय को दिन में 2 बार लगातार 3 महीने तक करने पर आश्चर्यजनक तरीके से फायदा मिलता है।

32. दादी माँ के घरेलू नुस्खे और उपाय पीरियड्स के लिए: मासिक धर्म आने में देरी होना, बाबा बार पीरियड की डेट लेट हो जाना, पीरियड्स के दौरान कमर और पेट में जादा दर्द होना या फिर माहवारी से संबंधित कोई दूसरी समस्या हो इन सबका रामबाण इलाज है हल्दी प्रयोग करना। हल्दी में जो गुण मौजूद होते है वे मासिक स्त्राव को बढ़ाते है। बिना देरी के समय पर मासिक धर्म आये इसके लिए 1/4 चम्मच हल्दी 1 गिलास दूध में मिलाकर पिए।

ऊपर लिखे हुए नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है, अगर आप की स्किन संवेदनशील है या आप कोई गंभीर रोग के इलाज के लिए उपाय करना चाहते है तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर ले।

दादी माँ के नुस्खे और घरेलू उपाय भाग 2


11. सर्दियों में होने वाले रोगों से बचने और स्वस्थ रहने के लिए जरुरी है की खान पान का ध्यान रखा जाये। सर्दियों के मौसम में काली मिर्च, अदरक, लहसुन, तिल, केसर और गुड जैसी चीज़े खाना चाहिये। ठण्ड में विटामिन सी के लिए संतरा, अमरुद और नींबू का सेवन करे।

12. गले में टॉन्सिल और छाले होने पर आधा लीटर पानी में 20 ग्राम मेथी दाना डाल कर धीमी आँच पर पकाए और पानी को अच्छी तरह उबलने दे। पानी ठंडा होने पर इसे छान ले फिर इस में नमक डाल कर 5 से 10 मिनट तक गरारे करे। इस उपाय को दिन में 2 – 3 बार करने पर टॉन्सिल्स से होने वाला दर्द कम होने लगेगा।

13. जब छोटे बच्चों के दाँत निकलते है तब उन्हें काफ़ी पीड़ा होती है। इसके इलावा उल्टी – दस्त और बुखार जैसी परेशानियां भी होती है। ऐसे में बच्चों को संतरे का रस देने से उनकी बैचेनी दूर होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। एक बार में 2 चम्मच रस ही दे और दिन में कम से कम 3 बार आप बच्चे को संतरे का रस पिलाये।

14. झड़ते बालों को रोकने के लिए दही का इस्तेमाल बहुत असरदार है। दही से बालो को जरुरी पोषण मिलता है। बालों पर दही लगाने के आधे घंटे बाद धो ले। अगर आपके बाल जादा झड़ते हो तो हफ्ते में 2 से 3 बार इस उपाय को करे, इससे बालों को मजबूती मिलेगी और बाल सुंदर दिखने लगेंगे।

15. काली मिर्च, अजवाईन, नमक लहौरी, जीरा, सोंठ, धनिया, मोटी इलायची, पुदीना, काला नमक और नौसेदार। ये सब 10 – 10 ग्राम की मात्रा में ले और 3 ग्राम लौंग ले। इन सब को मिला कर बारीक पीस कर चूरण बना ले। अब रोजाना 3 ग्राम चूरण पानी के साथ लेने से पेट का दर्द और पेट की गैस का ilaj होता है। खाना ठीक से हज़म करने में भी ये आयुर्वेदिक उपाय काफी फायदेमंद है।

16. गंजापन से छुटकारा पाना मतलब नए बाल उगाना और पुराने बालों का गिरना रोकना। इसके लिए 5 चम्मच दही में 1 चम्मच नंबू का रस और 2 चम्मच काले चने का पाउडर मिला कर सिर पर लगाये और 1 घंटे बाद धो ले। इस देसी नुस्खे को हफ्ते में 2 से 3 बार करे।

17. घुटनों और जोड़ों के दर्द का इलाज करने के लिए अश्वगंधा, शतावरी का चूरन और आमलकी को अच्छे से मिला ले और रोजाना सुबह पानी के साथ ले। इससे दर्द ठीक होगा और जोड़ों को मजबूती मिलेगी। अगर गठिया की शिकायत हो तो इस उपाय से वो भी ठीक होता है। लहसुन के तेल में अजवाइन और हींग मिला कर पका ले और जोड़ो की मालिश करे तो जोड़ों और घुटनों का दर्द दूर होता है।

18. दिल की बिमारियों का उपचार घरेलू नुस्खे से करने के लिए 20 ग्राम गाजर का रस और 40 ग्राम आंवले का रस मिला कर पिये। इस उपाय से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

19. अगर किसी को आधे सिर दर्द (माइग्रेन) की बीमारी हो तो सिर के जिस हिस्से में दर्द जादा हो उस तरफ की नाक में गाय का शूध देसी घी डालें।

20. लीवर की सूजन और कमज़ोरी दूर करने के लिये हर रोज सुबह शाम 1 गिलास पानी में 1 चमचा शहद और 1 चम्मच सेब का सिरका मिला कर पियें। लिवर को ताक़त देने और गर्मी दूर करने का ये रामबाण उपाय है।

21. चेहरे से पिंपल्स और कील मुंहासे हटाने की लिए नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर इस पानी से चेहरे को धोएं। पत्तों को पीस कर एक लेप बना ले और चेहरे पर लगाये।

दादी माँ के नुस्खे और घरेलू उपाय भाग 1


1. पथरी का इलाज घरेलू नुस्खे से करना हो तो पथरचट्टा का 1 पत्ता और 4 दाने मिश्री पीस कर 1 गिलास पानी के साथ खाली पेट पिए।

2. 2 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम सूखा धनिया और 1 ग्राम सरपगंधा पीस कर पानी के साथ लेने से हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।

3. अगर आप को शूगर बढ़ने की बीमारी है तो सुबह सुबह खाली पेट करेले का जूस पिये। जूस बनाने से पहले करेले के बीज निकाल दे। जूस निकलने के बाद इसमें थोड़ा पानी मिलाये और पिये। इस उपाय को 2 महीने तक लगातार करे आपकी शूगर कंट्रोल में रहेगी।

4. शरीर में खून की कमी पूरी करने के लिये 1 गिलास मीठे दूध में 5 ग्राम बेलगिरी चूरन मिला कर पिये। कुछ दिन लगातार इस उपाय को करने से खून की कमी दूर होने लगती है।

5. खूनी बवासीर के इलाज में खून को रोकने के लिए 10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल को घर में बनाया हुआ ताज़ा मक्खन के साथ खाये। इस के निरंतर प्रयोग करने से बवासीर में खून का निकलना बंद हो जाता है।

6. सर्दी जुकाम की समस्या में नाक बंद होने लगे तो थोड़ी सी अज्वाइन पीस कर किसी पतले कपड़े में बाँध ले और थोड़ी थोड़ी देर में इसे सूंघे, इससे नाक खुल जाएगी।

7. अगर किसी को लकवे का अटैक पड़े तो तुरंत 50 से 100 ग्राम तिल का तेल गुनगुना कर के पिला दे और कच्चा लहसुन चबाने को दे।

8. मसूड़ों में दर्द, दाँत दर्द और सूजन की समस्या का उपचार करने के लिए 1 ग्लास पानी में 3 से 4 पत्ते अमरूद के उबाल ले और हल्का गुनगुना होने पर छान ले। अब इस पानी से थोड़ा नमक मिला कर कुल्ला करे, दांतों और मसूड़ों के दर्द से छुटकारा मिलेगा।

9. 1 गिलास पानी में थोड़ी सी गिलोय और 5 से 6 तुलसी के पत्ते डाल कर उबाल ले और काढ़ा बना कर पिये। इस काढ़े मे पपीते के 3 से 4 पत्तों का रस मिला कर पीने से प्लेट्लेट की मात्रा तेजी से बढ़ती है। ये आयुर्वेदिक दवा स्वाइन फ़्लू, डेंगू और चिकनगुनिया मे रामबाण उपचार का काम करती है।

10. चेहरे पर दाग धब्बे और झुर्रियां हो तो थोड़े से बेसन में थोड़ी सी मलाई और 2 चम्मच नींबू का रस डाल कर अच्छे से मिला ले। अब इस मिश्रण को आधे घंटे के लिये चेहरे पर लगा कर रखे फिर धो ले। इस gharelu upay से चेहरे की खुश्की दूर होती है, झुर्रियां सॉफ होती है और चेहरे पर चमक आती है।

खजूर खाने के फायदे – खजूर और दूध के फायदे

खजूर को Date Palm कहते है. खजूर जो की एक फल है कई लोग ऐसे बड़े ही प्यार से खाते है. कई लोगो का ये मनपसंद होता है लेकिन कई लोगो को खजूर बिलकुल पसंद नहीं होता है कई लोग तो खजूर का नाम सुनते ही उनके मुँह में पानी आ जाता है और कई लोग इसे अपने Dry Fruits में शामिल भी करते है और अभी तो फिर रमजान भी चल रहे है इन दिनों में खजूर खाने के फायदे बहुत होते है कई लोग इसे इसके पोषक तत्वों के कारण भी खाते है खजूर कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है.

खजूर खाने के फायदे – Benefits To Eat Date Palm

खजूर में मौजूद पोषक तत्व

खजूर विभिन्न Vitamins, मिनरल्स और Fibers, Oils, Calcium, सल्फर, आयरन, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैंगनीज, कॉपर और मैग्नेशियम जैसे तत्व होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक हैं Human Body के लिए बहुत जरुरी तत्व है.

खजूर से होने वाले फायदे – Benefits Of Date Palm

कब्ज से बचाव

ज्यादातर लोगो को कब्ज की परेशानी होती है और कब्ज होने वाले लोगो के लिए खजूर वरदान की सामान है खजूर को आप रातभर पानी में भिगो कर रख दे सुबह तक ये सिरप की तरह हो जाते है और इस तरह खाने से आपको काफी लाभ होगा इसमें सॉल्युबल फाइबर मौजूद होता है जो आपको खाने का Movement बेहतर कर देता है जिस कारण आप कब्ज की Problems से राहत पाते है.

वजन बढ़ाने में मिलती है मदद – Helpful For Gain Weight 

वजन घटाने की अपने कई सारे नुस्खे देखे है और दिए भी जाते है लेकिन अगर आप वजन बढ़ाना चाहते है लेकिन आपके पास इनके लिए कोई खास Tips नहीं होगी पर आज हम आपको बताते है खजूर में प्रोटीन, विटामिन्स और शुगर होते है इस खजूर को आप ककड़ी के पेस्ट के साथ खा सकते है इसमें बैलेंस्ड रहते है 1 किलोग्राम खजूर में 3000 कैलोरी होती है इसे आप रोज नियमित रूप से ले आप को बहुत फायदा मिलेगा. खजूर खाने के फायदे के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहिये…….

कैंसर से बचाव – Cure Of Cancer

जैसा की आप जानते ही है की आज कल Cancer की बीमारी किस हद तक बढ़ गई है जिसे रोकने के लिए रिसर्च जारी है और अभी एक रिसर्च में आ आया है की खजूर का सेवन करने से पेट का कैंसर का Risk और प्रभाव दोनों कम हो जाते है खजूर आयुवर्ग के लोगो के लिए बहुत लाभकारी है और न ही कोई नुकसान होता है इसलिए आप ऐसे रोज आपने खाने में सकते हो इससे आपको काफी हद तक बहुत फायदा मिलेगा.

