सोमवार, 5 जुलाई 2021

रातभर आपका बच्‍चा खांसता रहता है? इन देसी नुस्‍खों से दूर करें उसकी खिचकिच

थोड़ी सी ठंड होने पर या बारिश में भीगने से बच्‍चों को खांसी और जुकाम हो जाती है। वहीं न्‍यू बोर्न बेबी को पूरे साल में न जाने कितनी बार खांसी और जुकाम हो जाता है। दूषित हवा या संक्रमण की वजह से भी बच्‍चों को बारिश हो जाती है। बच्‍चों को खांसी आने पर आप सबसे पहले क्‍या करते हैं?

किसी डॉक्‍टर को दिखाते या केमिस्‍ट से पूछकर दवाईयां ले लेते है। हालांकि कई स्‍टडीज में ये बात भी सामने आई है कि कई बार ओवर द काउंटर दवाईयां देने से बच्‍चों को कई समस्‍याएं हुई हैं। इसके अलावा बच्‍चें भी इन कड़वी दवाईयां पीने में आनाकानी करते है। इसलिए हम यहां आपको कुछ ऐसे देसी नुस्‍खें बता रहे है जिनसे आप बच्‍चों को खांसी जुकाम से निजात दिला सकते हैं।

शहद

एक साल या उससे छोटी उम्र का बच्चा अगर सर्दी जुकाम से पीड़ित है तो शहद उसका सुरक्षित उपचार है। एक चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच कच्चा शहद मिला लें। 2-3 घंटे बाद बच्चे को थोड़ा थोड़ा पिलाएं। एक गिलास गर्म-दूध, शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी एवं सीने के दर्द में राहत मिलती है। बच्चों की खांसी से राहत के लिए शहद के उपयोग के कोई दुष्प्रभाव या साइड-इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं।

अदरक

6 कप पानी में आधा कप बारीक कटे हुए अदरक की फांके और दालचीनी के 2 छोटे टुकड़ों को 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। बाद में इसे छान लें और शहद के साथ मिलाकर दिन में 3 से 4 बार बच्चे को पिलाएं। 1 साल से कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में गर्म-पानी मिलाकर पिलाएं। वरना अदरक के टुकड़े को हल्‍का सा तवें में सेंककर शहद के साथ मिलाकर चटा दे। इससे भी काफी फर्क पड़ता हैं।

नींबू

एक कढ़ाई में 4 नींबू का रस उसके छिलके और एक चम्मच अदरक की फांके लें। इसमें पानी डालें ताकि सारा सामान पानी इसमें डूब जाए। इस मिश्रण को 10 मिनट तक काढ़े। फिर बाद में पानी को अलग कर लें। अब इस तरल पेय में उतनी ही मात्र में गर्म-पानी तथा स्वाद के लिए शहद मिलाएं। बच्चों को दिन में 3-4 बार पीने को दें। ध्यान दें कि एक-वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए चीनी के स्थान पर शहद मिलाएं।

चिकन का सूपः

एक वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गर्म चिकन का सूप भी एक अच्छा विकल्प है। यह हल्का एवं पोषक होता है, तथा छाती जमने और नाक बंद होने से छुटकारा दिलाता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट ठीक होने की प्रक्रिया को अधिक तेज कर देते हैं। आप दिन में दो से तीन बार यह बच्चों को सूप दे सकते हैं।

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