सोमवार, 5 जुलाई 2021

ब्रश करने का सही तरीका

ब्रश करने का सही तरीका :- कई बार लोग ये अक्सर पूछते है कि क्या टूथब्रश इस्तेमाल करने का भी कोई सही तरीका होता है? और हमें किस तरह ब्रश करना चाहिए ? लेकिन क्या आप जानते है कि गलत तरिके से ब्रश करने से कई तरह की समस्याओं दांतो में हो जाती है जैसे उनमे गंदगी का जमा रहना, दांतो का हिलना और कमजोर हो जाना और भी कई प्रकार की समस्याएं होती है जो दांतो में अक्सर हो जाती है. शायद आप ब्रश करने का सही तरीका नहीं जानते होंगे. दांत हमारे शरीर और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग हैं. शरीर के अन्य हिस्सों की तरह इनकी सफाई करना भी बहुत ही ज़रूरी है पर बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्रश करने का सही तरीका क्या है?

ब्रश करने का सही तरीका

गलत तरीके से ब्रश करने से दांत साफ़ तो होते ही नहीं हैं साथ में दांतों को कई तरह के रोगों का सामना करना पड़ता है.हम लोग बचपन से सिर्फ एक ही तरीके से ब्रश करते आ रहे हैं या कहा जाये कि एक ही तरीका हमें पता है और वो है क्षैतिज रूप से (हॉरिज़ॉन्टली) मसूड़ों पर ब्रश करना. इस तरीके से मसूड़ों को नुकसान पहुँच सकता है. दांतो को सही तरीके से ब्रश करने का तरीका है उन्हें 45° पर ब्रश करें. हमेशा ब्रश को गोलाई में घुमाते हुए ब्रश करें और ब्रश करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि ब्रश करते समय कभी भी ब्रश को तिरछा न पकड़े क्योंकि ये आपके दांतो और मसूड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है. और ऐसा करने से आपके मसूडों से खून भी आ सकता है और दांतो के बीच फंसी हुयी गंदगी भी ठीक तरह से साफ़ नहीं होती है.

इसलिए आपको हमेशा ब्रश करते समय इस बात ध्यान रखना चाहिए की ब्रश और दांतों के मध्य 45° का एंगल बनना चाहिए तभी वो ठीक तरह से साफ़ होंगे और उनकी गंदगी बाहर निकलेंगी. ब्रश करने के बिषय में आप को शायद कुछ बाते पता नहीं होगी. जैसे की कैसे ब्रश करें और कितने समय तक ब्रश करें और कम समय तक ब्रश करने से दांत न ही अच्छे से साफ़ होते हैं न ही सारा प्लाक यानी कचरा उन में से निकलता है. दूसरी ओर ज्यादा देर ब्रश करने से दांतों का इनमे मल निकल जाता है. इसलिए न तो अधिक देर तक ब्रश करना चाहिए न ही कम देर तक. सुबह और सोने से पहले दिन में दो बार दो से तीन मिनटों तक ब्रश करें.

और ऐसा करने से आपके दांत भी मजबूत रहते है और उनमे सड़न भी नहीं होती है और वो बहुत समय तक मजबूत बने रहते है.ब्रश करने के लिए टूथब्रश का चुनाव करते समय हमेशा मुलायम नायलॉन के और नर्म ब्रश को चुनें. अन्य ब्रश दांतो को साफ़ नहीं करते बल्कि इन से मसूड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है. जिन टूथब्रश के रेशे ख़राब हो चुके हों वो दांतो को अच्छे से साफ़ नहीं कर पाते हैं. इसके अलावा अपने ब्रश को समय-समय पर बदलते रहें फ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. इससे न केवल दांत साफ़ होते हैं बल्कि मजबूत भी होते हैं और दांतों में चिपके प्लाक भी इस टूथपेस्ट के प्रयोग से आसानी से निकल जातें हैं. और भी कई तरह के ब्रश बाजार में मौजूद है जिनका चुनाव आप आसानी से कर सकते है और जोकि आपके दांतों और मसूड़ों के लिए सबसे बेहतर होते है.

टूथब्रश करने का सही तरीका

इसलिए हमेशा ब्रश लेते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखे की वो बहुत ज्यादा कड़क न हो. मुलायम ब्रश आपके लिए सबसे बेहतर रहेगा.ब्रश के चुनाव के साथ साथ आपको सही टूथपेस्ट का चुनाव करना होगा क्योंकि कुछ टूथपेस्ट काफी ज्यादा नुक्सानदेय होते है जिनके कारण मुँह में छाले भी हो जाते है इसलिएफ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. इससे न केवल दांत साफ़ होते हैं बल्कि मजबूत भी होते हैं और दांतों में चिपके प्लाक भी इस टूथपेस्ट के प्रयोग से आसानी से निकल जातें हैं. और ब्रश करने का सही तरीका तो यही है आप सब कुछ अपने हिसाब से चुने जो आपके के लिए आरामदेय हो. और ब्रश करने का सही तरीका यही है.

कि आप दांतो को सारी तरफ अच्छे से ब्रश करें जैसे दाढ़ों पर और दांतो के पिछले भाग पर भी. नॉर्मली हम इन जगहों पर ब्रश नहीं करते. ब्रश को हमेशा अंदर की ओर घुमाएं और इसके साथ पीछे से आगे की ओर ब्रश करें. अपनी दोनों ओर की दाढ़ों पर भी अच्छे से ब्रश करें. इससे आपके दांत लम्बे समय तक मजबूत बने रहेंगे.कुछ ख़ास बातें है जो ब्रश करने का सही तरीका बताती है और जिनका हमें अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जैसे दांतो को ब्रश करने के साथ-साथ अपनी जीभ को भी ज़रूर साफ़ करें. इसके लिए आप ब्रश के पीछे का भाग या टंग क्लीनर का प्रयोग करें.

दांतो को साफ़ करते हुए अधिक दवाब न डालें इससे मसूड़ों को नुकसान हो सकता है.ब्रश करने के बाद कुल्ला ज़रूर कर लें ताकि मुँह में जमी हुई गंदगी निकल जाये. खाना खाने के एकदम बाद ब्रश करना गलत हैं इससे दांत कमजोर हो जाते हैं.खाना खाने के कम से कम तीस मिनटों के बाद ब्रश करें. ब्रश करने के बाद अपने टूथब्रश को अच्छे से साफ़ करें. तो ये सब ब्रश करने का सही तरीका है.