दिल संबंधी रोगों को दूर करने में सहायक

खजूर को आप रातभर भिगो कर कर दे बाद में सुबह क्रश करके खा ले ये आपके दिल के काफी फायदेमंद होता है खजूर में पोटेशियम, Heart Stroke और अन्य Heart Related Diseases के खतरे को कम करता है और खजूर के इस्तेमाल से आप कोलेस्टॉल को भी कंट्रोल कर पाएंगे आप हफ्ते में दो बार खजूर को जरूर खाइये आपको फिर Heart की कोई भी बीमारी नहीं होगी. मात्र 60 दिनों में वज़न घटाए ये घर पर बना हुआ ड्रिंक

एनीमिया से लड़ने में सहायक

एनीमिया का नाम सुनते ही हमें महिलाओं की याद आ जाती है खासतौर पर ये बीमारी महिलाओ को ही होती है जिन लोगो को एनीमिया होता है वे लोग किसी को भी खून नहीं दे सकते एनीमिया से पीड़ित लोगो के लिए खजूर काफी मददगार साबित होती है खजूर में Iron भरपूर मात्रा में होता है जो खून में हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करता है इससे एनीमिया से पीड़ित मरीजों में ताकत और ऊर्जा का संचार होता है साथ ही इससे थकान और सुस्ती भी दूर होती है.

खजूर खाने के फायदे, इनके आलावा भी कई सारी बीमारियों में फायदेमंद होता है

1. खजूर के रोज इस्तमाल करने से आपको कभी भी हड्डियों के संबंध में कोई परेशानी नहीं होगी ये हड्डियों को मजबूत करता है.

2. नियमित रूप से खजूर का इस्तमाल करने से आप हर तरह की एलर्जी से दूर रहते है.

3. इससे आप दिन भर Fresh रहते है आपको हमेशा ऊर्जा मिलती है. और आपका Mind भी Sharp होता है.

4. Sexual Weakness से भी आपका बचाव करती है आपको किसी भी प्रकार की कोई Weakness नहीं होती है.

5. खजूर आपको Hangover से बचाने में भी काफी मददगार होता है.

Cold Drink पीने के फायदे और नुकसान

Cold Drink का नाम सुनते ही आप खुश हो जाते है गर्मियों की दिनों में कोल्ड ड्रिंक लगभग सभी लोग पीते है और सभी दुकानों पर फिर भी कोल्ड ड्रिंक मिलती है जब गर्मी होती है तो कोल्ड ड्रिंक पीने से बहुत शांति मिलती है हम जिसे कोल्ड ड्रिंक के नाम से जानते है उसे वैसे सॉफ्ट ड्रिंक के नाम से जाना जाता है कोल्ड ड्रिंक का कारोबार करने वालो के लिए बहुत फायदा मिलता है सबसे पहले पेप्सी को रखा जाता है जो की 1990 में स्टॉर्ट हुई थी ऐसे 200 मिलियन लोग इस्तेलम कर रहे है अभी.

1993 में एक बड़ी कंपनी और आई जिसके ब्रांड थे कोकाकोला जो की सबसे ज्यादा उसे होता है स्प्राइट, माज़ा और हमारे भारत में भी इस तरह की कई बड़ी कंपनियों का व्यापार चल रहा है जिसके कारण ही हम गर्मी के दिनों में कोल्ड ड्रिंक ले पाते है हम कोल्ड ड्रिंक को पीते तो बड़े ही मजे से है लेकिन क्या आपको पता है कि कोल्ड ड्रिंक पीने से कई फायदे होते है लेकिन इनके साथ कई नुकसान भी होते है तो आइये अब हम आपको बताते है कोल्ड ड्रिंक से होने वाले फलए और नुकसान के बारे में.

सॉफ्ट कोल्ड ड्रिंक में जब आप इसे 38 केलोरी सौ ग्राम कोल्ड ड्रिंक पीने पीते है जिसमें 4 मिलीग्राम सोडियम, 2 मिलीग्राम पोटेशियम, 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट जिसमें कि 9 ग्राम शुगर है और 0.1 ग्राम प्रोटीन और 8 मिलीग्राम caffeine की मात्रा इसमें होगी इसके अलावा इसमें कोई भी विटामिन नहीं है जो भी आपकी सेहत के लिए अच्छा हो.

Cold Drink पीने से होने वाले फायदे

अब आप सोच रहे होंगे की हम एक तरफ तो आपको Cold Drink से होने वाले फायदे और नुकसान बता रहे है वही आपको इसके फायदे जानकर कही पीने के लिए तो नहीं कह नहीं तो ऐसा नहीं है हम आपको Cold Drink के फायदे बता रहे है इसे आप कभी Medicine के रूप में ले सकते है पर ये जानना आपके लिए जरुरी है की हम अगर हर रोज किसी चीज का सेवन कर रहे है तो वे हमारे लिए आगे जाकर कोई परेशानी का कारण तो नहीं होगी या फिर कितना फायदा देगी.

1. Cold Drinks में Caffeine होता है जो हमारी बॉडी की Nervous System को सही रखने में हमारी मदद करता है और हमारे लिवर में जो भी Fatty Acid बनते है उनको बनने से रोकने में सहायक होता है और हमारे Mood को भी Fresh कर देता है.

2. कोल्ड ड्रिंक में Sodium होता है जो की Human Body में बहुत से Functions को Regulate करता है जैसे कि Body में पानी को रोकना और Muscles Cramp को कम करना Body में इलेक्ट्रोलाइट कोControl करना ये सारे काम करती है हमारे शरीर को सोडियम इन भागो में ही जरुरी होता है जो हमें गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक से मिल जाता है.

3. कोल्ड ड्रिंक में कार्बोनेट पानी का इस्तेमाल होता है वह हमारे पेट को ठीक रखने के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है इसके अलावा इसका कोई और फायदा नहीं है बस पेट में गैस बनना, भूख न लगाना इन कामो में ही ये काम करता है.

Cold Drink पीने से होने वाले नुकसान

कोल्ड ड्रिंक में एसिड होता है जो हमारे दांतों के लिए बहुत ही नुकसानदेह है इसमे मौजूद फास्फोरिक एसिड हमारी हड्डियों को कमजोर कर देता है बिना किसी पोषक तत्वों के होने की वजह से अगर आप इसका सेवन लगातार करते हैं तो यह आपका वजन बढ़ा देगा लेकिन यह वजन आपको किसी मसल पर काम के लिए नहीं है यह बस आपको मोटापा देने के लिए है.

लगातार सेवन करने से आपको caffeine की लत लग जाएगी जो लोग इसका ज्यादा सेवन करते हैं उनका स्वभाव लगभग चिड़चिड़ा रहता है जो लोग अपना Weight Loss करना चाहते हैं उनको कोल्ड्रिंग से दूर रहना चाहिए अगर आप इसका लगातार सेवन करते रहेंगे तो आपको गैस की प्रॉब्लम हो जाएगी जिसकी वजह से आपको नींद न आने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

इसके अंदर दूसरे फूड से 200 गुना ज्यादा शुगर का इस्तेमाल किया जाता है जो कि आपको शुगर की लत लगा सकता है इस के लगातार सेवन से आपको माइग्रेन, Memory Loss होना, emotional disorder, दिखने में कमी, सुनने में कमी, सांस लेने में दिक्कत जैसे रोग हो सकते हैं.

एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए?

हर कोई व्यक्ति अपने आप को स्वस्थ और फिट रखना चाहता है लेकिन पार्यप्त भोजन और पर्याप्त आराम न मिल पाने के कारण व्यक्ति बहुत ही कमजोर और बीमार दिखने लगता है. इसलिए एक वयस्क को अपने खाने में रोज़ कितने आहार लेने चाहिए ?आपके अनुसार एक वयस्क को स्वस्थ रहने और वज़न न बढ़ने के हिसाब से दिन में कितना आहार लेना चाहिए? केवल 3 या अधिक? आम तौर पर लोग आपको सलाह देते हैं कि बहुत अधिक खाने से केवल आपका वज़न बढ़ता है. सही है, परन्तु हम क्या खाते हैं और कब खाते हैं.इस बात का निश्चित रूप से बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है. एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए?

एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए?

बहुत अधिक भारी खाना खाना और फिर बहुत देर तक भूखे रहना, इससे आपको अधिक भूख लगती है और अधिक खाना खाने की इच्छा होती है. सभी लोग अपनी मनपंसद काम करना चाहते है और खासकर के युवा यानि वयस्क व्यक्ति ज्यादा तर अपने मन के अनुसार काम करते है. उन्हें किसी की रोकटोक पसंद नहीं होती है इसलिए व्यस्को को अपना खानपान का उचित ध्यान रखना चाहिए. कई बार देखा जाता है लोग अक्सर अपने खाने पीने को लेकर लापरवाही बरतते है और इसी वजह से कमजोरी बनी रहती है और यदि वो खाना ठीक तरीके से खाता है तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि ब्रेकफास्ट करने से वज़न कम होता है. परन्तु क्या कभी हमने ऐसा करने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में सोचा है? ब्रेकफास्ट बहुत आवश्यक होता है क्योंकि बहुत देर तक नींद के बाद आपका पेट खाली होता है और इसे खाने की आवश्यकता होती है.

व्यस्क व्यक्ति को कम दिन में एक बार तो ब्रेकफास्ट करना चाहिए और ब्रेकफास्ट न करने से एसिडिटी, गैस्ट्रिक की समस्या और अनावश्यक वज़न बढ़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ब्रेकफास्ट करने से कई फायदे होते है और कई मामलों में मोटापे का एक कारण यह भी होता है. यही कारण है कि आहार विशेषज्ञ पोषक और भारी ब्रेकफास्ट करने की सलाह देते हैं. क्योंकि  7-8 घंटे की नींद के बाद आपको विभिन्न गतिविधियों के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है जो खाद्य पदार्थों से ही मिलती है. जैसा कि आम तौर पर कहा जाता है “ब्रेकफास्ट राजा की तरह करें, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का खाना भिक्षुक की तरह.” प्रत्येक भोजन के दौरान भोजन की मात्रा को नियंत्रित करना बहुत महत्वपूर्ण है.

एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए? और कब लेना चाहिए ये जानें

अनेक अध्ययनों से यह राज़ पता चला है कि मोटापे को दूर करने के लिए रात में कम कैलोरी वाले भोजन का सेवन करें.इसका मतलब ये नहीं कि केवल ब्रेकफास्ट करने से आपका वज़न कम होगा. इससे केवल मोटापे का खतरा मिट जाता है. अंडे के जर्दी के फायदे यह आप पर निर्भर करता है कि आप 3 लार्ज मील लें या 6 स्मॉल मील अर्थात दिन में तीन बार भारी खाना या दिन में 6 बार थोडा थोडा खाना. और आपको इन सब चीजों के सेवन की आदत डाल लेनी चाहिए.  आपके द्वारा प्रतिदिन सेवन की जाने वाली कैलोरीज़ की मात्रा महत्वपूर्ण होती है. यदि आप दिन में थोड़ी थोड़ी देर में 6-7 बार खाना खाना पसंद करते हैं तो वैसा करें या दिन में 6 बार थोडा थोडा खाने से आप असंतुष्ट या भूखा महसूस करते हैं तो दिन में काम से कम तीन बार ज्यादा ज्यादा भोजन लें.

