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शनिवार, 3 जुलाई 2021

असुरक्षित यौन संबंधों से बचें

असुरक्षित यौन संबंधों के चलते कई बीमारियां फैल रही हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है जानकारी का अभाव। अधिकतर लोग सावधानियों के प्रति जागरुक नहीं होते। और इसी वजह से कई तरह की परेशानियों में घिर जाते हैं।

असुरक्षित यौन संबंधों को लेकर लोगों में कई प्रकार की दुविधा होती है। सही स्रोतों से जानकारी के अभावों में युवा अक्‍सर इसे लेकर अनिश्‍चितता में रहते हैं। वह यही सोचते हैं कि यौन संबंधों का मतलब है सेक्स के दौरान सावधानियां बरतना। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है यौन संचारित रोगों को जानना, संक्रमण की संभावनाओं इत्यादि के बारे में जागरूक होना। आइए जानें असुरक्षित यौन संबंध आखिर है क्या।

असुरक्षित यौन संबंध
  • असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है, सेक्स के दौरान सावधानियां न बरतना। इन सावधानियों में जरूरी है कि सेक्स जोर-जबरदस्ती से न किया जाए।
  • माहवारी के दौरान सेक्स करने से संक्रमण की संभावना बढ जाती है।
  • एक से ज्यादा साथी फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष के साथ संबंध बनाने से संक्रमण हो सकता है।
  • असुरक्षित यौन संबंधों के दौरान यौन संचारित रोगों के होने का खतरा बना रहता है।
  • बहुत अधिक कंट्रासेप्टिक पिल्स का सेवन, पहली बार सेक्स के दौरान कंडोम का सेवन न करना असुरक्षित यौन संबंधों के अंतगर्त आता है।
  • प्रोफेशनल सेक्स वर्कर से संपर्क बनाने से भी संक्रमण की संभावना रहती है।
  • सामूहिक रूप से सेक्स‍ करना यानी एक ग्रुप में आपस में एक-दूसरे के साथ सेक्स करना भी असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत शामिल है।
  • वाइफ स्‍वैपिंग यानी एक दूसरे के पार्टनर को एक रात के लिए बदलने से भी असुरक्षित यौन संबंधों का खतरा रहता है।
  • पुरूष या महिला में से किसी को यौन संबंधी इंफेक्शेन होने से भी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • ओरल सेक्स से भी इंफेक्शन होने का खतरा लगातार बरकरार रहता है। इसीलिए ओरल सेक्स में साफ-सफाई का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।

सेक्स के दौरान, सेक्स से पहले खासतौर पर सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। असुरक्षित यौन संबंध के कारण होने वाली बीमारियों की सूची लंबी है, लेकिन थोड़े संयम और सावधानी अपनाकर इनसे बचा जा सकता है।

उपाय और अधिक जानकारी के लिए 9648222323 मोबाइल नंबर पर व्हाटसअप करें।

विवाहपूर्व सेक्स संबंध

बदलते दौर में अब न सिर्फ समाज में खुलापन आया है बल्कि लोगों की मानसिकता में भी परिवर्तन आया है। अब भारतीय युवाओं को नैतिक या सामाजिक बंधन से बांधना आसान नहीं क्योंकि वे अपने अच्छे-बुरे की समझ रखते हैं। विवाह पूर्व सेक्स  संबंध बनाना हो या फिर लिव इन रिलेशनशिप में रहना, युवाओं को इस पर अधिक सोच-विचार की आवश्यवकता नहीं। एक समय था जब विवाह पूर्व सेक्स करने के बारे में सोचना भी गलत माना जाता था, लेकिन आज तमाम सर्वे पर नजर डालें तो आजकल न सिर्फ युवा बल्कि किशोर-किशोरियों को भी कम उम्र में सेक्स करने से कोई परहेज़ नहीं है। आइए जानें विवाहपूर्व सेक्स संबंधों में।