मुंह की बदबू का इलाज

मुंह की बदबू (bad breath) काफी शर्मनाक अनुभव होता है और यह आपके आत्मविश्वास में कमी भी ला सकता है।

मुंह से बदबू आने का कारण है – जीभ के पीछे और दांतों के बीच में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया का पनपना। बैक्टीरिया पैदा होने के निम्न कारण हो सकते हैं – सुगंधित खाद्य पदार्थों का सेवन, धूम्रपान, मुंह का सूखापन, मसूड़ों की बीमारी, खाने के बाद ठीक से मुंह न धोना आदि। कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे साइनस के कारण भी यह समस्या हो सकती है

इसलिए मुंह में बदबू आने से बचने के लिए मुंह को साफ़ रखना बेहद जरुरी होता है। नियमित रूप से दांतों पर ब्रश करें और जीभ को साफ रखें।

सांसों को फ्रेश रखने के लिए दिनभर जरूरत अनुसार पानी पीना भी जरूरी होता है। साथ ही, खाने के बाद अपने मुंह को पानी से अच्छी तरह से कुल्ला करें। इससे दांतों के बीच में फसे भोजन के कण बाहर निकल जायेंगे।

इसके आलावा कुछ घरेलू उपचारों के माध्यम से भी मुंह की बदबू का इलाज किया जा सकता है। इनमें से 10 सबसे कारगर इलाज नीचे दिए जा रहे हैं –

1. सौंफ

सौंफ काफी अच्छे माउथ फ्रेशनर की तरह काम करती है, इसलिए मुंह की बदबू को दूर करने में यह फायदेमंद है। इसमें एंटी-माइक्रोबियल प्रॉपर्टीज भी होती हैं जो मुंह के बैक्टीरिया से लड़ती हैं। यह मुंह में लार के प्रोडक्शन को भी बढ़ा देती है जिससे मुंह का सूखापन दूर हो जाता है।

  • अपने मुंह को तुरंत फ्रेश करने के लिए एक चम्मच सौंफ को चबाएं।
  • आप सौंफ की चाय का सेवन भी कर सकते हैं। चाय बनाने के लिए एक कप पानी में दो चम्मच सौंफ डालकर 5 से 10 मिनट के लिए उबालें।

2. दालचीनी

दालचीनी में सिनामिक एल्डिहाइड (Cinnamic aldehyde) नामक आयल होता है जो मुंह की बदबू को कम करता है और मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है।

मुंह को फ्रेश रखने के लिए नीचे दिए गए उपचार को दिन में दो बार अपनाएं

  • एक चम्मच दालचीनी के पाउडर को एक कप पानी में डालकर उबालें।
  • आप इसमें कुछ तेज पत्ते और इलाइची भी डाल सकते हैं।
  • अब इस मिश्रण को छान लें और ठंडा होने दें।
  • ठंडा होने के बाद इससे अपने मुंह को अच्छी तरह से साफ करके कुल्ला करें।

3. मेथी की चाय

श्लेष्मा झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) में इन्फेक्शन होने पर मेथी की चाय काफी फायदेमंद होती है।

  • एक कप पानी में एक चम्मच मेथी के बीजों को उबालें।
  • अब इसे छानकर सेवन करें।
  • इसे तब तक रोज सेवन करें जबतक कि इन्फेक्शन ठीक न हो जाये।

4. लौंग

लौंग भी मुंह को फ्रेश करने में मदद करती हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं जो मुंह की बदबू को दूर करने में मदद करती हैं।

  • एक लौंग को अपने मुंह में दबा लें और धीरे-धीरे चबाएं। इससे कुछ ही मिनट्स में बदबू दूर को जायगी।
  • आप लौंग की चाय को भी बना सकते हैं। एक कप पानी उबालें, अब इसमें एक चम्मच लौंग का पाउडर डालकर अच्छी तरह से घोल लें। अब इस चाय को धीरे-धीरे चुस्कियां लेकर सेवन करें।

5. अजमोद (अजवाइन का हरा पौधा)

अजवाइन के हरे पौधे को अजमोद भी कहा जाता है। इसमें अत्यधिक क्लोरोफिल (chlorophyll) होता है जो मुंह की बदबू को बेअसर कर देता है।

  • अजमोद की पत्तियों या टहनी को चबाकर खाएं। आप इसे सिरका (विनेगर) में भिगोकर भी खा सकते हैं।
  • या फिर, अजमोद की पत्तियों को पीसकर जूस बनायें और सुबह शाम सेवन करें। इससे आपका पाचन भी ठीक होगा।

6. निम्बू का रस

मुंह से बदबू का इलाज करने के लिए निम्बू के रस का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। निम्बू में एसिडिक पदार्थ होते हैं जो मुंह में बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं। साथ ही इसकी मजबूत सुखद गंध, बदबू को दबा देती है।

  • एक कप पानी में एक चम्मच निम्बू का रस डालकर घोलें।
  • अब इसे मुंह डालकर, मुंह को अच्छी तरह से साफ़ करें और कुल्ला करें।

यह उपचार मुंह के सूखेपन को दूर करेगा जो मुंह से बदबू आने का सबसे मुख्य कारण होता है।

7. सेब का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर)

सेब का सिरका मुंह के pH को संतुलित करने में मदद करता है। इसलिए यह मुंह में बैक्टीरिया को पैदा होने से रोकता है।

  • रोज खाना खाने से पहले एक चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाकर पियें। यह आपके पाचन को भी ठीक रखेगा।
  • या फिर, एक कप पानी में सेब का सिरका मिलाकर गरारे करें।

8. बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा भी मुंह की बदबू को दूर करने में फायदेमंद होता है। यह मुंह में बदबू पैदा करने वाली एसिड्स को कम करता है और बैक्टीरिया से लड़ता है।

  • एक गिलास पानी में डेढ़ चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। अब इससे मुंह को साफ करके कुल्ला करें। ऐसा रोज एक बार करें।
  • बेकिंग सोडा से दांतों का मंजन करने से भी मुंह की एसिडिटी कम होती है और जीभ पर बैक्टीरिया नहीं पनप पाते।

9. टी ट्री आयल (चाय के पौधे का तेल)

टी ट्री आयल में एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो मुंह में किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन को होने से रोकती हैं। आप ट्री का इस्तेमाल निम्न तरीकों से कर सकते हैं –

  • टी आयल आयल युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
  • या फिर, अपने रेगुलर टूथपेस्ट में थोड़ा सा टी ट्री डालकर ब्रश करें।
  • टी ट्री आयल, पुदीना के रस और निम्बू के रस को एक गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें।

10. हर्बल टी

ग्रीन टी और ब्लैक टी में पॉलीफेनॉल्स एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मुंह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकते हैं।

  • ग्रीन टी या ब्लैक टी का नियमित सेवन करें।

यदि ऊपर दिए गए उपचारों को अपनाने के बाद भी आपकी मुंह की बदबू की समस्या ठीक नहीं हो रही है तो किसी अच्छे डॉक्टर या डेंटिस्ट से उचित जाँच कराएँ।

उदासी दूर करना चाहते हैं, तो इन 5 चीजों से बनाएं दूरी

उदास रहना कौन चाहता है, सभी को खुशुनुमा और तनाव रहित जीवन अच्छा लगता है। लेकिन कुछ बातें या चीजें ऐसी होती है जो उदास कर ही देती हैं। कई बार आपके खानपान के कारण भी आती है चेहरे पर उदासी। जानिए कौन सी वें 5 चीजें - 

1 एल्कोहल - एल्कोहल को भले ही आप अपनी खुशी का साथी मानते हों, पर गम का साथी भी तो यही है ना! यह सीधे आपके तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और उसकी गति को धीमा कर देता है, जिससे आप कई बार खुशी में भी उदासी महसूस कर सकते हैं।