और आप gym लगते समय ज्यादा से ज्यादा कैलोरीस को बर्न कर पाएंगे. आप कितनी कैलोरीज़ का सेवन कर रहे हैं इस बात का ध्यान रखें. बहुत कम लोगो को इसकी जानकारी होती है एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए? और आहार में क्या क्या लेना चाहिए. अनावश्यक कैलोरीज़ को बर्न करने के लिए उचित वर्कआउट की आवश्यकता होती है. आप वर्कआउट करने के पहले और बाद में क्या खाते हैं उसका असर आपकी रिकवरी की प्रक्रिया और मांसपेशियों की बनावट, ताकत और प्रदर्शन में सुधार आदि पर पड़ता है.सबसे अहम है कि आप प्रतिदिन कैलोरीज़, प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट का सेवन सही मात्रा में करें और इन पोषक तत्वों का स्त्रोत उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ हों. दिन भर में 6 बार थोडा थोडा स्वस्थ आहार लेते रहें.  इससे आपकी पाचन शक्ति की दर बढ़ती है, आपको भूख कम लगती है और ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहती है.

और भी कई तरह की बीमारिया भी दूर हो जाती है. खाने के लिए आदर्श समय: अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि ब्रेकफास्ट के लिए आदर्श समय सुबह 7-8 के बीच, दोपहर के खाने का समय 12 से 1 के बीच और रात के खाने का समय शाम 6:30 से 7:30 के बीच होता है.हर किसी के मन ये सवाल आता है कि एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए? इसके बीच में आप कुछ हलके स्नैक्स ले सकते हैं। वे लोग जो अपना वज़न कम करना चाहते हैं उनके लिए बताये गए समय पर खाना खाना बहुत महत्वपूर्ण है. पोषण संबंधी सलाह: मिश्रित आहार लें जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व हों. भूख को दूर करने के लिए स्मोकिंग (धूम्रपान) या अल्कोहल (शराब) का सहारा न लें.हो सके तो फल और सब्जियों का सेवन करें. यदि आपको मीठा पसंद है और आपको डाइबिटीज़ नहीं है तो आप कभी कभी चॉकलेट केक या आइसक्रीम भी खा सकते हैं.

शुगर के कारण डाइबिटीज़ नहीं होता परन्तु इन चीज़ों से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरीज़ के कारण मोटापा बढ़ता है जिससे शुगर होने की संभावना होती है. इसके अलावा जब आप तनाव में होते हैं तो आपको मीठा अधिक खाने की इच्छा होती है क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में मूड को अच्छा करने वाले यौगिक पाए जाते हैं.ताज़े फल और सब्जियां मूल रूप में या सलाद के रूप में खाना फायदेमंद होता है. ऐसा मन जाता है कि फल को खाली पेट ही खाना चाहिए क्योंकि यदि इसे किसी अन्य खाद्य पदार्थ के साथ खाया जाए तो यह पेट में सड़ने लगता है जिससे अपचन प्रभावित होता है. यह पूर्ण रूप से गलत है.हर किसी के मन ये सवाल आता है कि एक वयस्क को प्रतिदिन कितने आहार लेने चाहिए?

क्या प्रतिदिन के आहार में अल्कोहल को शामिल करना अच्छा है? कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि प्रतिदिन एक गिलास वाइन पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है. प्रतिदिन अल्कोहल का सेवन करने से आपका लिवर खराब हो सकता है। विशेष रूप से महिलाओं में, प्रतिदिन अल्कोहल का सेवन करने से उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जो अल्कोहल का बिलकुल भी सेवन नहीं करती, पॉलिफेनोल्स डार्क चॉकलेट, चाय, अनार और ब्लूबेरी में पाए जाते हैं। आप सीमित मात्रा में दूध, अंडे, फिश और मांस का सेवन भी कर सकते हैं। किसी भी चीज़ की अति नुकसानदायक होती है. हम सभी सोचते हैं कि फिश में अच्छा फैट पाया जाता है अत: इन पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें.

चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय

सुन्दर चेहरा किसे अच्छा नहीं लगता है हर किसी की चाहत होती है कि उसका चेहरा सुन्दर और गोरा हो. और हर कोई यह चाहता की वो सबसे अलग और सुन्दर दिखे लेकिन कुछ लोगो को रंग थोड़ा सा सांवला होता है और वो अपने साँवलेपन को दूर करने के लिए कई तरह के कॉस्मेटिक क्रीम का इस्तेमाल करते है जिससे हमारी त्वचा को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. चेहरा बहुत संवेदनशील होता है इसलिए ये कॉस्मेटिक क्रीम हमारी त्वचा को काफी नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय करके खुद को सुन्दर बनाये.

 इसलिए अपने चेहरे पर आयुर्वेदिक औषधियों और प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल करें.  इससे आपके चेहरे पर कोई दुष्परिणाम नहीं दिखाई देता है और आपका चेहरा प्राकृतिक रूप से गौरा हो जाता है और आपका साँवलापन भी दूर हो जाता है. और चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो और चमक लाने के लिए घरेलू और प्राकृतिक चीजों का इत्सेमाल करें.

चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय

आयुर्वेद में हल्दी को एक बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक माना गया है और ये कई तरह से हमारी और चेहरे की सुन्दरता बढ़ने के लिए सबसे गुणकारी और उपयोगी माना जाता है. हमारे देश में कई तरह के तीज त्यौहार मनाये जाते है हर कंही कोई न कोई पार्टी या फक्शन जरूर होता है और इसलिए सब पार्टियों में सुन्दर दिखना चाहता है और इसीलिए हमारे यहाँ शादी के वक्त दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है. चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय करके खुद को सुन्दर बनाये. ताकि वो सुन्दर दिखे और यदि आप भी अपनी त्वचा की सुंदरता को बढ़ाना चाहते है तो रोज सुबह हल्दी में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर चेहरे पर लगायें. और इसे कुछ देर अच्छे से साफ़ कर लें इससे आपका चेहरा सुन्दर और चमकदार लगने लगेगा.

पपीता खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है और इसका उपयोग कई तरह से किया जाता है ये शरीर को ताकतवर भी बनता है लेकिन यदि आप इसका उपयोग से चेहरे को सुंदर बनाना चाहते है तो पपीते का उपयोग कर सकते है और इसका उपयोग करने के लिए आप  पपीते के गूदे को मसलकर उसका उबटन यानी फेस पैक बना लें और उसे अपने चेहरे पर २० मिनट तक लगायें और इसे सूखने के लिए छोड़ दें जब ये सुख जाये तो फिर कपड़े से साफ़ करके तिल का तेल अपने चेहरे पर लगा लें. यदि आप ऐसा हर दिन करते है तो इससे आपके चेहरे की सुंदरता बढ़ेगी और चेहरे की झुर्रियां ख़त्म हो जाएगी.

निम्बू का उपयोग गर्मियों के दिनों में ज्यादातर निम्बू पानी  बनाने में किया जाता है क्योंकि ये शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और शरीर में ठंडक पैदा करता है.नींबू चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय में सबसे बेहतर है, और यदि निम्बू के साथ शहद का उपयोग करते है तो आपको इसके काफी लाजवाब फायदे होंगे और इसका लाभ लेने के लिए आप निम्बू और शहद को बराबर मात्रा में मिला लें चेहरे पर लगायें. क्योंकि ये दोनों आपके चेहरे के लिए काफी फायदेमंद है. और इसे अपने चेहरे पर 10 मिनट लगा रहने दे और जब ये पैक अच्छी तरह से लग जाये तो 10  मिनट बाद ठन्डे पानी से धो लें. और आपको बता दें कि निम्बू एक  प्राकृतिक फेस वॉश की तरह काम करता है, इसके इस्तेमाल से चेहरे में मौजूद गंदगी और धुल मिटटी के कण बाहर निकल जाते हैं और चेहरा दमकने लगता है. और इतना ही नहीं इससे आपकी ऑयली फेस वाली त्वचा को फायदा होता है. और आपके चेहरे से ऑयली कम हो जाता है.

हर व्यक्ति की त्वचा अलग अलग होती है और सभी त्वचा में कोई न कोई अंतर पाया जाता है और यदि आपकी त्वचा या चेहरे पर ज्यादा ऑइल आता है तो आप निम्बू और शहद का इस्तेमाल कर सकते है लेकिन यदि आपके चेहरे की त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई है या फिर त्वचा रूखी सुखी है तो यह एक बहुत ही बड़ी समस्या हो सकती है क्योकि ड्राई स्किन होने के करना गाल और होते बहुत जल्दी फट जाते है जिसके कारण काफी जलन होती है. और अगर चेहरे के त्वचा रुखी-सूखी है तो खीरा ककड़ी का इस्तेमाल करे और इसके मिक्सचर को शहद के साथ मिला कर अपने मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं ऐसा करने से आपके चेहरे की ड्राई स्किन की समस्या दूर हो जाएगी और चेहरे को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल फायेगा.

कई सारे तरीके है जो आपके चेहरे को खूबसूरत बना सकते है. जैसे बेसन में शहद, तिल का तेल और निम्बू का रस मिलकर फेस पैक बनाकर कुछ दिनों चेहरे पर रोज सुबह नहाने से पहले लगायें और यदि आप ऐसा करते है तो आपकी चेहरे की सुंदरता बढ़ेगी और उसमे एक चमक आ जाएगी. और दिन में 2 बार नारियल पानी को अपने चेहरे पर लगाते है तो इससे चेहरे के काले दाग और मुंहासे ख़त्म हो जायेंगे. और सबसे सस्ता और आसान उपाय तो यह है कि रोज दही की लस्सी में शहद मिलाकर सेवन करें. इसके नियमित सेवन से चेकरे की त्वचा सुन्दर और कोमल बनती है.

केला में बहुत सारे न्युट्रीसंस और प्रोटीन मौजूद होते हैं जो सेहत और त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. चेहरे का पेस्ट तैयार करके इसे चेहरे पर लगायें। इससे चेहरे को प्राकृतिक नमी भी मिलती है जो चेहरे के लिए बहुत ही उपयोग है और जिससे चेहरे का सांवलापन दूर हो जाता है. निम्बू के रस में बादाम का तेल घोलकर चेहरे पर लगायें. इससे चेहरे का रंग साफ़ होगा. चेहरे पर नारियल के तेल से मालिश करने से चेहरे की त्वचा के खून का प्रभाव थोक होता है जिससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है. नारियल के तेल को गर्म करके इस्तेमाल करें. तुलसी के पत्तों का रस निकालकर निम्बू के रस में मिला लें और इससे चेहरे की मालिश करें. इससे चेहरे के दाग-धब्बे के निशान और कील मुहासे ख़त्म हो जाते हैं.

टमाटर चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के उपाय में टमाटर का योगदान सबसे बेहतर है. जितना सेहत के लिए फायदेमंद होता है उतना ही चेहरे के लिए भी होता है. तैलिये त्वचा वाले लोग रोजाना अपने चेहरे पर टमाटर के रस को लगायें. यह चेहरे में मौजूद oil को सोख लेता है जिससे चेहरा चमकने लगता है. गुलाब जल में निम्बू का रस मिलाकर लगाने से भी चेहरा दाग धब्बों से रहित और कोमल होता है. रात को सोने से पहले देशी घी से चेहरे की मालिश करें. इससे चेहरे पर मौजूद चोट के निशान और दाग-धब्बे धीरे-धीरे ख़त्म हो जायेंगे.