  • हालांकि विवाहपूर्व सेक्स संबंधों को अब भी अनुचित माना जाता है,लेकिन युवा वर्ग की सोच इससे एकदम विपरीत हैं । वे विवाह पूर्व सेक्स को उचित-अनुचित श्रेणी में नहीं देखते।
  • आज का युवावर्ग, लिव इन रिलेशनशिप और विवाह पूर्व सेक्स को सही ठहरा रहे हैं, वे असल में स्वच्छंदता और स्वतंत्रता के साथ जीना चाहते हैं। वे हर उस आचरण को बंदिश मानते हैं, जिसमें किसी अनुशासन, संयम या बंधन का प्रावधान हो।
  • आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि विवाहपूर्व सेक्स संबंध शारीरिक और भावनात्मक स्तर पर सुरक्षित नहीं होते । यदि कम उम्र में ऐसे संबंध स्थापित किये जाते हैं तो इससे शारीरिक विकास पर असर पड़ता है। इसके साथ ही सामाजिक संबंधों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।
  • विवाह पूर्व सेक्स करने से कई यौन संबंधी बीमारियाँ जैसे एचआईवी एड्स या किसी प्रकार का संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • विवाहपूर्व सेक्स संबंधों में सावधानी न बरती जाएं तो गर्भ ठहरने का खतरा भी बराबर बना रहता है, इससे मानसिक तनाव भी हो सकता है।
  • भारतीय युवाओं को आज के समय में लिव इन रिलेशन में रहने में कोई परेशानी नहीं, ऐसे में उनमें शारीरिक संबंध बनाना भी आम बात हो गई है, लेकिन
  • कई बार जब इन संबंधों में दरार पड़ जाती ती है, तो दोनों पक्षों को ही गहरा मानसिक आघात पहुंचता है।ऐसे में सामाजिक और नैतिक बंधनों के चलते
  • विवाह पूर्व सेक्स संबंध बनाने की शर्म, ग्लानि, अविश्वास, तनाव तथा एक-दूसरे के प्रति सम्मान की कमी जैसे कारक मुख्य भूमिका निभाते हैं।
  • कई बार डेटिंग के चलते भी विवाहपूर्व संबंध बन जाते हैं, जिनमें जहां डेटिंग का मकसद विवाहपूर्व एक-दूसरे को भली-भाँति जानना-समझना होता है वहीं वे उसके मकसद को भूल सेक्स संबंध बना लेते हैं।

भारतीय युवाओं में विवाह पूर्व सेक्स  संबंध बनाना, नैतिक या सामाजिक बंधनों को तोड़ना, लिव इन रिलेशनशिप में रहना आदि आम बात है। लेकिन फिर भी विवाह पूर्व सेक्स युवाओं के लिए कोई बहुत अच्छा उपाय नहीं माना जाता।

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ब्लडप्रेशर असामान्य हो, तो ना करें सेक्स

सेक्स करना हेल्थ के लिए तो अच्छा ही है इसके अलावा सेक्स पति-पत्नी के रिश्तों को गहरा करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेक्स के समय स्ट्रेसफुल रहने से आपको फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है। सिर्फ तनाव ही नहीं बल्कि ब्ल्डप्रेशर असामान्‍य हो तो ना करें सेक्स अन्यथा आपको कई समस्याएं हो सकती हैं। हाई बीपी में सेक्स करने के बजाय हाईबीपी में नमक का उपयोग कर उसे कम करना चाहिए। ताकि आपका ब्ल्डप्रेशर सामान्य हो सकें। आइए जानें क्यों ना करें असामान्य ब्लडप्रेशर के दौरान सेक्स।

  • आमतौर पर सेक्स के दौरान हृदयगति और रक्तचाप बढ़ जाता है, ऐसे में यदि आपका ब्ल्डप्रेशर पहले से ही बढ़ा होगा तो आपके लिए ये खतरा बन सकता हैं।
  • उच्च‍ रक्तचाप के दौरान सेक्स करने से एंजाइना,हार्ट अटैक व पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • ये तो सभी जानते हैं कि रक्तचाप कभी भी सामान्य नहीं रहता। तनाव के समय में आपका रक्तचाप ऊपर-नीचे होता रहता हैं। जब आप आराम की स्थिति में होते हैं तो आपका रक्तचाप सामान्य रहता है। ऐसे में आपको समय-समय पर अपना ब्लडप्रेशर चेक कराते रहना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप के दौरान आपकी हर काम में ऊर्जा ज्यादा लगती है। जिसका सीधा असर आपके हृदय पर पड़ता है और हृदय का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
  • हार्ट फेल्योर होना, एंजाइना की समस्या, हार्टअटैक इत्यादि की आशंका भी इसी कारण से बढ़ जाती है, ऐसे में आप संभोग करेंगे तो आपको जान का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • कई लोगों को उच्च रक्तचाप होने से कई यौन समस्याएं भी हो सकती हैं, ऐसे में आपको सेक्स करने से बचना चाहिए और रक्तचाप को सामान्य करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप से पीडि़त लोगों को पति-पत्नी के अतिरिक्त अन्य से सेक्स रिलेशन नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करने पर उत्तेजना और तनाव से रक्त चाप बहुत बढ़ सकता है और आप कई भयंकर बीमारियों की चपेट में आ सकते हों।
  • यह तो आप जानते ही हैं कि सेक्स के दौरान बहुत कैलोरी बर्न होती है जिससे शरीर में कैलोरी की जरूरत बढ़ जाती है। कैलोरी की जरूरत को पूरा करने के दौरान आपकी अधिक एनर्जी लगती है ओर आपकी हृदयगति 150 से 180 तक भी आराम से पहुंच जाती है। हालांकि सेक्स के बाद आपकी हृदयगति वापिस सामान्य हो जाती है।
  • उच्च रक्तचाप से न सिर्फ आप मानसिक तनाव से ग्रस्त होते हैं बल्कि आप सेक्स में अरूचि और घबराहट जैसी समस्याओं से भी घिर जाते हैं जिस कारण क्रोध में आपके आपसी रिश्ते खराब होने का डर रहता है।
  • उच्च रक्तचाप की दवाईयां लेने वाले मरीजों की भी सेक्स क्षमता कम होने लगती है और ऐसे में उच्च रक्तचाप के दौरान वे सेक्स करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगने का डर भी रहता है।
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बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसार्डर और सेक्स

बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर एक दिमागी बीमारी है, जिसमें दिमाग काम करना बंद कर देता है और व्यक्ति अपनी शख्सियत भूल जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त आदमी की दिमागी स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह अपने व्यक्तिगत संबंधों को अपने आवेश से जोडने लगता है। अचानक गुस्सा आना, बिना किसी कारण के चिडचिडा होना, आपा खो देना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।  इस बीमारी से ग्रस्त लोग सेक्स को लेकर बहुत ही उहापोह की स्थिति में रहते हैं। कहीं किसी से कोई गहरा रिश्ता न बन जाए या कोई रिश्ता कच्चा‍ न हो। इस स्थिति में अक्सर ऐसे लोग या तो अपने-आप को शारीरिक नुकसान पहुंचाते हैं या फिर अपने से जुडे लोगों को। बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से ग्रस्त लोगों का उनकी सेक्स लाइफ पर बहुत गहरा प्रभाव पडता है क्योंकि इस बीमारी में आदमी की भावनाएं ज्यादा प्रभावी नहीं होती हैं।

बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर और सेक्स –

सेक्स के प्रति नकारात्मक सोच -  बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से पीडित व्यक्ति की सेक्स के प्रति सोच हमेशा ही नकारात्मक होती है। पार्टनर के साथ सेक्स के दौरान भी उनका व्यवहार नकारात्मक ही होता है। बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से ग्रस्त महिलाओं का सेक्स की भावना के प्रति मिली-जुली सोच होती है। उनको हमेशा सेक्स के दौरान यह महसूस होता है कि उनका पार्टनर उन पर दबाव डाल रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि उनके पारस्परिक संबंधों में हमेशा तनाव रहता है, साथी के साथ अक्सर लडाई होने से उनके अंदर यह विचार आते हैं।

सेक्स के प्रति लापरवाही -   बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर में आदमी सेक्स के दौरान उनका व्यवहार ज्यादा आवेग वाला होता है। सेक्स के दौरान इनका व्यवहार लापरवाह होना एकदम से सामान्य बात है। बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति के मन में सेक्स के दौरान उदासी, पार्टनर के साथ ईर्ष्या की भावना, अपने को दुखी दिखाना, हमेशा डर में रहना और सकारात्मक भावना प्रकट करने जैसी स्थिति दिखती है।

अयोग्य समझना – बॉर्डरलाइन पसनालिटी डिसार्डर से ग्रस्त आदमी अपने को अयोग्य समझता है। उसको ऐसा लगता है कि लोगों का बर्ताव उसके प्रति अच्छा नहीं है। इनके अंदर भावुक विचार नहीं पनपते हैं। ऐसे लोग हमेशा अपने को सेक्स के प्रति अयोग्य समझते हैं। सेक्स को लेकर उनकी रुचि बहुत कम होती है। इस बीमारी से ग्रस्त लोग अपने पार्टनर के साथ अच्छे से व्‍यवहार नहीं कर पाते हैं।

भावनाओं में बदलाव –  बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से ग्रस्त व्यक्ति में भावनाओं का कोई स्थान नहीं होता है। इनकी भावनाएं हमेशा बदलती रहती हैं। आदमी अपने एहसासों को पहचान नहीं पाता है। सेक्स के दौरान अपने पार्टनर की भावनाओं को बिलकुल नहीं समझते हैं। सेक्स के प्रति इनकी सोच एकदम से संकीर्ण होती है।

जंगली तरीके से सेक्स करना -  बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से ग्रस्त वयक्ति अक्सर अपने पार्टनर के साथ जंगली तरीके से सेक्स करता है। इस प्रकार के सेक्स करने का कारण यह होता कि वह अपनी और पार्टनर की भावनाओं को बिलकुल नजरअंदाज करता है। इसकी वजह से  सेक्स के दौरान अक्सर पार्टनर को चोट भी लग जाती है। इसमें सेक्स के नियम का पालन नहीं हो पाता है ।

बार्डरलाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर से ग्रस्त आदमी हमेशा अपने-आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। शराब पीना, मादक पादार्थों का सेवन करना, लापरवाही से गाडी चलाने जैसी हरकतें सामान्य हो जाती हैं। व्यक्ति हमेशा अपने आप को खाली-खाली महसूस करता है और गुस्से पर नियंत्रण नहीं कर पाता है।

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