2 मीट - खास तौर से लाल मांस या फिर डिब्बाबंद मांस इस मामले में बेह नुकसानदायक है। इनमें संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है जो इंसुलिन के स्तर में बदलाव करता है। इसके दुष्परिणाम के रूप में न केवल उदासी बल्कि कई गंभीर बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

3 सफेद ब्रेड - एक शोध में यह पाया गया है कि सफेद ब्रेड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा महिलाओं में उदासी का कारण बन सकती है। यह थकान का कारण भी बन सकती है।

4 कॉफी - भले ही थकान दूर कर ऊर्जा देने में सहायक है, लेकिन इसमें मौजूद कैफीन आपकी नींद और चैन को छीन लेता है, जिसके कारण मानसिक थकान होकर अंत में उदासी से सामना करना पड़ता है। 

5 चावल - चावल का अत्यधिक सेवन भी उदासी के लिए जिम्मेदार हो सकता है। इसमें रिफाइंड काबोहाइड्रेट पाया जाता है जो हार्मोनल बदलाव करने के साथ ही शरीर के ग्लाइसेमिक सूचकांक को प्रभावित करता है और उदासी महसूस होती है।

तंग मोजे न पहनें, वरना हो सकती हैं ये 5 समस्याएं

प्रोफेशनल लाइफ में मोजे पहनना हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन मोजे पहनते वक्त इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ये आपके पैरों में अधिक तंग न हों। अगर आप रोजाना तंग मोजे पहनते हैं, तो आपको हो सकते हैं यह 5 नुकसान - 

अधिक तंग मोजे पहनने पर आपको पैरों में सूजन आ सकती है साथ ही रक्तसंचार तीव्र होने से बेचैनी और शरीर में अचानक अत्यधिक गर्मी लगने जैसी समस्याएं हो सकती है।

2 अगर आप लंबे समय तक तंग मोजे पहन कर रखते हैं, तो पैरों में अकड़न हो सकती है और एड़ी व पंजे वाला हिस्सा सुन्न पड़ सकता है। 

3 पैरों में पसीना निकलने के साथ ही नमी पैदा होने से फंगल इंफेक्शन की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे पैरों की त्वचा खराब हो सकती है।

तंग मोजे पहनने की आदत आपको वेरिकोज वेन्स की समस्या का शिकार बना सकती है। इतना ही नहीं, अगर आपको यह समस्या पहले से है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

इसके अलावा तंग मोजे पहनने का एक आम लेकिन परेशानी भरा नुकसान है इससे पैरों पर निशान बन जाने से खुजली और जलन होना।

ऐसे करें चांदी के वर्क की पहचान, ये रहे 5 टिप्स

मिठाईयों पर लगाया जाने वाला चांदी का वर्क जितना आकर्षक लगता है, सेहत के लिए भी उतना ही फायदेमंद होता है। लेकिन वर्तमान में जहां हर चीज में मिलावट होती है वहां चांदी का वर्क भी मिलावट से अछूता नहीं है। ऐसे में अगर आप नकली चांदी के वर्क लगी मिठाईयां खाते हैं, तो यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जान लीजिए नकली वर्क को पहचानने के 4 तरीके - 

चांदी का वर्क लगी कोई भी मिठाई लेकर इसे अपनी अंगुली पोंछने का प्रयास करें। अगर पोंछते समय यह आपके हाथ में चिपकता है, तो इसका मतलब है इसमें एल्युमिनियम है। लेकिन अगर यह आपके हाथ में नहीं चिपकता और गायब हो जाता है, तो यह पूरी तरह सुरक्षित है।

नकली वर्क थोड़ा मोटा होता है जबकि असली वर्क महीन होता है। अगर मिठाई पर लगे चांदी के वर्क को उतारा जाए और इसे गर्म किया जाए, तो यह चांदी के गोले की तरह तब्दील हो जाएगा। लेकिन अगर वर्क मिलावटी है, तो जलाने पर यह काला पड़ जाता है या फिर राख में बदल जाता है, क्योंकि इसमें एल्यमिनियम मिला होता है।

चांदी के वर्क को परखनली में लेकर अगर हाइड्रोक्लोरिक एसिड की एक बूंद डाली जाए तो यह सफेद वेग के साथ टदबाइड हो जाएगा। लेकिन अगर यह मिलावटी है, तो यह टरबाइड नहीं होगा। इसका मतलब है कि इसमें चांदी नहीं बल्कि एल्युमिनियम है।

अगर आप चांदी के वर्क को हाथ में रखकर हथेली के बीच रगड़ेंगे, तो यह गायब हो जाएगी। लेकिन अगर चांद के वर्क में मिलावट है, तो यह एक बॉल के रूप में एकट्ठा हो जाएगा।

चांदी का वर्क अगर असली है, तो यह लंबे समय तक भी टिका रहता है और इसकी चमक कम नहीं होती। लेकिन अगर यह एल्युमिनियम है, तो पुराना होने पर इसका रंग काला पड़ जाता है।

सर्दी की धूप से निखरेगी सेहत और खूबसूरती, जानें 5 टिप्स

सर्दी के मौसम में गुनगुनी धूप किसी अमृत से कम नहीं होती। आनंददायक होने के साथ ही यह आपकी सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होती है। जानिए धूप ऐसे ही 5 फायदे, जो निखारते हैं आपकी सेहत और रूप, दोनों को -

गुनगुनी धूप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कैल्शियम के अवशोषण में सहायक है। अगर आप कैल्शियम के लिए दूध पीते हैं, तो धूप का सेवन उस कैल्शियम के शरीर में अवशोषित होने में मदद करता है।

सर्दी के दिनों में कई बार मन सुस्त सा होता है, जिसे आनंदित करने में धूप बेहद कारगर साबित होती है। वहीं हल्की गर्माहट के साथ यह आपको उर्जा प्रदान करने में सहायक होती है।

त्वचा की सिकुड़न, फंगस एवं अन्य चर्म रोगों के लिए धूप एक नैचुरल उपाय है। त्वचा में नमी के कारण पनपने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए धूप फायदेमंद है।

मांसपेशियों में होने वाली अकड़न से बचने में धूप लेना फायदेमंद होता है। यह न केवल बाहरी तौर पर शारीरिक अंगों की रक्षा करती है बल्कि आंतरिक अंगों को भी गर्माहट प्रदान कर स्वस्थ रखती है।

यह दर्द को कम करने एवं थकान उतारने में सहायक है, जिसका असर आपके सौंदर्य पर भी सकारात्मक रूप में पड़ता है। वहीं आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए भी धूप लेना कारगर होता है।

5 सब्जियां, सेहत संवारे, सुंदरता निखारे

सब्जियां सिर्फ सेहत के लिए ही उपयोगी नहीं होतीं, बल्कि ये आपकी सुंदरता में भी इजाफा कर सकती हैं। यकीन नहीं होता? तो आजमाइए इन असरदार उपायों को। दिन-ब-दिन निखरती त्वचा आपको अहसास दिला देगी कि सब्जियां सौंदर्यवर्धक भी होती हैं।

टमाटर: टमाटर के रस में नीबू का रस मिलाकर लगाने से खुले रोम छिद्रों की समस्या दूर होती है। तैलीय त्वचा होने पर टमाटर को आधा काटकर चेहरे पर रगड़ें। कुछ देर बाद चेहरा धोकर पोंछ लें। ऐसा करने से अतिरिक्त तैलीयता दूर होती है।