ब्रश करने का सही तरीका

ब्रश करने का सही तरीका :- कई बार लोग ये अक्सर पूछते है कि क्या टूथब्रश इस्तेमाल करने का भी कोई सही तरीका होता है? और हमें किस तरह ब्रश करना चाहिए ? लेकिन क्या आप जानते है कि गलत तरिके से ब्रश करने से कई तरह की समस्याओं दांतो में हो जाती है जैसे उनमे गंदगी का जमा रहना, दांतो का हिलना और कमजोर हो जाना और भी कई प्रकार की समस्याएं होती है जो दांतो में अक्सर हो जाती है. शायद आप ब्रश करने का सही तरीका नहीं जानते होंगे. दांत हमारे शरीर और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग हैं. शरीर के अन्य हिस्सों की तरह इनकी सफाई करना भी बहुत ही ज़रूरी है पर बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्रश करने का सही तरीका क्या है?

ब्रश करने का सही तरीका

गलत तरीके से ब्रश करने से दांत साफ़ तो होते ही नहीं हैं साथ में दांतों को कई तरह के रोगों का सामना करना पड़ता है.हम लोग बचपन से सिर्फ एक ही तरीके से ब्रश करते आ रहे हैं या कहा जाये कि एक ही तरीका हमें पता है और वो है क्षैतिज रूप से (हॉरिज़ॉन्टली) मसूड़ों पर ब्रश करना. इस तरीके से मसूड़ों को नुकसान पहुँच सकता है. दांतो को सही तरीके से ब्रश करने का तरीका है उन्हें 45° पर ब्रश करें. हमेशा ब्रश को गोलाई में घुमाते हुए ब्रश करें और ब्रश करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि ब्रश करते समय कभी भी ब्रश को तिरछा न पकड़े क्योंकि ये आपके दांतो और मसूड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है. और ऐसा करने से आपके मसूडों से खून भी आ सकता है और दांतो के बीच फंसी हुयी गंदगी भी ठीक तरह से साफ़ नहीं होती है.

इसलिए आपको हमेशा ब्रश करते समय इस बात ध्यान रखना चाहिए की ब्रश और दांतों के मध्य 45° का एंगल बनना चाहिए तभी वो ठीक तरह से साफ़ होंगे और उनकी गंदगी बाहर निकलेंगी. ब्रश करने के बिषय में आप को शायद कुछ बाते पता नहीं होगी. जैसे की कैसे ब्रश करें और कितने समय तक ब्रश करें और कम समय तक ब्रश करने से दांत न ही अच्छे से साफ़ होते हैं न ही सारा प्लाक यानी कचरा उन में से निकलता है. दूसरी ओर ज्यादा देर ब्रश करने से दांतों का इनमे मल निकल जाता है. इसलिए न तो अधिक देर तक ब्रश करना चाहिए न ही कम देर तक. सुबह और सोने से पहले दिन में दो बार दो से तीन मिनटों तक ब्रश करें.

और ऐसा करने से आपके दांत भी मजबूत रहते है और उनमे सड़न भी नहीं होती है और वो बहुत समय तक मजबूत बने रहते है.ब्रश करने के लिए टूथब्रश का चुनाव करते समय हमेशा मुलायम नायलॉन के और नर्म ब्रश को चुनें. अन्य ब्रश दांतो को साफ़ नहीं करते बल्कि इन से मसूड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है. जिन टूथब्रश के रेशे ख़राब हो चुके हों वो दांतो को अच्छे से साफ़ नहीं कर पाते हैं. इसके अलावा अपने ब्रश को समय-समय पर बदलते रहें फ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. इससे न केवल दांत साफ़ होते हैं बल्कि मजबूत भी होते हैं और दांतों में चिपके प्लाक भी इस टूथपेस्ट के प्रयोग से आसानी से निकल जातें हैं. और भी कई तरह के ब्रश बाजार में मौजूद है जिनका चुनाव आप आसानी से कर सकते है और जोकि आपके दांतों और मसूड़ों के लिए सबसे बेहतर होते है.

टूथब्रश करने का सही तरीका

इसलिए हमेशा ब्रश लेते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखे की वो बहुत ज्यादा कड़क न हो. मुलायम ब्रश आपके लिए सबसे बेहतर रहेगा.ब्रश के चुनाव के साथ साथ आपको सही टूथपेस्ट का चुनाव करना होगा क्योंकि कुछ टूथपेस्ट काफी ज्यादा नुक्सानदेय होते है जिनके कारण मुँह में छाले भी हो जाते है इसलिएफ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. इससे न केवल दांत साफ़ होते हैं बल्कि मजबूत भी होते हैं और दांतों में चिपके प्लाक भी इस टूथपेस्ट के प्रयोग से आसानी से निकल जातें हैं. और ब्रश करने का सही तरीका तो यही है आप सब कुछ अपने हिसाब से चुने जो आपके के लिए आरामदेय हो. और ब्रश करने का सही तरीका यही है.

कि आप दांतो को सारी तरफ अच्छे से ब्रश करें जैसे दाढ़ों पर और दांतो के पिछले भाग पर भी. नॉर्मली हम इन जगहों पर ब्रश नहीं करते. ब्रश को हमेशा अंदर की ओर घुमाएं और इसके साथ पीछे से आगे की ओर ब्रश करें. अपनी दोनों ओर की दाढ़ों पर भी अच्छे से ब्रश करें. इससे आपके दांत लम्बे समय तक मजबूत बने रहेंगे.कुछ ख़ास बातें है जो ब्रश करने का सही तरीका बताती है और जिनका हमें अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जैसे दांतो को ब्रश करने के साथ-साथ अपनी जीभ को भी ज़रूर साफ़ करें. इसके लिए आप ब्रश के पीछे का भाग या टंग क्लीनर का प्रयोग करें.

दांतो को साफ़ करते हुए अधिक दवाब न डालें इससे मसूड़ों को नुकसान हो सकता है.ब्रश करने के बाद कुल्ला ज़रूर कर लें ताकि मुँह में जमी हुई गंदगी निकल जाये. खाना खाने के एकदम बाद ब्रश करना गलत हैं इससे दांत कमजोर हो जाते हैं.खाना खाने के कम से कम तीस मिनटों के बाद ब्रश करें. ब्रश करने के बाद अपने टूथब्रश को अच्छे से साफ़ करें. तो ये सब ब्रश करने का सही तरीका है.

मुंह की बदबू का इलाज

मुंह की बदबू (bad breath) काफी शर्मनाक अनुभव होता है और यह आपके आत्मविश्वास में कमी भी ला सकता है।

मुंह से बदबू आने का कारण है – जीभ के पीछे और दांतों के बीच में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया का पनपना। बैक्टीरिया पैदा होने के निम्न कारण हो सकते हैं – सुगंधित खाद्य पदार्थों का सेवन, धूम्रपान, मुंह का सूखापन, मसूड़ों की बीमारी, खाने के बाद ठीक से मुंह न धोना आदि। कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे साइनस के कारण भी यह समस्या हो सकती है

इसलिए मुंह में बदबू आने से बचने के लिए मुंह को साफ़ रखना बेहद जरुरी होता है। नियमित रूप से दांतों पर ब्रश करें और जीभ को साफ रखें।

सांसों को फ्रेश रखने के लिए दिनभर जरूरत अनुसार पानी पीना भी जरूरी होता है। साथ ही, खाने के बाद अपने मुंह को पानी से अच्छी तरह से कुल्ला करें। इससे दांतों के बीच में फसे भोजन के कण बाहर निकल जायेंगे।

इसके आलावा कुछ घरेलू उपचारों के माध्यम से भी मुंह की बदबू का इलाज किया जा सकता है। इनमें से 10 सबसे कारगर इलाज नीचे दिए जा रहे हैं –

1. सौंफ

सौंफ काफी अच्छे माउथ फ्रेशनर की तरह काम करती है, इसलिए मुंह की बदबू को दूर करने में यह फायदेमंद है। इसमें एंटी-माइक्रोबियल प्रॉपर्टीज भी होती हैं जो मुंह के बैक्टीरिया से लड़ती हैं। यह मुंह में लार के प्रोडक्शन को भी बढ़ा देती है जिससे मुंह का सूखापन दूर हो जाता है।

  • अपने मुंह को तुरंत फ्रेश करने के लिए एक चम्मच सौंफ को चबाएं।
  • आप सौंफ की चाय का सेवन भी कर सकते हैं। चाय बनाने के लिए एक कप पानी में दो चम्मच सौंफ डालकर 5 से 10 मिनट के लिए उबालें।

2. दालचीनी

दालचीनी में सिनामिक एल्डिहाइड (Cinnamic aldehyde) नामक आयल होता है जो मुंह की बदबू को कम करता है और मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है।

मुंह को फ्रेश रखने के लिए नीचे दिए गए उपचार को दिन में दो बार अपनाएं

  • एक चम्मच दालचीनी के पाउडर को एक कप पानी में डालकर उबालें।
  • आप इसमें कुछ तेज पत्ते और इलाइची भी डाल सकते हैं।
  • अब इस मिश्रण को छान लें और ठंडा होने दें।
  • ठंडा होने के बाद इससे अपने मुंह को अच्छी तरह से साफ करके कुल्ला करें।

3. मेथी की चाय

श्लेष्मा झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) में इन्फेक्शन होने पर मेथी की चाय काफी फायदेमंद होती है।

  • एक कप पानी में एक चम्मच मेथी के बीजों को उबालें।
  • अब इसे छानकर सेवन करें।
  • इसे तब तक रोज सेवन करें जबतक कि इन्फेक्शन ठीक न हो जाये।

4. लौंग

लौंग भी मुंह को फ्रेश करने में मदद करती हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं जो मुंह की बदबू को दूर करने में मदद करती हैं।

  • एक लौंग को अपने मुंह में दबा लें और धीरे-धीरे चबाएं। इससे कुछ ही मिनट्स में बदबू दूर को जायगी।
  • आप लौंग की चाय को भी बना सकते हैं। एक कप पानी उबालें, अब इसमें एक चम्मच लौंग का पाउडर डालकर अच्छी तरह से घोल लें। अब इस चाय को धीरे-धीरे चुस्कियां लेकर सेवन करें।

5. अजमोद (अजवाइन का हरा पौधा)

अजवाइन के हरे पौधे को अजमोद भी कहा जाता है। इसमें अत्यधिक क्लोरोफिल (chlorophyll) होता है जो मुंह की बदबू को बेअसर कर देता है।

  • अजमोद की पत्तियों या टहनी को चबाकर खाएं। आप इसे सिरका (विनेगर) में भिगोकर भी खा सकते हैं।
  • या फिर, अजमोद की पत्तियों को पीसकर जूस बनायें और सुबह शाम सेवन करें। इससे आपका पाचन भी ठीक होगा।

6. निम्बू का रस

मुंह से बदबू का इलाज करने के लिए निम्बू के रस का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। निम्बू में एसिडिक पदार्थ होते हैं जो मुंह में बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं। साथ ही इसकी मजबूत सुखद गंध, बदबू को दबा देती है।

  • एक कप पानी में एक चम्मच निम्बू का रस डालकर घोलें।
  • अब इसे मुंह डालकर, मुंह को अच्छी तरह से साफ़ करें और कुल्ला करें।

