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शनिवार, 3 जुलाई 2021

स्त्रियां भी होती है स्‍वप्‍नदोष की शिकार

पुरुष खासकर युवा अक्‍सर स्‍वप्‍नदोष का शिकार हो जाते हैं। स्‍वप्‍नदोष वह अवस्‍था है, जिसमें सोते-सोते अचानक पुरुष के लिंग से वीर्य निकल आता है। उनके कपड़े गीले हो जाते हैं। बिस्‍तर तक पर सफेद धब्‍बे पड जाते हैं और सुबह उठने पर किशोर इसकी वजह से शर्मिंदगी महसूस करते हैं। शायद यही वजह है कि भारतीय समाज ने इसे स्‍वप्‍नदोष नाम दिया जबकि पश्चिम में इसे किसी तरह का दोष नहीं माना जाता, बल्कि वहां तो इसे वेट ड्रीम (wet dreams) कहा जाता है जो ज्‍यादा उचित शब्‍द है।

पुरुषों में स्‍वप्‍नदोष (boys wet dreams)

मनोचिकित्‍सकों के अनुसार, नींद में यौन संबंध, हस्‍तमैथुन या इसी तरह की किसी यौन उत्‍तेजना के उत्‍पन्‍न ख्‍याल से लिंग से वीर्य स्राव हो जाता है। किशोरावस्‍था में यह बहुत सामान्‍य बात है। इसे लेकर किसी भी तरह की ग्रंथि नहीं पालनी चाहिए। सभी इससे गुजरते हैं, लेकिन यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि लडकियां भी स्‍वप्‍नदोष की शिकार होती हैं। यह अलग बात है कि उनका जननांग भीतर की ओर होने की वजह से उन्‍हें अक्‍सर इसका पता नहीं चल पाता है।

रात में चार से पांच बार पुरुष का लिंग होता है उत्‍तेजित

पुरुषों में रात भर में करीब 4 से 5 बार लिंग उत्तेजित होता है। सुबह के समय इसकी उत्‍तेजना बढ जाती है। स्‍वप्‍नदोष भी अक्‍सर सुबह के तीन से पांच के बीच ही अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिंग के उत्‍तेजना से नियमित रक्‍त संचालन होता रहता है, जो लिंग की मांसपेशियों व ऊतकों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से अच्‍छा है। यह एक तरह से लिंग की कसरत है। जब उत्‍तेजित लिंग वीर्य के भार को थामने में नाकाम नाकाम रहता है तो वीर्यपात हो जाता है, जो बहुत स्‍वभाविक है।

लड़कियों का स्‍वप्‍नदोष (girls wet dream)

गाइनकोलॉजिस्‍टों व मनोचिकित्‍सकों के अनुसार स्त्रियां भी तीव्र यौन अहसास से गुजरती हैं। किशोरावस्‍था, युवावस्‍था या फिर पति से बहुत अधिक दिनों तक दूर रहने पर कई बार महिलाओं में तीव्र यौन इच्‍छा जगती है और वह सोते से उठ जाती हैं। पुरुषों के समान उनमें वीर्यपात जैसा तो कुछ नहीं होता, लेकिन उत्‍तेजनावश उनकी योनि अंदर से गीली और चिकनी हो जाती है।

महिलाएं स्‍वप्‍नदोष को समझ नहीं पातीं

चूंकि महिलाओं का जननांग अंदर की ओर विकसित होता है, इसलिए वह स्‍वप्‍नदोष को ठीक से समझ ही नहीं पाती हैं। महिलाओं को सोते वक्‍त कई बार जननांग या उसके आसपास दबाव पडने, घर्षण आदि के कारण कामोत्‍तेजना का अहसास होता है। ऐसा अक्‍सर टाइट पैंटी पहनने, जांघों के बीच हाथ दबाकर सोते वक्‍त हाथ से उत्‍पन्‍न घर्षण आदि अकेली स्‍त्री में अचानक से सोई हुई उत्‍तेजना को जगा देता है, जिससे उक्‍सर उनकी नींद खुल जाती है। 

महिलाएं कर सकती हैं इसका अहसास

वैसे महिलाएं चाहें तो अपने स्‍वप्‍नदोष का अहसास कर सकती हैं। रात में अचानक एक तीव्र व सुखद अहसास के साथ नींद के खुलते ही अपनी ऊंगली योनि के अंदर ले जाने पर उन्‍हें चिपचिपापन और गीलेपन का अहसास होगा। किशोरियों को ऐसे समय किसी अनजान साथी का, युवा लड़की को अपने ब्‍वॉयफ्रेंड का और पति से दूर रही रही पत्‍नी को अपने पति की दूरी का तीव्रता से अहसास होता है। स्त्रियां कल्‍पना में भी यदि संभोग करती हैं तो वह किसी अजनबी की जगह अपने साथी का ख्‍याल ही मन में लाती हैं।

कामोत्‍तेजना सेहत के लिए उचित

महिलाओं में भी कामोत्‍तेजना बढ़ने से जननांग में रक्‍तसंचार होता है, जो यौन व प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से बहुत उपयुक्‍त है। इससे योनि का लचीलापन बना रहता है, जो आगे चलकर पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने में तो सहज करता ही है,  प्रसव के समय बच्‍चे के बाहर आने में भी आसानी होती है।

स्‍वप्‍नदोष में कहीं से कोई 'दोष' नहीं है 

परंपरागत भारतीय समाज में वीर्य की रक्षा करने पर मुख्‍य जोर रहा है, शायद इसी वजह से स्‍वप्‍न की वजह से होने वाले वीर्य स्‍खलन को स्‍वप्‍नदोष कह दिया गया है। लेकिन आधुनिक मनोविज्ञानी इसे किसी भी तरह से दोष नहीं मानते हैं। सोते में कामुक कल्‍पनाओं का उभरता और उसके प्रभाव से वीर्यस्राव कहीं से बुरा नहीं है। वीर्य की मात्रा जब शरीर में बढ जाती है तो वह बाहर निकलने का रास्‍ता तलाशती है। इसे ऐसे समझिए कि जब पानी का टंकी भर जाता है तो ओवरफ्लो हो जाता है। यह बहुत कुछ वैसा ही है।

सुझाव

अत्‍यधिक कामुक कल्‍पनाएं करना, पोर्नोग्राफी पर ज्‍यादा समय व्‍यतीत करना, शराब, सिगरेट, अधिक तला, मसालेदार और खटटा खाने जैसे कुछ ऐसे कारण हैं तो इसकी बारंबारता को बढा देते हैं। मसालेदार भोजन यौन उत्‍तेजना बढाने में सहायक हैं। भारतीय समाज ने शायद किशोरवय में अधिक कामोत्‍तेजना, शराब, सिगरेट का सेवन और मसालेदार भोजन आदि से दूर रहने के लिए ही इसे दोष का नाम दिया। पोर्नोग्राफी, शराब, सिगरेट और मसालेदार भोजन से बचना तो वैसे भी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उत्‍तम है, क्‍योंकि ये सभी एडिक्‍शन का खतरा पैदा करते हैं।