आलू: आलू की पतली स्लाइसें आंखों पर रखने से थकी आंखों को राहत मिलती है। कच्चे आलू का रस आंखों के डार्क सर्कल्स दूर करता है। आलू उबालने के बाद बचा पानी फेंकिए नहीं, इसमें कुछ देर हाथ डुबोकर रखें, फिर साफ पानी से धोएं। आपके हाथ साफ व मुलायम हो जाएंगे।

खीरा: खीरा नैचुरल क्लींजर है। ऑइली स्कीन वालों के लिए यह बेदह लाभप्रद है। खीरे के रस में चंदन पावडर मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें। इसके नियमित प्रयोग से चेहरा झाइयों रहित हो जाएगा। इसके अलावा खीरा (ककड़ी) के रस में गुलाबजल एवं कुछ बूंदें नीबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग साफ होता है।

पुदीना: महकता पुदीना आपको मुंहासों की समस्या से मुक्ति दिला सकता है। पुदीना पेस्ट में चंदन चूरा एवं मुल्तानी मिट्टी मिलाकर चेहरे पर लगाएं। सूखने पर धो लें। इसका नियमित इस्तेमाल पिंपल्स दूर करने में सहायक है।

मूली: सलाद की शान मूली आपके मुरझाए चेहरे में नई जान डाल सकती है। मूली के रस में मक्खन मिलाकर नियमित चेहरे पर लगाने से रुखापन एवं झाइयां दूर होती हैं। मूली का रस ब्लैकहेड्स से निजात दिलाता है।

चाय पीने के फायदे और नुकसान

दोस्तों आज की पोस्ट हम लोग बात करेंगे चाय पीने के फायदे और नुकसान की आज की पोस्ट बहुत इंपॉर्टेंट है. चाय भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग बन चुकी है, सर्वे के अनुसार पाया गया है लगभग 90% भारतीय बिना नागा किए चाय पीने के आदी होते हैं. इनमें से लगभग 25% लोग दिन भर में 2 बार से लेकर चार या पांच बार तक चाय का सेवन कर लेते हैं क्या आप जानते हैं यह अच्छी आदत है या नहीं इसके फायदे और नुकसान के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप इस पोस्ट को पूरा अंत तक जरुर पढ़ें.

चाय पीने के फायदे और नुकसान, और इससे होने वाले रोग

चाय पीने के फायदे और नुकसान इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आप इसपर अमल करेंगे तो आप निश्चित रूप से बहुत फायदे में रहेंगे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हम भारतीयों को इस इस बीमारी की लत देखा देखी लगी है. चाय भारतीय देन नहीं है चाय अंग्रेज अपने साथ भारत में लाए थे. लेकिन उस वक़्त भारतीय लोगों ने सोचा के अंग्रेजों के इस महँगे शौक को हमें भी अपनाना चाहिए बस यहीं से भारतीय लोगों ने इस बीमारी को अपने गले लगा लिया और तब से लेकर आज तक ये चलन जारी है .

चाय हमारे मानव जीवन पर स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत खराब असर डालती है इसके सेवन से पाचनक्रिया तंत्र गढ़बढ़ा जाता है और यह तमाम पेट के रोगों के लिए भी जिम्मेदार है.

क्या आपने कभी सोचा है हमारे लिए चाय पीना जरुरी भी है या नहीं आपकी जानकारी के लिए हम बता दें चाय उनके लिए पीना सहे है जो लोग यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे हैं. ये उनके लिए सही भी है लेकिन गर्म देशों में रहने वाले लोगों के लिए चाय जहर के समान होती है.

जैसे कि हमारा भारत इसकी वजह यह है कि गर्म देशों में रहने वाले लोगों के पेट में अम्ल यानी के एसिड की मात्रा पहले से ही ज्यादा होती है और जब हम चाय पीते हैं तो यह एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. किसी किसी को सीने में जलन या फिर लोगों के पेट में जलन जलन होती है ये चाय पीने का असर होता है यह चाय की वजह से ही होती है उन लोगों के पेट में चाय पीने की वजह से एसिडिक की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट की अन्य बीमारियां भी बनने का डर रहता है.

चाय पीने के नुकसान क्या हैं?

चाय पीने के फायदे और नुकसान लगातार चाय पीने से आपके शरीर में ब्लड शुगर की बीमारी या हार्ट से संबंधित मतलब दिल की बीमारियां होने का डर बना रहता है, इसके साथ-साथ आपके शरीर में सबसे खतरनाक ब्लड प्रेशर की बीमारी होने का डर बढ़ जाता है. अगर आप चाहे तो एक छोटा सा प्रयोग करके भी इसको आजमा सकते हैं.

इसके लिए आप सबसे पहले सामान्य रूप से अपना ब्लड प्रेशर और शुगर चेक करवाएं और फिर एक कप चाय पीने के तुरंत बाद अपना ब्लड प्रेशर और शुगर दोबारा से चेक करें आपको पता लग जाएगा चाय पीने के कितने भयंकर परिणाम हो सकते हैं. और शायद इसका रिजल्ट देखने के बाद आप चाय पीना ही छोड़ दें.

  • चाय पीने की आदत आपके पाचन तंत्र पर सबसे बुरा प्रभाव डालती है जिससे आपके खाना पचाने की प्रक्रिया पूरी तरह से गड़बड़ हो जाती है और चाय पीने से भूख भी मर जाती है.
  • चाय पीने से पेट में गैस बनना चालू हो जाती है और आपके पेट के अंदर अम्लीय मात्रा बढ़ जाने के कारण आपके सीने में जलन और खट्टी डकारें जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है अगर आपको गैस बनने की शिकायत है तो आपको चाय पीना बंद कर देना चाहिए.
  • चाय पीने से अक्सर देखा गया है कि लोगों के हाथ पैरों में दर्द लगातार बना रहता है अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो आपको चाय का सेवन बंद कर दें क्योंकि चाय पीने से हड्डियों पर असर पड़ता है और वह दर्द करना शुरू हो जाती है.
  • चाय ऐसे लोगों को सेवन करना चाहिए जो ठंडे स्थानों पर रहते हैं, क्योंकि ठंडे इलाकों में रहने वाले लोगों के ब्लड प्रेशर लो (LOW) रहता है या जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो होने की शिकायत है उन लोगों के लिए चाय सही है, क्योंकि चाय पीने से ब्लड प्रेशर जल्दी High हो जाता है.
  • चाय पीने से आपके शरीर में केलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, केलेस्ट्रॉल बढ़ना मतलब आपके शरीर में रक्त में कचरे की मात्रा को बढ़ाना जिससे आपके दिल तक सुचारु रुप से ब्लड सर्कुलेशन यानी के खून का संचार सही नहीं हो पाता जिससे बाद में दिल की बीमारी है शुरू हो जाती है या हार्ट अटैक जैसी समस्या भी आ सकती है.