यह उपचार मुंह के सूखेपन को दूर करेगा जो मुंह से बदबू आने का सबसे मुख्य कारण होता है।

7. सेब का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर)

सेब का सिरका मुंह के pH को संतुलित करने में मदद करता है। इसलिए यह मुंह में बैक्टीरिया को पैदा होने से रोकता है।

  • रोज खाना खाने से पहले एक चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाकर पियें। यह आपके पाचन को भी ठीक रखेगा।
  • या फिर, एक कप पानी में सेब का सिरका मिलाकर गरारे करें।

8. बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा भी मुंह की बदबू को दूर करने में फायदेमंद होता है। यह मुंह में बदबू पैदा करने वाली एसिड्स को कम करता है और बैक्टीरिया से लड़ता है।

  • एक गिलास पानी में डेढ़ चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। अब इससे मुंह को साफ करके कुल्ला करें। ऐसा रोज एक बार करें।
  • बेकिंग सोडा से दांतों का मंजन करने से भी मुंह की एसिडिटी कम होती है और जीभ पर बैक्टीरिया नहीं पनप पाते।

9. टी ट्री आयल (चाय के पौधे का तेल)

टी ट्री आयल में एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो मुंह में किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन को होने से रोकती हैं। आप ट्री का इस्तेमाल निम्न तरीकों से कर सकते हैं –

  • टी आयल आयल युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
  • या फिर, अपने रेगुलर टूथपेस्ट में थोड़ा सा टी ट्री डालकर ब्रश करें।
  • टी ट्री आयल, पुदीना के रस और निम्बू के रस को एक गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें।

10. हर्बल टी

ग्रीन टी और ब्लैक टी में पॉलीफेनॉल्स एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मुंह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकते हैं।

  • ग्रीन टी या ब्लैक टी का नियमित सेवन करें।

यदि ऊपर दिए गए उपचारों को अपनाने के बाद भी आपकी मुंह की बदबू की समस्या ठीक नहीं हो रही है तो किसी अच्छे डॉक्टर या डेंटिस्ट से उचित जाँच कराएँ।

उदासी दूर करना चाहते हैं, तो इन 5 चीजों से बनाएं दूरी

उदास रहना कौन चाहता है, सभी को खुशुनुमा और तनाव रहित जीवन अच्छा लगता है। लेकिन कुछ बातें या चीजें ऐसी होती है जो उदास कर ही देती हैं। कई बार आपके खानपान के कारण भी आती है चेहरे पर उदासी। जानिए कौन सी वें 5 चीजें - 

1 एल्कोहल - एल्कोहल को भले ही आप अपनी खुशी का साथी मानते हों, पर गम का साथी भी तो यही है ना! यह सीधे आपके तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और उसकी गति को धीमा कर देता है, जिससे आप कई बार खुशी में भी उदासी महसूस कर सकते हैं।

2 मीट - खास तौर से लाल मांस या फिर डिब्बाबंद मांस इस मामले में बेह नुकसानदायक है। इनमें संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है जो इंसुलिन के स्तर में बदलाव करता है। इसके दुष्परिणाम के रूप में न केवल उदासी बल्कि कई गंभीर बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

3 सफेद ब्रेड - एक शोध में यह पाया गया है कि सफेद ब्रेड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा महिलाओं में उदासी का कारण बन सकती है। यह थकान का कारण भी बन सकती है।

4 कॉफी - भले ही थकान दूर कर ऊर्जा देने में सहायक है, लेकिन इसमें मौजूद कैफीन आपकी नींद और चैन को छीन लेता है, जिसके कारण मानसिक थकान होकर अंत में उदासी से सामना करना पड़ता है। 

5 चावल - चावल का अत्यधिक सेवन भी उदासी के लिए जिम्मेदार हो सकता है। इसमें रिफाइंड काबोहाइड्रेट पाया जाता है जो हार्मोनल बदलाव करने के साथ ही शरीर के ग्लाइसेमिक सूचकांक को प्रभावित करता है और उदासी महसूस होती है।

तंग मोजे न पहनें, वरना हो सकती हैं ये 5 समस्याएं

प्रोफेशनल लाइफ में मोजे पहनना हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन मोजे पहनते वक्त इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ये आपके पैरों में अधिक तंग न हों। अगर आप रोजाना तंग मोजे पहनते हैं, तो आपको हो सकते हैं यह 5 नुकसान - 

अधिक तंग मोजे पहनने पर आपको पैरों में सूजन आ सकती है साथ ही रक्तसंचार तीव्र होने से बेचैनी और शरीर में अचानक अत्यधिक गर्मी लगने जैसी समस्याएं हो सकती है।

2 अगर आप लंबे समय तक तंग मोजे पहन कर रखते हैं, तो पैरों में अकड़न हो सकती है और एड़ी व पंजे वाला हिस्सा सुन्न पड़ सकता है। 

3 पैरों में पसीना निकलने के साथ ही नमी पैदा होने से फंगल इंफेक्शन की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे पैरों की त्वचा खराब हो सकती है।

तंग मोजे पहनने की आदत आपको वेरिकोज वेन्स की समस्या का शिकार बना सकती है। इतना ही नहीं, अगर आपको यह समस्या पहले से है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

इसके अलावा तंग मोजे पहनने का एक आम लेकिन परेशानी भरा नुकसान है इससे पैरों पर निशान बन जाने से खुजली और जलन होना।

ऐसे करें चांदी के वर्क की पहचान, ये रहे 5 टिप्स

मिठाईयों पर लगाया जाने वाला चांदी का वर्क जितना आकर्षक लगता है, सेहत के लिए भी उतना ही फायदेमंद होता है। लेकिन वर्तमान में जहां हर चीज में मिलावट होती है वहां चांदी का वर्क भी मिलावट से अछूता नहीं है। ऐसे में अगर आप नकली चांदी के वर्क लगी मिठाईयां खाते हैं, तो यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जान लीजिए नकली वर्क को पहचानने के 4 तरीके - 

चांदी का वर्क लगी कोई भी मिठाई लेकर इसे अपनी अंगुली पोंछने का प्रयास करें। अगर पोंछते समय यह आपके हाथ में चिपकता है, तो इसका मतलब है इसमें एल्युमिनियम है। लेकिन अगर यह आपके हाथ में नहीं चिपकता और गायब हो जाता है, तो यह पूरी तरह सुरक्षित है।

नकली वर्क थोड़ा मोटा होता है जबकि असली वर्क महीन होता है। अगर मिठाई पर लगे चांदी के वर्क को उतारा जाए और इसे गर्म किया जाए, तो यह चांदी के गोले की तरह तब्दील हो जाएगा। लेकिन अगर वर्क मिलावटी है, तो जलाने पर यह काला पड़ जाता है या फिर राख में बदल जाता है, क्योंकि इसमें एल्यमिनियम मिला होता है।

चांदी के वर्क को परखनली में लेकर अगर हाइड्रोक्लोरिक एसिड की एक बूंद डाली जाए तो यह सफेद वेग के साथ टदबाइड हो जाएगा। लेकिन अगर यह मिलावटी है, तो यह टरबाइड नहीं होगा। इसका मतलब है कि इसमें चांदी नहीं बल्कि एल्युमिनियम है।

अगर आप चांदी के वर्क को हाथ में रखकर हथेली के बीच रगड़ेंगे, तो यह गायब हो जाएगी। लेकिन अगर चांद के वर्क में मिलावट है, तो यह एक बॉल के रूप में एकट्ठा हो जाएगा।

चांदी का वर्क अगर असली है, तो यह लंबे समय तक भी टिका रहता है और इसकी चमक कम नहीं होती। लेकिन अगर यह एल्युमिनियम है, तो पुराना होने पर इसका रंग काला पड़ जाता है।

सर्दी की धूप से निखरेगी सेहत और खूबसूरती, जानें 5 टिप्स

सर्दी के मौसम में गुनगुनी धूप किसी अमृत से कम नहीं होती। आनंददायक होने के साथ ही यह आपकी सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होती है। जानिए धूप ऐसे ही 5 फायदे, जो निखारते हैं आपकी सेहत और रूप, दोनों को -

गुनगुनी धूप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कैल्शियम के अवशोषण में सहायक है। अगर आप कैल्शियम के लिए दूध पीते हैं, तो धूप का सेवन उस कैल्शियम के शरीर में अवशोषित होने में मदद करता है।

सर्दी के दिनों में कई बार मन सुस्त सा होता है, जिसे आनंदित करने में धूप बेहद कारगर साबित होती है। वहीं हल्की गर्माहट के साथ यह आपको उर्जा प्रदान करने में सहायक होती है।

त्वचा की सिकुड़न, फंगस एवं अन्य चर्म रोगों के लिए धूप एक नैचुरल उपाय है। त्वचा में नमी के कारण पनपने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए धूप फायदेमंद है।

मांसपेशियों में होने वाली अकड़न से बचने में धूप लेना फायदेमंद होता है। यह न केवल बाहरी तौर पर शारीरिक अंगों की रक्षा करती है बल्कि आंतरिक अंगों को भी गर्माहट प्रदान कर स्वस्थ रखती है।

यह दर्द को कम करने एवं थकान उतारने में सहायक है, जिसका असर आपके सौंदर्य पर भी सकारात्मक रूप में पड़ता है। वहीं आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए भी धूप लेना कारगर होता है।

5 सब्जियां, सेहत संवारे, सुंदरता निखारे

सब्जियां सिर्फ सेहत के लिए ही उपयोगी नहीं होतीं, बल्कि ये आपकी सुंदरता में भी इजाफा कर सकती हैं। यकीन नहीं होता? तो आजमाइए इन असरदार उपायों को। दिन-ब-दिन निखरती त्वचा आपको अहसास दिला देगी कि सब्जियां सौंदर्यवर्धक भी होती हैं।

टमाटर: टमाटर के रस में नीबू का रस मिलाकर लगाने से खुले रोम छिद्रों की समस्या दूर होती है। तैलीय त्वचा होने पर टमाटर को आधा काटकर चेहरे पर रगड़ें। कुछ देर बाद चेहरा धोकर पोंछ लें। ऐसा करने से अतिरिक्त तैलीयता दूर होती है।

आलू: आलू की पतली स्लाइसें आंखों पर रखने से थकी आंखों को राहत मिलती है। कच्चे आलू का रस आंखों के डार्क सर्कल्स दूर करता है। आलू उबालने के बाद बचा पानी फेंकिए नहीं, इसमें कुछ देर हाथ डुबोकर रखें, फिर साफ पानी से धोएं। आपके हाथ साफ व मुलायम हो जाएंगे।

खीरा: खीरा नैचुरल क्लींजर है। ऑइली स्कीन वालों के लिए यह बेदह लाभप्रद है। खीरे के रस में चंदन पावडर मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें। इसके नियमित प्रयोग से चेहरा झाइयों रहित हो जाएगा। इसके अलावा खीरा (ककड़ी) के रस में गुलाबजल एवं कुछ बूंदें नीबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग साफ होता है।

पुदीना: महकता पुदीना आपको मुंहासों की समस्या से मुक्ति दिला सकता है। पुदीना पेस्ट में चंदन चूरा एवं मुल्तानी मिट्टी मिलाकर चेहरे पर लगाएं। सूखने पर धो लें। इसका नियमित इस्तेमाल पिंपल्स दूर करने में सहायक है।

मूली: सलाद की शान मूली आपके मुरझाए चेहरे में नई जान डाल सकती है। मूली के रस में मक्खन मिलाकर नियमित चेहरे पर लगाने से रुखापन एवं झाइयां दूर होती हैं। मूली का रस ब्लैकहेड्स से निजात दिलाता है।

चाय पीने के फायदे और नुकसान

दोस्तों आज की पोस्ट हम लोग बात करेंगे चाय पीने के फायदे और नुकसान की आज की पोस्ट बहुत इंपॉर्टेंट है. चाय भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग बन चुकी है, सर्वे के अनुसार पाया गया है लगभग 90% भारतीय बिना नागा किए चाय पीने के आदी होते हैं. इनमें से लगभग 25% लोग दिन भर में 2 बार से लेकर चार या पांच बार तक चाय का सेवन कर लेते हैं क्या आप जानते हैं यह अच्छी आदत है या नहीं इसके फायदे और नुकसान के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप इस पोस्ट को पूरा अंत तक जरुर पढ़ें.

चाय पीने के फायदे और नुकसान, और इससे होने वाले रोग

चाय पीने के फायदे और नुकसान इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आप इसपर अमल करेंगे तो आप निश्चित रूप से बहुत फायदे में रहेंगे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हम भारतीयों को इस इस बीमारी की लत देखा देखी लगी है. चाय भारतीय देन नहीं है चाय अंग्रेज अपने साथ भारत में लाए थे. लेकिन उस वक़्त भारतीय लोगों ने सोचा के अंग्रेजों के इस महँगे शौक को हमें भी अपनाना चाहिए बस यहीं से भारतीय लोगों ने इस बीमारी को अपने गले लगा लिया और तब से लेकर आज तक ये चलन जारी है .

चाय हमारे मानव जीवन पर स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत खराब असर डालती है इसके सेवन से पाचनक्रिया तंत्र गढ़बढ़ा जाता है और यह तमाम पेट के रोगों के लिए भी जिम्मेदार है.

क्या आपने कभी सोचा है हमारे लिए चाय पीना जरुरी भी है या नहीं आपकी जानकारी के लिए हम बता दें चाय उनके लिए पीना सहे है जो लोग यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे हैं. ये उनके लिए सही भी है लेकिन गर्म देशों में रहने वाले लोगों के लिए चाय जहर के समान होती है.

जैसे कि हमारा भारत इसकी वजह यह है कि गर्म देशों में रहने वाले लोगों के पेट में अम्ल यानी के एसिड की मात्रा पहले से ही ज्यादा होती है और जब हम चाय पीते हैं तो यह एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. किसी किसी को सीने में जलन या फिर लोगों के पेट में जलन जलन होती है ये चाय पीने का असर होता है यह चाय की वजह से ही होती है उन लोगों के पेट में चाय पीने की वजह से एसिडिक की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट की अन्य बीमारियां भी बनने का डर रहता है.

चाय पीने के नुकसान क्या हैं?

चाय पीने के फायदे और नुकसान लगातार चाय पीने से आपके शरीर में ब्लड शुगर की बीमारी या हार्ट से संबंधित मतलब दिल की बीमारियां होने का डर बना रहता है, इसके साथ-साथ आपके शरीर में सबसे खतरनाक ब्लड प्रेशर की बीमारी होने का डर बढ़ जाता है. अगर आप चाहे तो एक छोटा सा प्रयोग करके भी इसको आजमा सकते हैं.

इसके लिए आप सबसे पहले सामान्य रूप से अपना ब्लड प्रेशर और शुगर चेक करवाएं और फिर एक कप चाय पीने के तुरंत बाद अपना ब्लड प्रेशर और शुगर दोबारा से चेक करें आपको पता लग जाएगा चाय पीने के कितने भयंकर परिणाम हो सकते हैं. और शायद इसका रिजल्ट देखने के बाद आप चाय पीना ही छोड़ दें.

  • चाय पीने की आदत आपके पाचन तंत्र पर सबसे बुरा प्रभाव डालती है जिससे आपके खाना पचाने की प्रक्रिया पूरी तरह से गड़बड़ हो जाती है और चाय पीने से भूख भी मर जाती है.
  • चाय पीने से पेट में गैस बनना चालू हो जाती है और आपके पेट के अंदर अम्लीय मात्रा बढ़ जाने के कारण आपके सीने में जलन और खट्टी डकारें जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है अगर आपको गैस बनने की शिकायत है तो आपको चाय पीना बंद कर देना चाहिए.
  • चाय पीने से अक्सर देखा गया है कि लोगों के हाथ पैरों में दर्द लगातार बना रहता है अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो आपको चाय का सेवन बंद कर दें क्योंकि चाय पीने से हड्डियों पर असर पड़ता है और वह दर्द करना शुरू हो जाती है.
  • चाय ऐसे लोगों को सेवन करना चाहिए जो ठंडे स्थानों पर रहते हैं, क्योंकि ठंडे इलाकों में रहने वाले लोगों के ब्लड प्रेशर लो (LOW) रहता है या जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो होने की शिकायत है उन लोगों के लिए चाय सही है, क्योंकि चाय पीने से ब्लड प्रेशर जल्दी High हो जाता है.
  • चाय पीने से आपके शरीर में केलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, केलेस्ट्रॉल बढ़ना मतलब आपके शरीर में रक्त में कचरे की मात्रा को बढ़ाना जिससे आपके दिल तक सुचारु रुप से ब्लड सर्कुलेशन यानी के खून का संचार सही नहीं हो पाता जिससे बाद में दिल की बीमारी है शुरू हो जाती है या हार्ट अटैक जैसी समस्या भी आ सकती है.

चाय पीने की लत (आदत) को कैसे छुड़ाएं

चाय पीने के फायदे और नुकसान अक्सर देखा गया है किसी चीज को पीने की लत लग जाए तो मानव शरीर एकदम से उसे छोड़ने के लिए राज़ी नहीं होता. जिस तरह से शराब या कोई अन्य नशे के लोग आदी रहते हैं बिल्कुल ठीक इसी तरह से चाय पीने वालों के साथ भी यह समस्या है, क्योंकि वह बचपन से ही चाय पीते हैं हुए आ रहे हैं और यह एकदम से छोड़ना बिलकुल नामुमकिन सा होता है.

इस समस्या को दूर करने के लिए और चाय पीने के नुकसान से बचने के लिए आप चाय में चीनी की जगह अगर गुड़ का उपयोग करेंगे और इसके साथ-साथ आपकी चाय में दूध का इस्तेमाल ना करते हुए चाय को पिया जाए तो ठीक रहता है. इसके अलावा आप हरी पत्तियों वाली चाय का उपयोग करें तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी हुई हमारे भारत में अधिकतर काली बारीक या दानों वाली चाय चलती है जो एक कचरे के समानहोती है.


टीबी रोग के लक्षण

टीबी रोग के लक्षण – आजकल Enviroment बहुत ही ज्यादा Polluted हो चूका है और आजकल जितनी तेज़ी से Techology हमारी ज़िंदगी में जगह बनाती जा रही है. उतनी ही तेज़ी से लोगों में बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं. टीबी को एक बहुत गंभीर बीमारी माना जाता है. और टीबी का पूरा नाम Tuberculosis है और ये सबसे ज्यादा भारत में होती है और भारत में हर साल लगभग 4 लाख लोग टीबी रोग से मृत्यु हो जाती है इसलिए टीबी रोग के लक्षण को जानना बहुत जरूरी क्योंकि टीबी रोग के इलाज के लिए बहुत ही जरूरी है.

और ये रोग सबसे ज्यादा हमारे देश में सबसे ज्यादा तेजी से फ़ैल रहा है और इसे कुछ लोग अनुवांशिक बीमारी मानते हैं, लेकिन आपको यह जानकर शायद अच्छा लगे कि ये बीमारी अनुवांशिक बीमारी नहीं है क्योंकि ये बीमारी किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है और और इसका इलाज लगभग असंभव है लेकिन लेकिन हमारी Medical Science इतनी तरक्की कर चुका है कि आज के समय में इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से किया जा सकता है.

टीबी रोग के लक्षण

पर यदि कोई व्यक्ति टीबी रोग के लक्षण पहले से जान लेता है और समय पर इस का इलाज कराने लगता है तो वह आसानी से और नियमित खुराक से टीबी रोग से पूर्णतः छुटकारा पा सकता है. टीबी रोग का इलाज करने से पहले टीबी के बारे में जानना बहुत है टीबी को वैज्ञानिक भाषा में ट्यूबरक्लोसिस के नाम से भी जाना जाता है जो कि एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया की वजह से होता है एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है और यह बैक्टीरिया शरीर के सभी हिस्सों में फैलकर संक्रमण फैला देता है. और शरीर को कमजोर बना देता है और सामान्यतः यह फेफड़ों में ही पाया जाता है.

और टीबी रोग सिर्फ हमारे फेंफड़ों में ही नहीं बल्कि शरीर के हर एक अंग को धीरे-धीरे प्रभावित करता है जैसे आंतें, मस्तिष्क, हड्डियां, जोड़े, गुर्दे, त्वचा, हृदय भी इससे सभी अंग संक्रमित हो जाते है और बीमारी के ज्यादा फैलने पर रोगी को बचा पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है. और इसलिए टीबी रोग के लक्षण जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी है.

टीबी रोग के लक्षण

सबसे पहला और आसानी से पहचाना जाने वाला लक्षण है जोकि कोई भी व्यक्ति बहुत ही आसानी से पहचाना जा सकता है इस रोग प्रमुख लक्षण ये कि इस रोग में लम्बे समय तक खांसी चलती है और यदि आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है तो यह टीबी का शुरूआती चरण हो सकता है. और इसलिए खांसी होने पर अपने बलगम जांच अवश्य करवाएं.

और दूसरा और सामान्य लक्षण जो रोगी खुद ही देख सकता है. टीबी के शुरूआती लक्षणों में बलगम से साथ खून आना शुरू हो जाता है और यदि आपको भी बहुत तेज खांसी हो रही है और आपके बलगम में खून आ रहा है तो Seriously लेना चाहिए क्योकि ये टीबी का दूसरा लक्षण है. और ऐसा होने पर तुरंत किसी अच्छे Doctor से मिले और इसका Treatment करना शुरू कर दें.

टीबी रोग के लक्षण और इलाज

और जब किसी व्यक्ति को बुखार आता है और वो बुखार आम बुखार से अलग हो मतलब कि दिन में बुखार ना चढ़े और जैसे जैसे शाम हो वैसे वैसे बुखार बढे तो यह टीबी का लक्षण है इसे नज़रअंदाज़ न करें तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.यदि आपको सांस लेने में थोड़ी सी समस्या आ रही है तो ये सांस संबंधी रोग हो सकता है लेकिन यदि बहुत ज्यादा परेशानी हो रही और सीने में बहुत ज़ोरो का दर्द होने लगे तो ये भी टीबी का प्रमुख लक्षण है अगर किसी भी जलन या दर्द सीने में होता है तो ये टीबी हो सकता है इसलिए लापरवाही न करें और तुरंत इसका इलाज कराएं और अपना जीवन बचाएं.