चाय पीने की लत (आदत) को कैसे छुड़ाएं

चाय पीने के फायदे और नुकसान अक्सर देखा गया है किसी चीज को पीने की लत लग जाए तो मानव शरीर एकदम से उसे छोड़ने के लिए राज़ी नहीं होता. जिस तरह से शराब या कोई अन्य नशे के लोग आदी रहते हैं बिल्कुल ठीक इसी तरह से चाय पीने वालों के साथ भी यह समस्या है, क्योंकि वह बचपन से ही चाय पीते हैं हुए आ रहे हैं और यह एकदम से छोड़ना बिलकुल नामुमकिन सा होता है.

इस समस्या को दूर करने के लिए और चाय पीने के नुकसान से बचने के लिए आप चाय में चीनी की जगह अगर गुड़ का उपयोग करेंगे और इसके साथ-साथ आपकी चाय में दूध का इस्तेमाल ना करते हुए चाय को पिया जाए तो ठीक रहता है. इसके अलावा आप हरी पत्तियों वाली चाय का उपयोग करें तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी हुई हमारे भारत में अधिकतर काली बारीक या दानों वाली चाय चलती है जो एक कचरे के समानहोती है.


टीबी रोग के लक्षण

टीबी रोग के लक्षण – आजकल Enviroment बहुत ही ज्यादा Polluted हो चूका है और आजकल जितनी तेज़ी से Techology हमारी ज़िंदगी में जगह बनाती जा रही है. उतनी ही तेज़ी से लोगों में बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं. टीबी को एक बहुत गंभीर बीमारी माना जाता है. और टीबी का पूरा नाम Tuberculosis है और ये सबसे ज्यादा भारत में होती है और भारत में हर साल लगभग 4 लाख लोग टीबी रोग से मृत्यु हो जाती है इसलिए टीबी रोग के लक्षण को जानना बहुत जरूरी क्योंकि टीबी रोग के इलाज के लिए बहुत ही जरूरी है.

और ये रोग सबसे ज्यादा हमारे देश में सबसे ज्यादा तेजी से फ़ैल रहा है और इसे कुछ लोग अनुवांशिक बीमारी मानते हैं, लेकिन आपको यह जानकर शायद अच्छा लगे कि ये बीमारी अनुवांशिक बीमारी नहीं है क्योंकि ये बीमारी किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है और और इसका इलाज लगभग असंभव है लेकिन लेकिन हमारी Medical Science इतनी तरक्की कर चुका है कि आज के समय में इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से किया जा सकता है.

टीबी रोग के लक्षण

पर यदि कोई व्यक्ति टीबी रोग के लक्षण पहले से जान लेता है और समय पर इस का इलाज कराने लगता है तो वह आसानी से और नियमित खुराक से टीबी रोग से पूर्णतः छुटकारा पा सकता है. टीबी रोग का इलाज करने से पहले टीबी के बारे में जानना बहुत है टीबी को वैज्ञानिक भाषा में ट्यूबरक्लोसिस के नाम से भी जाना जाता है जो कि एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया की वजह से होता है एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है और यह बैक्टीरिया शरीर के सभी हिस्सों में फैलकर संक्रमण फैला देता है. और शरीर को कमजोर बना देता है और सामान्यतः यह फेफड़ों में ही पाया जाता है.

और टीबी रोग सिर्फ हमारे फेंफड़ों में ही नहीं बल्कि शरीर के हर एक अंग को धीरे-धीरे प्रभावित करता है जैसे आंतें, मस्तिष्क, हड्डियां, जोड़े, गुर्दे, त्वचा, हृदय भी इससे सभी अंग संक्रमित हो जाते है और बीमारी के ज्यादा फैलने पर रोगी को बचा पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है. और इसलिए टीबी रोग के लक्षण जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी है.

टीबी रोग के लक्षण

सबसे पहला और आसानी से पहचाना जाने वाला लक्षण है जोकि कोई भी व्यक्ति बहुत ही आसानी से पहचाना जा सकता है इस रोग प्रमुख लक्षण ये कि इस रोग में लम्बे समय तक खांसी चलती है और यदि आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है तो यह टीबी का शुरूआती चरण हो सकता है. और इसलिए खांसी होने पर अपने बलगम जांच अवश्य करवाएं.

और दूसरा और सामान्य लक्षण जो रोगी खुद ही देख सकता है. टीबी के शुरूआती लक्षणों में बलगम से साथ खून आना शुरू हो जाता है और यदि आपको भी बहुत तेज खांसी हो रही है और आपके बलगम में खून आ रहा है तो Seriously लेना चाहिए क्योकि ये टीबी का दूसरा लक्षण है. और ऐसा होने पर तुरंत किसी अच्छे Doctor से मिले और इसका Treatment करना शुरू कर दें.

टीबी रोग के लक्षण और इलाज

और जब किसी व्यक्ति को बुखार आता है और वो बुखार आम बुखार से अलग हो मतलब कि दिन में बुखार ना चढ़े और जैसे जैसे शाम हो वैसे वैसे बुखार बढे तो यह टीबी का लक्षण है इसे नज़रअंदाज़ न करें तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.यदि आपको सांस लेने में थोड़ी सी समस्या आ रही है तो ये सांस संबंधी रोग हो सकता है लेकिन यदि बहुत ज्यादा परेशानी हो रही और सीने में बहुत ज़ोरो का दर्द होने लगे तो ये भी टीबी का प्रमुख लक्षण है अगर किसी भी जलन या दर्द सीने में होता है तो ये टीबी हो सकता है इसलिए लापरवाही न करें और तुरंत इसका इलाज कराएं और अपना जीवन बचाएं.

टीबी होने पर या फिर शरीर का इसके द्वारा संक्रमित होने पर व्यक्ति को भूख लगनी बंद हो जाती है, और बाद में उसे किसी भी चीज को खाना अच्छा न लगे तो ये टीबी हो सकता है. और भूख न लगने की वजह से व्यक्ति को शरीर में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिससे उसके वजन में भारी मात्रा में गिरावट आने लगती है और उसका शरीर बहुत ही दुबला हो जाता है. और सबसे ज्यादा Infection फेंफड़ो में फैलता है.रात को सोते समय अत्यधिक पसीना आना भी टीबी का एक लक्षण है. ये कुछ टीबी रोग के लक्षण है जिन्हे पहचान कर आप टीबी से बच सकते है.

शराब छुड़ाने के उपाय

शराब छुड़ाने के उपाय :- शराब का नशा दुनिया में ज़हर के समान माना जाता है और सबसे ज्यादा घातक माना जाता है. और शराब के ऊपर किये अध्ययन के अनुसार शराब पीने से पूरी दुनिया में लगभग हर माह लगभग 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है क्योंकि इसका नशा सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. और एड्स, टीबी और हिंसा के शिकार व्यक्तियों को मिलाकर देखा जाए, तो भी शराब पीने के कारण मरने वालों की संख्या कई गुना ज्यादा है. और और पूरी दुनिया में हर दिन होने वाली 18 मौतों में एक मौत शराब की कारण होती है और सड़क दुर्घटनाओं में भी सबसे ज्यादा मौतें शराब के नशे में गाड़ी चलाने से ही होती है. शराब छुड़ाने के उपाय बहुत ही आसान है.