टीबी होने पर या फिर शरीर का इसके द्वारा संक्रमित होने पर व्यक्ति को भूख लगनी बंद हो जाती है, और बाद में उसे किसी भी चीज को खाना अच्छा न लगे तो ये टीबी हो सकता है. और भूख न लगने की वजह से व्यक्ति को शरीर में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिससे उसके वजन में भारी मात्रा में गिरावट आने लगती है और उसका शरीर बहुत ही दुबला हो जाता है. और सबसे ज्यादा Infection फेंफड़ो में फैलता है.रात को सोते समय अत्यधिक पसीना आना भी टीबी का एक लक्षण है. ये कुछ टीबी रोग के लक्षण है जिन्हे पहचान कर आप टीबी से बच सकते है.

शराब छुड़ाने के उपाय

शराब छुड़ाने के उपाय :- शराब का नशा दुनिया में ज़हर के समान माना जाता है और सबसे ज्यादा घातक माना जाता है. और शराब के ऊपर किये अध्ययन के अनुसार शराब पीने से पूरी दुनिया में लगभग हर माह लगभग 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है क्योंकि इसका नशा सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. और एड्स, टीबी और हिंसा के शिकार व्यक्तियों को मिलाकर देखा जाए, तो भी शराब पीने के कारण मरने वालों की संख्या कई गुना ज्यादा है. और और पूरी दुनिया में हर दिन होने वाली 18 मौतों में एक मौत शराब की कारण होती है और सड़क दुर्घटनाओं में भी सबसे ज्यादा मौतें शराब के नशे में गाड़ी चलाने से ही होती है. शराब छुड़ाने के उपाय बहुत ही आसान है.

शराब छुड़ाने के उपाय

विश्व के स्वास्थ्य संगठन WHO के आंकड़ों के अनुसार शराब की वजह से हर 10 सेकेंड पर एक व्यक्ति की मौत होती है. विश्व भर में मरने वाले लोगों में से करीब 6 प्रतिशत शराब की वजह से मरते है. वैज्ञानिको के अनुसार लगभग 200 से ज्यादा बीमारियाँ केवल शराब के कारण ही होती हैं. और ज्यादा शराब पीने से लिवर का कैंसर या लिवर सिरोसिस होने का खतरा बन जाता है जोकि किसी दूसरे कारण के मुकाबले 10 गुना ज्यादा प्रभावी है. इसके अलावा निमोनिया, एड्स, टीबी और नपुंसक होने का खतरा भी शराब की पीने से बढ़ता है. शराब हमारी मेमोरी और दिमाग पर भी बुरा प्रभाव डालता है. और जो व्यक्ति रोज़ शराब पीने है उनको आँखों से कम दिखने लगता है इससे पुरे शरीर के अंग प्रभावित होते है.

शराब महिलाओं के लिए भी बहुत ही ज्यादा खतरनाक और जानलेवा है. इससे उनकी प्रजनन क्षमता यानी बच्चे पैदा करने की शक्ति भी प्रभावित होती है. और उनकी होने वाली संतानो पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है. और वो कमजोर, मानसिक रूप से दुर्बल एवं विकलांग और कई रोगों के साथ पैदा होता है. शराब की वजह से महिलाओं में कोलन (मलाशय) और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है. इसलिए महिलाओं को शराब नहीं पीना चाहिए.

इसके अलावा शराब की वजह से कई सारी बुराइयों को भी बढ़ावा मिलता है क्योंकि शराब पीने के बाद व्यक्ति को किसी भी चीज़ का होश नहीं रहता है. वो पूरी तरह से मदहोश हो जाता है. वह सही और गलत का फैसला नहीं कर पाता है. और शराब ही कई अपराधों का कारण बनती है. शराब के नशे के कारण घरेलू हिंसा, बलात्कार, मारपीट और आत्महत्या जैसे मामले बहुत ज्यादा बढ़ जा रहे है, जो लोग सक्षम नहीं है उनकी इस आदत की वजह से परिवार को बहुत ज्यादा आर्थिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है. उसके पत्नी, बच्चो और परिवार के अन्य सदस्यों की बहुत सी आवश्यकतायें भी पूरी नहीं हो पाती है. इसलिए शराब के कारण आम लोगों को जीवन नर्क जैसा हो जाता है.

शराब छुड़ाने के उपाय बहुत ही आसान है इन उपयों को यदि आप करते है तो आप निश्चित शराब को छोड़ सकते है. और इन उपायों को करके आप स्वस्थ भी रह सकते है. सबसे पहला और आसान उपाय की सेब का रस बार बार पीने से और भोजन के साथ सेब खाने से भी आपकी शराब पीने की आदत पूरी तरह से कम हो जाती है और यदि उबले हुए सेबों को शराब को प्रतिदिन दो से तीन बार खिलाया जाएँ तो आप खुद पाएंगे की कुछ ही दिनों में शराबी की शराब पीने की आदत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.

गाजर के जूस भी शराब छुड़ाने के लिए बहुत ही उपयोगी है और यदि कोई शराबी रोज़ाना गाजर का जूस पीटा है तो उसकी शराब पीने की इच्छा कम होने लगती है और यदि दिन में एक गिलास गाजर का जूस पीता है तो उस शराबी की शराब को छोड़ने में बहुत मदद होती है. और इससे आपकी आँखों को भी फायदा होता है. और पाचन तंत्र भी ठीक रहता है जिससे आप खाने को ठीक तरह से पचा पाते है. इसलिए यदि आप शराब के आधी है तो आप रोज़ाना गाजर का जूस पीएं और स्वस्थ रहें.और सबसे शराब छुड़ाने के उपाय में सबसे बेहतर उपाय 500 ग्राम नई देसी अजवाइन को पीसकर उसे 7 लीटर पानी में दो दिन के लिए भिगोकर रख दें और उसे अजवाइन को धीमी आंच पर इतना पकाएं कि पानी लगभग 2 लीटर से भी कम रह जाएँ और जब ये पानी ठंडा हो जाएँ तो उस पानी अच्छे से छान कर बोतल में भर ले और जब भी शराब पीने की तलब लगें तो इस बोतल से पानी को 5 चम्मच की मात्रा में बार बार पीएं जब तक आपकी तलब खत्म न हो जाएँ.

किशमिश के कई सारे फायदे ये आपके रोगों को ठीक करने में भी मदद करता है अगर कोई व्यक्ति शराब छोड़ना चाहता है तो उस व्यक्ति को जब भी शराब पीने की ेतलब लगती है तो वो किशमिश का 1 -2 दाना मुंह में डालकर किशमिश को चूसें इसके अलावा वो उस किशमिश का जूस या सरबत बना कर भी पी सकता है उसकी शराब पीने की लत खत्म हो जाएगी. खजूर बहुत भी शराब छुड़ाने में अधिक मदद करता है इसके लिए पानी में कुछ खजूर घिसें फिर दिन में दो – तीन बार इस मिश्रण का सेवन करें. इससे जल्दी ही शराब की आदत छूट जाती है. शराब छुड़ाने के उपाय जानकार आपको फायदा ही मिलेगा.

तंबाकू, गुटका,बीड़ी, सिगरेट आदि का नशा करने वालो के शरीर में फास्फोरस तत्व की कमी हो जाती है उसके लिए PHOSPHORUS 200 का ऐसे ही प्रयोग करे और इसके प्रयोग से तंबाकू, गुटका,बीड़ी, सिगरेट के अलावा शराब का नशा करने की आदत भी पूरी तरह से खत्म हो जाती है. सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले और इसे उस शराब के साथ दो तीन बूँद की मात्रा में मिला दें फिर आप खुद ही देख लेंगे की शराबी की शराब पीने की आदत किस तरह खत्म हो जाती है.

और शराब छुड़ाने के कुछ टोटके के भी जो शराब छुड़ाने में आपकी बहुत ही ज्यादा मदद करते है.यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पीता है तो उसकी पत्नी मंगल या शनिवार को चरखा चलाए. जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करता है तो उसकी पत्नी अपने पैरों के बिच्छुए को पानी से धोकर तथा शराब की बोतल में से थोड़ी सी शराब लेकर उसमें अपने बिच्छुए डाल दे. त्रयोदशी या पूर्णमाशी के दिन वह शराब निकाल कर दूसरी किसी शराब की बोतल में डाल दें. ऐसा पांच मंगलवार या शनिवार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है. जो जातक शराब का सेवन अधिक करता है तो उसके लिए सात पताशे लेकर प्रत्येक पताशे में सरसों के तेल की दो-चार बूंदे डालकर फिर बताशे को हाथ से मसलकर घर से बाहर कहीं दूर जाकर फेंक दें. ऐसा 11 दिन लगातार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है.

नमक के फायदे और नुकसान

नमक के फायदे और नुकसान: नमक जिसे सोडियम भी कहते है शरीर के लिए छोटी मात्रा में जरूरी है लेकिन अधिक सेवन करने पर गंभीर, दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. उच्च स्तर के नमक की खपत में कई नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं, जैसे रक्तचाप और हृदय संबंधी जटिलताओं फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम मात्रा में नमक जो स्वास्थ्य की सिफारिशों को पूरा करता हैं. कुछ स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसे कि शरीर को ठीक से कार्य करना. रोज़ाना उपभोग करने वाले खाने में नमक की मात्रा भिन्न होती है.

नमक केवल खाने के स्वाद को बढ़ाने में नहीं बल्कि कई कामो में नमक का इस्तेमाल किया जाता है नमक खाने में उपयोग में आने वाली सबसे पुरानी चीज है. इसे दुनिया भर में काम लिया जाता है। दुनिया भर में लगभग 200 मिलियन टन का उत्पादन होता है जिसमे से खाने के लिए सिर्फ 6 % नमक काम आता है. खाने के अलावा नमक का उपयोग जहाँ ज्यादा बर्फ गिरती है वहाँ हाईवे से बर्फ हटाने में होता है. इसके अलावा वाटर कंडीशनिंग आदि में भी नमक का बहुत उपयोग होता है. नमक के फायदे और नुकसान के बारे में कई डॉक्टर्स ने अपने मत दिए.

नमक को कई तरह से बनाया जाता है जिसे खाने के नमक समुद्र के पानी से बनाया जाता है.और सेंधा नमक चट्टानों के बीच से प्राप्त होता है और इसे व्रत के समय खाया जाता है. सेंधा नमक में बहुत ज्यादा मात्रा में पोषक तत्वों की होती है.
टेबल नमक 40 प्रतिशत सोडियम है, और इसका सबसे सामान्य आहार स्रोत है. टेबल के नमक के एक चम्मच में 2,300 मिलीग्राम सोडियम है, जो कि प्रति दिन स्वस्थ वयस्क प्रतिदिन सोडियम के अधिकतम सेवन की सिफारिश है. सरकारी पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को रोज़ाना 1,500 मिलीग्राम तक अपने सोडियम सेवन तक सीमित होना चाहिए.

ध्यान रखें कि कई खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से संसाधित और तैयार किए गए खाद्य पदार्थ, में सोडियम का उच्च स्तर होता है। कंजस्टिव दिल विफलता वाले लोग, यकृत और गुर्दा की बीमारी के सिरोसिस को सोडियम की काफी कम मात्रा की आवश्यकता हो सकती है. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को और कोलंबिया विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर द्वारा 2010 में जारी एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार, अफ्रीकी-अमेरिकियों के लिए नमक के प्रभाव अधिक स्पष्ट हैं। यह जातीय समूह नमक के उच्च रक्तचाप के प्रभावों के प्रति संवेदनशील होने की अधिक संभावना है, क्योंकि अफ्रीकी-अमेरिकियों ने सोडियम अधिक आसानी से बनाए रखा है और आमतौर पर उच्च रक्तचाप को विकसित करने की अधिक संभावना है. नमक के फायदे और नुकसान जानने के लिए आप घर पर कुछ उपाय कर सकते है.