शराब छुड़ाने के उपाय

विश्व के स्वास्थ्य संगठन WHO के आंकड़ों के अनुसार शराब की वजह से हर 10 सेकेंड पर एक व्यक्ति की मौत होती है. विश्व भर में मरने वाले लोगों में से करीब 6 प्रतिशत शराब की वजह से मरते है. वैज्ञानिको के अनुसार लगभग 200 से ज्यादा बीमारियाँ केवल शराब के कारण ही होती हैं. और ज्यादा शराब पीने से लिवर का कैंसर या लिवर सिरोसिस होने का खतरा बन जाता है जोकि किसी दूसरे कारण के मुकाबले 10 गुना ज्यादा प्रभावी है. इसके अलावा निमोनिया, एड्स, टीबी और नपुंसक होने का खतरा भी शराब की पीने से बढ़ता है. शराब हमारी मेमोरी और दिमाग पर भी बुरा प्रभाव डालता है. और जो व्यक्ति रोज़ शराब पीने है उनको आँखों से कम दिखने लगता है इससे पुरे शरीर के अंग प्रभावित होते है.

शराब महिलाओं के लिए भी बहुत ही ज्यादा खतरनाक और जानलेवा है. इससे उनकी प्रजनन क्षमता यानी बच्चे पैदा करने की शक्ति भी प्रभावित होती है. और उनकी होने वाली संतानो पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है. और वो कमजोर, मानसिक रूप से दुर्बल एवं विकलांग और कई रोगों के साथ पैदा होता है. शराब की वजह से महिलाओं में कोलन (मलाशय) और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है. इसलिए महिलाओं को शराब नहीं पीना चाहिए.

इसके अलावा शराब की वजह से कई सारी बुराइयों को भी बढ़ावा मिलता है क्योंकि शराब पीने के बाद व्यक्ति को किसी भी चीज़ का होश नहीं रहता है. वो पूरी तरह से मदहोश हो जाता है. वह सही और गलत का फैसला नहीं कर पाता है. और शराब ही कई अपराधों का कारण बनती है. शराब के नशे के कारण घरेलू हिंसा, बलात्कार, मारपीट और आत्महत्या जैसे मामले बहुत ज्यादा बढ़ जा रहे है, जो लोग सक्षम नहीं है उनकी इस आदत की वजह से परिवार को बहुत ज्यादा आर्थिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है. उसके पत्नी, बच्चो और परिवार के अन्य सदस्यों की बहुत सी आवश्यकतायें भी पूरी नहीं हो पाती है. इसलिए शराब के कारण आम लोगों को जीवन नर्क जैसा हो जाता है.

शराब छुड़ाने के उपाय बहुत ही आसान है इन उपयों को यदि आप करते है तो आप निश्चित शराब को छोड़ सकते है. और इन उपायों को करके आप स्वस्थ भी रह सकते है. सबसे पहला और आसान उपाय की सेब का रस बार बार पीने से और भोजन के साथ सेब खाने से भी आपकी शराब पीने की आदत पूरी तरह से कम हो जाती है और यदि उबले हुए सेबों को शराब को प्रतिदिन दो से तीन बार खिलाया जाएँ तो आप खुद पाएंगे की कुछ ही दिनों में शराबी की शराब पीने की आदत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.

गाजर के जूस भी शराब छुड़ाने के लिए बहुत ही उपयोगी है और यदि कोई शराबी रोज़ाना गाजर का जूस पीटा है तो उसकी शराब पीने की इच्छा कम होने लगती है और यदि दिन में एक गिलास गाजर का जूस पीता है तो उस शराबी की शराब को छोड़ने में बहुत मदद होती है. और इससे आपकी आँखों को भी फायदा होता है. और पाचन तंत्र भी ठीक रहता है जिससे आप खाने को ठीक तरह से पचा पाते है. इसलिए यदि आप शराब के आधी है तो आप रोज़ाना गाजर का जूस पीएं और स्वस्थ रहें.और सबसे शराब छुड़ाने के उपाय में सबसे बेहतर उपाय 500 ग्राम नई देसी अजवाइन को पीसकर उसे 7 लीटर पानी में दो दिन के लिए भिगोकर रख दें और उसे अजवाइन को धीमी आंच पर इतना पकाएं कि पानी लगभग 2 लीटर से भी कम रह जाएँ और जब ये पानी ठंडा हो जाएँ तो उस पानी अच्छे से छान कर बोतल में भर ले और जब भी शराब पीने की तलब लगें तो इस बोतल से पानी को 5 चम्मच की मात्रा में बार बार पीएं जब तक आपकी तलब खत्म न हो जाएँ.

किशमिश के कई सारे फायदे ये आपके रोगों को ठीक करने में भी मदद करता है अगर कोई व्यक्ति शराब छोड़ना चाहता है तो उस व्यक्ति को जब भी शराब पीने की ेतलब लगती है तो वो किशमिश का 1 -2 दाना मुंह में डालकर किशमिश को चूसें इसके अलावा वो उस किशमिश का जूस या सरबत बना कर भी पी सकता है उसकी शराब पीने की लत खत्म हो जाएगी. खजूर बहुत भी शराब छुड़ाने में अधिक मदद करता है इसके लिए पानी में कुछ खजूर घिसें फिर दिन में दो – तीन बार इस मिश्रण का सेवन करें. इससे जल्दी ही शराब की आदत छूट जाती है. शराब छुड़ाने के उपाय जानकार आपको फायदा ही मिलेगा.

तंबाकू, गुटका,बीड़ी, सिगरेट आदि का नशा करने वालो के शरीर में फास्फोरस तत्व की कमी हो जाती है उसके लिए PHOSPHORUS 200 का ऐसे ही प्रयोग करे और इसके प्रयोग से तंबाकू, गुटका,बीड़ी, सिगरेट के अलावा शराब का नशा करने की आदत भी पूरी तरह से खत्म हो जाती है. सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले और इसे उस शराब के साथ दो तीन बूँद की मात्रा में मिला दें फिर आप खुद ही देख लेंगे की शराबी की शराब पीने की आदत किस तरह खत्म हो जाती है.

और शराब छुड़ाने के कुछ टोटके के भी जो शराब छुड़ाने में आपकी बहुत ही ज्यादा मदद करते है.यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पीता है तो उसकी पत्नी मंगल या शनिवार को चरखा चलाए. जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करता है तो उसकी पत्नी अपने पैरों के बिच्छुए को पानी से धोकर तथा शराब की बोतल में से थोड़ी सी शराब लेकर उसमें अपने बिच्छुए डाल दे. त्रयोदशी या पूर्णमाशी के दिन वह शराब निकाल कर दूसरी किसी शराब की बोतल में डाल दें. ऐसा पांच मंगलवार या शनिवार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है. जो जातक शराब का सेवन अधिक करता है तो उसके लिए सात पताशे लेकर प्रत्येक पताशे में सरसों के तेल की दो-चार बूंदे डालकर फिर बताशे को हाथ से मसलकर घर से बाहर कहीं दूर जाकर फेंक दें. ऐसा 11 दिन लगातार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है.