डॉक्टर्स मुताबिक 51 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को सोडियम के खराब प्रभाव से भी ज्यादा प्रवण होता है, क्योंकि रक्त वाहिकाओं को उम्र के साथ कठोर हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप के स्तर में हो सकता है. 2011 में “अमेरिकन जर्नल ऑफ हाईपरटेन्शन” में प्रकाशित एक अध्ययन में सामान्य रक्तचाप वाले काकेशियनों के आहार में सोडियम में तेज कमी देखी गई – उदाहरण के लिए, सप्ताह के एक मामले में उच्च-से-कम सोडियम आहार से संक्रमण हो सकता है – कोलेस्ट्रॉल में बढ़ोतरी का कारण बनता है, संभावित रूप से कुछ हृदय स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाना हालांकि, लॉरेंस ऐपेल, एमडी, जो जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर हैं, का कहना है कि परिणाम बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं क्योंकि उन्हें गंभीरता से माना जाता है.

सेंधा नमक शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. साधारण नमक हमारे आम जीवन में खाने में उपयोग नमक को कही तरह से उपयोग किया जाता है. साधारण लोहे के तवे पर थोड़ा सा नमक बुरकने के बाद चिल्ला बनाएंगे तो आपका नमक तवे पर चिपकेगा नहीं .मतलब इस तरह से नमक के उपयोग से आप अपने साधारण से तवे को नॉन-स्टिक बर्तन में बदल सकते है और बर्तन से या लहसुन की या प्याज की गंध आती है तो उस बर्तन को नमक के घोल वाले पानी से धोने से उसकी गंध दूर हो जाती है. पिसे हुए मसाले , मिर्च , हल्दी , धनिया आदि में नमक मिलाकर रखने इन में कीड़े या जाले नहीं पड़ेंगे और मसाले ख़राब नहीं होंगे. और भी कई फायदे है नमक के जैसे की एक किलो मसाले में 50 ग्राम नमक के अनुपात से मिला सकते है. डस्टबिन में से आने वाली गंध मिटाने के लिए उसमे थोड़ा नमक डाल दें.और यदि घर में नाली या सीवर में कॉक्रोच, कीड़े, मच्छर आदि है तो उन्हें मारने के लिए या उनके रोकथाम के लिए पानी में नमक घोल कर यदि में नाली या सीवर में डालती है तो कीड़े नहीं पनपते है और बदबू भी नहीं आती है.

यदि आपके बिस्किट बहुत जाती नरम हो जाते है उनका कुरकुरापन जल्दी खत्म हो जाता है तो इनको नमक के साथ रखेंगे तो ये सही रहेंगे.पानी में नमक डालकर सफाई करते है तो बेक्टरीआ नहीं बनते है और घर में सफाई भी रहती है. मोमबत्ती पर यदि नमक का लेप लगाया जाएँ तो वह बहुत देर तक जलती रहती है.यदि आपके दातों में दर्द होता है या फिर मसूड़ों में खून आता है तो नमक का सेवन कर सकते है. और भी गई रोग जैसे गले में टॉन्सिल हो, गले में खराश हो, दर्द हो, आवाज दब गई हो तो एक गिलास गुनगुने पानी में नमक मिलाकर पीने से ये बीमारियां तो दूर होती है साथ ही हिचकी आना भी बंद हो जाती है.

हमारा शरीर नमक की निर्धारित मात्रा को पचा पाता है अगर शरीर की शक्ति से अधिक या कम नमक का प्रयोग किया जाता है तो इससे कई घातक बीमारियां हो सकती है इसीलिए अपने भोजन में नमक की मात्रा का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है.क्योंकि ज्यादा नमक खाने वाले लोगों को गुर्दे की पथरी और हड्डियों के कमजोर होना, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है. सोडियम और कैल्शियम के बीच एक महत्वपूर्ण सम्बंध का पता लगाया है. जब सोडियम की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो शरीर मूत्र के जरिए इसे बाहर निकाल देता है लेकिन सोडियम के साथ-साथ कैल्शियम भी शरीर से बाहर निकल जाता है.और कैल्सियम हड्डियों के काफी जरूरी होता है. और भी कई नुकसान है नमक ज्यादा खाने के लेकिन जितने फायदे है उस कम नुक्सान है. आपको ये हमारी नमक के फायदे और नुकसान वाली पोस्ट किसी लगी हमें बताएं और अपने फेसबुक प्रोफाइल से इसको दुसरे लोगों तक ज़रूर शेयर करें.

मोज़े पहनकर सोने के फायदे यहाँ पढ़ें

मोज़े पहनकर सोने के फायदे:-अगर आप जूतों के साथ मोज़े पहनते हैं तो ये बहुत अच्छा है क्योंकि मोज़े पहनने से आपके पैर गंदगी से बचते हैं और साथ ही पसीने से भी. लेकिन क्या आपको पता है मोज़े आपके पैरों को सिर्फ गन्दगी से ही नहीं बचते वल्कि इनके और भी फायदे होते हैं और इन फायदों को लेने के लिए आपको अपने पैरों में मोज़े पहनकर सोना होगा तो चलिए आज हम आपको बता रहे हैं की कैसे आपको मोज़े पहनकर सोने से फायदा होता है और क्यों.

मोज़े पहनकर सोने के फायदे हैं बहुत यहाँ पढ़ें

दोस्तों सुनने में थोड़ा आश्चर्य तो हो रहा होगा मोज़े पहनकर सोने के फायदे कैसे होते हैं. लेकिन ये भी सच है के अगर आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो बहुत अच्छा है लेकिन इस तरह के लोग आपको लाखों में एक ही मिलेंगे कुल मिलकर लाख लोग में से एकाध ही मोज़े पहनकर सोता है. अगर आप भी मोज़े पहनकर सोते हैं तो इसका सीधा मतलब है आप अपने पैरों की बहुत देखरेख करते हैं और अगर आप पहनकर नहीं सोते तो हमारी यह पोस्ट पढ़ने के बाद आप भी मोज़े पहनकर सोने को मजबूर हो जायेंगे.

मोज़े पहनकर सोने के पैर नहीं फटते

दोस्तों मोज़े पहनकर सोने का एक ये भी बढ़ा फायद है अगर आपके पैर ज़्यादा फटते है तो आप कुछ दिन तक मोज़े पहनकर सोना शुरू कर दीजिये कुछ ही दिन में आपके पैर एकदम गोरे और सुन्दर दिखने लगेंगे ये वाकई में बहुत कमाल की चीज़ है. इसके अलावा आपने एक चीज़ और देखी होगी अगर नहीं देखी तो कल सुबह चेक ज़रूर करना जब आप सुबह उठते हैं तो आपके पैर बहुत ही ज़्यादा खुश्क (Dry) दिखते हैं और अगर आप मोज़े पहनकर सोएंगे तो आपके पैर भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

आपके पैर हमेशा गरम बने रहते हैं

आपने अक्सर देखा होगा खासतौर से ठण्ड के मौसम में आपके पैर कुछ ज़्यादा ही ठन्डे हो जाते हैं आपके शरीर के तापमान की अपेक्षा जब आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो आपके पैर हमेशा गरम बने रहते हैं और कुछ लोगों को तो ये समस्या सभी मौसम में होती है ऐसे में आप मोज़े पहनकर सोएंगे तो इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है.

पसीना बहुत कम आता है

दोस्तों अक्सर देखा है कुछ लोगों के पैरों में कुछ ज़्यादा ही पसीना आता है। इस तरह से पसीना आने की समस्या को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। अगर आपके पैरों में से भी अत्यधिक पसीना आने की समस्या है तो आप को भी मोजा पहनकर सोना फायदेमंद साबित हो सकता है.

इन्फेक्शन से आपको बचाता है

जब आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो आपका पैर गंदगी और बैक्टीरिया से पूरी तरह से फ्री रहता है। साथ ही इससे आपके पैर किसी भी तरह से संक्रमण से संक्रमित होने से बच जाते हैं और आप अधिक सुरक्षित रहते हैं।

पैर में दर्द की समस्याएं होती हैं दूर

हमारे पैर शरीर का वह हिस्सा है जिस पर हमारे शरीर का पूरा वजन रहता है और इसके कारण हमारे पैरों में कई बार दर्द हो जाता है ऐसे में आपके पैरों की इन समस्याओं से मोजे पहनकर सोना आपको इस समस्या  से हैं. और वैसे भी आप कूद आज रातमोज़े पहनकर एक बार सोकर देखना आपको कुछ अलग सा ही महसूस होता है। दोस्तों अगर पोस्ट अच्छा लगे तो शेयर ज़रूर करें और हमारे फेसबुक पेज को लाईक अवश्य करें आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

रविवार, 4 जुलाई 2021

भुट्टे के साथ लीजिए बारिश का मजा और पाएं 15 सेहत लाभ

बरसात का मौसम हो और भुट्टा न खाया जाए, ऐसा शायद ही आपके साथ होता हो। उपलों पर सिके हुए देशी भुट्टे हों या फिर स्टीम में पके अमेरिकन कॉर्न...दोनों का अपना ही मजा है। स्वाद तो इनका मजेदार होता ही है, सेहत के फायदे भी - 

1 सबसे पहली बात तो यह है कि बड़ों को साथ-साथ बच्चों को भी भुट्टे अवश्य खिलाने चाहिए इससे उनके दांत मजबूत होते हैं।

दूसरी बात कि जब आप भुट्टे खाएं तो दानों को खाने के बाद जो भुट्टे का भाग बचता है उसे फेंकें नहीं बल्कि उसे बीच से तोड़ लें और उसे सूंघें। इससे जुकाम में बड़ा फायदा मिलता है। बाद में इसे जानवर को खाने के लिए डाल सकते हैं। 

अगर आप इसे जानवर को नहीं देते हैं तो उन्हें सूखाकर रखें फिर इन्हें जलाकर राख बना कर रख लें। सांस के रोगों में यह बड़ा कारगर इलाज है। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कुकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।

आयुर्वेद के अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक, मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है। इसकी खासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और बढ़ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है।

 भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। यह बढती उम्र को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है।

 इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है।

बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। ताजे दूधिया (जो कि पूरी तरह से पका न हो) मक्का के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर उसे धूप में रखिए। जब उसका दूध सूख कर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए तो उसे छान लीजिए। इस तेल को बच्चों के पैरों में मालिश कीजिए। इससे बच्चों का पैर ज्यादा मजबूत होगा और बच्चा जल्दी चलने लगेगा।

इस तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली होता है। हर रोज एक चम्मच तेल को चीनी के बने शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है। ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को या जिन्हें टीबी होने की आशंका हो हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा।

10 मक्के के बाल (सिल्क) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है।

11 यदि गेहूं के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिए अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इसलिए इसे खाने से पेट अच्छा रहता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना दूर होती है।

12 भुट्टे के पीले दानों में बहुत सारा मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और फॉस्फोरस पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। एनीमिया को दूर करने के लिए भुट्टा खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी और फोलिक एसिड होता है।

13 खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। इसके स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है।

14 भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है।

15  इसका सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभदायक होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में जरुर शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो गर्भवती के लिए बेहद जरूरी है।