नमक के फायदे और नुकसान

नमक के फायदे और नुकसान: नमक जिसे सोडियम भी कहते है शरीर के लिए छोटी मात्रा में जरूरी है लेकिन अधिक सेवन करने पर गंभीर, दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. उच्च स्तर के नमक की खपत में कई नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं, जैसे रक्तचाप और हृदय संबंधी जटिलताओं फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम मात्रा में नमक जो स्वास्थ्य की सिफारिशों को पूरा करता हैं. कुछ स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसे कि शरीर को ठीक से कार्य करना. रोज़ाना उपभोग करने वाले खाने में नमक की मात्रा भिन्न होती है.

नमक केवल खाने के स्वाद को बढ़ाने में नहीं बल्कि कई कामो में नमक का इस्तेमाल किया जाता है नमक खाने में उपयोग में आने वाली सबसे पुरानी चीज है. इसे दुनिया भर में काम लिया जाता है। दुनिया भर में लगभग 200 मिलियन टन का उत्पादन होता है जिसमे से खाने के लिए सिर्फ 6 % नमक काम आता है. खाने के अलावा नमक का उपयोग जहाँ ज्यादा बर्फ गिरती है वहाँ हाईवे से बर्फ हटाने में होता है. इसके अलावा वाटर कंडीशनिंग आदि में भी नमक का बहुत उपयोग होता है. नमक के फायदे और नुकसान के बारे में कई डॉक्टर्स ने अपने मत दिए.

नमक को कई तरह से बनाया जाता है जिसे खाने के नमक समुद्र के पानी से बनाया जाता है.और सेंधा नमक चट्टानों के बीच से प्राप्त होता है और इसे व्रत के समय खाया जाता है. सेंधा नमक में बहुत ज्यादा मात्रा में पोषक तत्वों की होती है.
टेबल नमक 40 प्रतिशत सोडियम है, और इसका सबसे सामान्य आहार स्रोत है. टेबल के नमक के एक चम्मच में 2,300 मिलीग्राम सोडियम है, जो कि प्रति दिन स्वस्थ वयस्क प्रतिदिन सोडियम के अधिकतम सेवन की सिफारिश है. सरकारी पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को रोज़ाना 1,500 मिलीग्राम तक अपने सोडियम सेवन तक सीमित होना चाहिए.

ध्यान रखें कि कई खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से संसाधित और तैयार किए गए खाद्य पदार्थ, में सोडियम का उच्च स्तर होता है। कंजस्टिव दिल विफलता वाले लोग, यकृत और गुर्दा की बीमारी के सिरोसिस को सोडियम की काफी कम मात्रा की आवश्यकता हो सकती है. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को और कोलंबिया विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर द्वारा 2010 में जारी एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार, अफ्रीकी-अमेरिकियों के लिए नमक के प्रभाव अधिक स्पष्ट हैं। यह जातीय समूह नमक के उच्च रक्तचाप के प्रभावों के प्रति संवेदनशील होने की अधिक संभावना है, क्योंकि अफ्रीकी-अमेरिकियों ने सोडियम अधिक आसानी से बनाए रखा है और आमतौर पर उच्च रक्तचाप को विकसित करने की अधिक संभावना है. नमक के फायदे और नुकसान जानने के लिए आप घर पर कुछ उपाय कर सकते है.

डॉक्टर्स मुताबिक 51 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को सोडियम के खराब प्रभाव से भी ज्यादा प्रवण होता है, क्योंकि रक्त वाहिकाओं को उम्र के साथ कठोर हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप के स्तर में हो सकता है. 2011 में “अमेरिकन जर्नल ऑफ हाईपरटेन्शन” में प्रकाशित एक अध्ययन में सामान्य रक्तचाप वाले काकेशियनों के आहार में सोडियम में तेज कमी देखी गई – उदाहरण के लिए, सप्ताह के एक मामले में उच्च-से-कम सोडियम आहार से संक्रमण हो सकता है – कोलेस्ट्रॉल में बढ़ोतरी का कारण बनता है, संभावित रूप से कुछ हृदय स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाना हालांकि, लॉरेंस ऐपेल, एमडी, जो जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर हैं, का कहना है कि परिणाम बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं क्योंकि उन्हें गंभीरता से माना जाता है.

सेंधा नमक शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. साधारण नमक हमारे आम जीवन में खाने में उपयोग नमक को कही तरह से उपयोग किया जाता है. साधारण लोहे के तवे पर थोड़ा सा नमक बुरकने के बाद चिल्ला बनाएंगे तो आपका नमक तवे पर चिपकेगा नहीं .मतलब इस तरह से नमक के उपयोग से आप अपने साधारण से तवे को नॉन-स्टिक बर्तन में बदल सकते है और बर्तन से या लहसुन की या प्याज की गंध आती है तो उस बर्तन को नमक के घोल वाले पानी से धोने से उसकी गंध दूर हो जाती है. पिसे हुए मसाले , मिर्च , हल्दी , धनिया आदि में नमक मिलाकर रखने इन में कीड़े या जाले नहीं पड़ेंगे और मसाले ख़राब नहीं होंगे. और भी कई फायदे है नमक के जैसे की एक किलो मसाले में 50 ग्राम नमक के अनुपात से मिला सकते है. डस्टबिन में से आने वाली गंध मिटाने के लिए उसमे थोड़ा नमक डाल दें.और यदि घर में नाली या सीवर में कॉक्रोच, कीड़े, मच्छर आदि है तो उन्हें मारने के लिए या उनके रोकथाम के लिए पानी में नमक घोल कर यदि में नाली या सीवर में डालती है तो कीड़े नहीं पनपते है और बदबू भी नहीं आती है.

यदि आपके बिस्किट बहुत जाती नरम हो जाते है उनका कुरकुरापन जल्दी खत्म हो जाता है तो इनको नमक के साथ रखेंगे तो ये सही रहेंगे.पानी में नमक डालकर सफाई करते है तो बेक्टरीआ नहीं बनते है और घर में सफाई भी रहती है. मोमबत्ती पर यदि नमक का लेप लगाया जाएँ तो वह बहुत देर तक जलती रहती है.यदि आपके दातों में दर्द होता है या फिर मसूड़ों में खून आता है तो नमक का सेवन कर सकते है. और भी गई रोग जैसे गले में टॉन्सिल हो, गले में खराश हो, दर्द हो, आवाज दब गई हो तो एक गिलास गुनगुने पानी में नमक मिलाकर पीने से ये बीमारियां तो दूर होती है साथ ही हिचकी आना भी बंद हो जाती है.

हमारा शरीर नमक की निर्धारित मात्रा को पचा पाता है अगर शरीर की शक्ति से अधिक या कम नमक का प्रयोग किया जाता है तो इससे कई घातक बीमारियां हो सकती है इसीलिए अपने भोजन में नमक की मात्रा का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है.क्योंकि ज्यादा नमक खाने वाले लोगों को गुर्दे की पथरी और हड्डियों के कमजोर होना, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है. सोडियम और कैल्शियम के बीच एक महत्वपूर्ण सम्बंध का पता लगाया है. जब सोडियम की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो शरीर मूत्र के जरिए इसे बाहर निकाल देता है लेकिन सोडियम के साथ-साथ कैल्शियम भी शरीर से बाहर निकल जाता है.और कैल्सियम हड्डियों के काफी जरूरी होता है. और भी कई नुकसान है नमक ज्यादा खाने के लेकिन जितने फायदे है उस कम नुक्सान है. आपको ये हमारी नमक के फायदे और नुकसान वाली पोस्ट किसी लगी हमें बताएं और अपने फेसबुक प्रोफाइल से इसको दुसरे लोगों तक ज़रूर शेयर करें.

मोज़े पहनकर सोने के फायदे यहाँ पढ़ें

मोज़े पहनकर सोने के फायदे:-अगर आप जूतों के साथ मोज़े पहनते हैं तो ये बहुत अच्छा है क्योंकि मोज़े पहनने से आपके पैर गंदगी से बचते हैं और साथ ही पसीने से भी. लेकिन क्या आपको पता है मोज़े आपके पैरों को सिर्फ गन्दगी से ही नहीं बचते वल्कि इनके और भी फायदे होते हैं और इन फायदों को लेने के लिए आपको अपने पैरों में मोज़े पहनकर सोना होगा तो चलिए आज हम आपको बता रहे हैं की कैसे आपको मोज़े पहनकर सोने से फायदा होता है और क्यों.

मोज़े पहनकर सोने के फायदे हैं बहुत यहाँ पढ़ें

दोस्तों सुनने में थोड़ा आश्चर्य तो हो रहा होगा मोज़े पहनकर सोने के फायदे कैसे होते हैं. लेकिन ये भी सच है के अगर आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो बहुत अच्छा है लेकिन इस तरह के लोग आपको लाखों में एक ही मिलेंगे कुल मिलकर लाख लोग में से एकाध ही मोज़े पहनकर सोता है. अगर आप भी मोज़े पहनकर सोते हैं तो इसका सीधा मतलब है आप अपने पैरों की बहुत देखरेख करते हैं और अगर आप पहनकर नहीं सोते तो हमारी यह पोस्ट पढ़ने के बाद आप भी मोज़े पहनकर सोने को मजबूर हो जायेंगे.

मोज़े पहनकर सोने के पैर नहीं फटते

दोस्तों मोज़े पहनकर सोने का एक ये भी बढ़ा फायद है अगर आपके पैर ज़्यादा फटते है तो आप कुछ दिन तक मोज़े पहनकर सोना शुरू कर दीजिये कुछ ही दिन में आपके पैर एकदम गोरे और सुन्दर दिखने लगेंगे ये वाकई में बहुत कमाल की चीज़ है. इसके अलावा आपने एक चीज़ और देखी होगी अगर नहीं देखी तो कल सुबह चेक ज़रूर करना जब आप सुबह उठते हैं तो आपके पैर बहुत ही ज़्यादा खुश्क (Dry) दिखते हैं और अगर आप मोज़े पहनकर सोएंगे तो आपके पैर भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

आपके पैर हमेशा गरम बने रहते हैं

आपने अक्सर देखा होगा खासतौर से ठण्ड के मौसम में आपके पैर कुछ ज़्यादा ही ठन्डे हो जाते हैं आपके शरीर के तापमान की अपेक्षा जब आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो आपके पैर हमेशा गरम बने रहते हैं और कुछ लोगों को तो ये समस्या सभी मौसम में होती है ऐसे में आप मोज़े पहनकर सोएंगे तो इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है.

पसीना बहुत कम आता है

दोस्तों अक्सर देखा है कुछ लोगों के पैरों में कुछ ज़्यादा ही पसीना आता है। इस तरह से पसीना आने की समस्या को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। अगर आपके पैरों में से भी अत्यधिक पसीना आने की समस्या है तो आप को भी मोजा पहनकर सोना फायदेमंद साबित हो सकता है.

इन्फेक्शन से आपको बचाता है

जब आप मोज़े पहनकर सोते हैं तो आपका पैर गंदगी और बैक्टीरिया से पूरी तरह से फ्री रहता है। साथ ही इससे आपके पैर किसी भी तरह से संक्रमण से संक्रमित होने से बच जाते हैं और आप अधिक सुरक्षित रहते हैं।

पैर में दर्द की समस्याएं होती हैं दूर

हमारे पैर शरीर का वह हिस्सा है जिस पर हमारे शरीर का पूरा वजन रहता है और इसके कारण हमारे पैरों में कई बार दर्द हो जाता है ऐसे में आपके पैरों की इन समस्याओं से मोजे पहनकर सोना आपको इस समस्या  से हैं. और वैसे भी आप कूद आज रातमोज़े पहनकर एक बार सोकर देखना आपको कुछ अलग सा ही महसूस होता है। दोस्तों अगर पोस्ट अच्छा लगे तो शेयर ज़रूर करें और हमारे फेसबुक पेज को लाईक अवश्य करें आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

रविवार, 4 जुलाई 2021

भुट्टे के साथ लीजिए बारिश का मजा और पाएं 15 सेहत लाभ

बरसात का मौसम हो और भुट्टा न खाया जाए, ऐसा शायद ही आपके साथ होता हो। उपलों पर सिके हुए देशी भुट्टे हों या फिर स्टीम में पके अमेरिकन कॉर्न...दोनों का अपना ही मजा है। स्वाद तो इनका मजेदार होता ही है, सेहत के फायदे भी - 

1 सबसे पहली बात तो यह है कि बड़ों को साथ-साथ बच्चों को भी भुट्टे अवश्य खिलाने चाहिए इससे उनके दांत मजबूत होते हैं।

दूसरी बात कि जब आप भुट्टे खाएं तो दानों को खाने के बाद जो भुट्टे का भाग बचता है उसे फेंकें नहीं बल्कि उसे बीच से तोड़ लें और उसे सूंघें। इससे जुकाम में बड़ा फायदा मिलता है। बाद में इसे जानवर को खाने के लिए डाल सकते हैं। 

अगर आप इसे जानवर को नहीं देते हैं तो उन्हें सूखाकर रखें फिर इन्हें जलाकर राख बना कर रख लें। सांस के रोगों में यह बड़ा कारगर इलाज है। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कुकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।

आयुर्वेद के अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक, मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है। इसकी खासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और बढ़ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है।

 भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। यह बढती उम्र को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है।

 इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है।

बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। ताजे दूधिया (जो कि पूरी तरह से पका न हो) मक्का के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर उसे धूप में रखिए। जब उसका दूध सूख कर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए तो उसे छान लीजिए। इस तेल को बच्चों के पैरों में मालिश कीजिए। इससे बच्चों का पैर ज्यादा मजबूत होगा और बच्चा जल्दी चलने लगेगा।

इस तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली होता है। हर रोज एक चम्मच तेल को चीनी के बने शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है। ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को या जिन्हें टीबी होने की आशंका हो हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा।

10 मक्के के बाल (सिल्क) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है।

11 यदि गेहूं के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिए अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इसलिए इसे खाने से पेट अच्छा रहता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना दूर होती है।

12 भुट्टे के पीले दानों में बहुत सारा मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और फॉस्फोरस पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। एनीमिया को दूर करने के लिए भुट्टा खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी और फोलिक एसिड होता है।

13 खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। इसके स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है।

14 भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है।

15  इसका सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभदायक होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में जरुर शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो गर्भवती के लिए बेहद जरूरी है।