प्रदर रोग में योनि मार्ग से पतला या गाढ़ा चिकना स्त्राव कम अथवा अधिक मात्रा में निकलने लगता है| यह स्त्राव मासिक धर्म से पूर्व या बाद में भी होता है| यह दो प्रकार का होता है - श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर| श्वेत प्रदर में सफेद रंग का और रक्त प्रदर में रक्त युक्त प्रमेह होता है|
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर होने पर स्त्री की योनि से सफेद रंग का चिकना स्त्राव पतले या गाढ़े रूप में निकलने लगता है| इस प्रदर में तीक्ष्ण बदबू उत्पन्न होती है| ऐसे में दिमाग कमजोर होकर सिर चकराने लगता है| स्त्री को बड़ी बैचेनी एवं थकान महसूस होती है|
कारण
खून की कमी, चिन्ता, शोक, भय, सम्मान की कमी, अधिक सम्भोग, भावनात्मक कष्ट, अजीर्ण, कब्ज, मूत्राशय की सूजन आदि कारणों से स्त्रियों को श्वेत प्रदर हो जाता है|
पहचान
योनि मार्ग से सफेद रंग का पतला-पतला स्त्राव निकलता है| कभी-कभी गाढ़ा लेसदार स्त्राव चिपचिपे श्लेष्मा के साथ निकलने लगता है| इस रोग में भूख नहीं लगती| पेट में भारीपन, सिर दर्द, शरीर में दर्द, उत्साह का खत्म हो जाना, जलन, योनि में खुजली तथा दुर्गंध आने लगती है| स्त्री दिन-प्रतिदिन कमजोर होती चली जाती है| शरीर में हड़फूटन पड़ती है तथा कमर में बड़ी तेजी से दर्द होता है|
नुस्खे
- 10 ग्राम मुलहठी तथा 20 ग्राम चीनी - दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें| आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें|
- सूखे हुए चमेली के पत्ते 4 ग्राम और सफेद फिटकिरी 15 ग्राम - दोनों को खूब महीन पीस लें| इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें| इससे श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है| जब तक प्रदर न रुके, यह दवा नियमित रूप से लेते रहना चाहिए|
- पके हुए केले में 1 ग्राम फिटकिरी का चूर्ण भरकर दोपहर के समय उसे खूब चबा-चबाकर खाएं| इससे सफेद प्रकर रुक जाएगा|
- पेट पर ठंडे पानी का कपड़ा 10 मिनट तक रखें| श्वेत प्रदर में यह लाभकारी रहता है|
- अशोक की छाल 50 ग्राम लेकर उसे लगभग 2 किलो पानी में पकाएं| जब पानी आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो उसे उतारकर छान लें| ठंडा करके इसमें दूध मिलाकर घूंट-घूंट पिएं| श्वेत प्रदर रोकने की यह अचूक दवा है|
- गुलाब के पांच फूल मिश्री के साथ मिलाकर खिलाएं| ऊपर से गाय का आधा किलो दूध दें|
- अरहर के आठ-दस पत्ते सिल पर पानी द्वारा पीस लें| इसमें थोड़ा-सा सरसों का तेल पकाकर मिलाएं| फिर थोड़ी चीनी डालकर सेवन करें|
- एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ चाटना चाहिए|
- अनार के सूखे छिलके एक चम्मच की मात्रा में ठंडे पानी से सेवन करें|
- दो चम्मच मूली के पत्तों का रस नित्य पीने से श्वेत प्रदर का रोग ठीक हो जाता है|
- 10 ग्राम आंवले का गूदा 2 ग्राम जीरा - दोनों को खरल करके लें|
- सिंघाड़े के आटे की रोटी पर देशी घी लगाकर कुछ दिनों तक खाएं|
रक्त प्रदर
रक्त प्रदर स्त्रियों का एक भयंकर रोग है| इस रोग में महिलाओं की योनि से रक्त मिला रज निकलने लगता है, जिसमें चिपचिपाहट और तीव्र दुर्गंध होती है| रोग बढ़ने पर इसका रंग अधिक लाल तथा काला भी हो जाता है| इसमें मासिक धर्म समय से पूर्व, अधिक मात्रा में और कभी-कभी महीनों तक लगातार आता रहता है|
कारण
रक्त प्रदर होने के अनेक कारण हैं, जैसे - पति के साथ रोज दो-तीन बार सम्भोग करना, लाल मिर्च, तेज, खट्टे-चरपरे पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन, अंडा, मांस, मदिरा का अधिक प्रयोग, बार-बार गर्भस्त्राव या गर्भपात, मानसिक आघात, चिन्ता, शोक, भार उठाना तथा गर्भाशय पर चोट आदि|
पहचान
इसमें रज बार-बार निकलता है जिसमें खून की मात्रा भी होती है| कभी-कभी थक्केदार खून निकलता है| इस हालत में स्त्री की कमर में दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, हाथ-पैरों में दाह, जलन, बेचैनी, दुर्बलता आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं| स्त्री दिन-प्रतिदिन दुर्बल होती जाती है|
नुस्खे
- 6 ग्राम चन्दन का चूर्ण गुलाब के अर्क में मिलाकर सेवन करें|
- 2 ग्राम चूहे की मंगनी में थोड़ी-सी चीनी मिलाकर दिन में दो बार चार-पांच दिनों तक सेन करें|
- हरी दूब को धोकर पीस लें| उसमें से दो चम्मच रस निकालकर शहद के साथ सेवन करें|
- पेट पर गीली मिट्टी का लेप 10 मिनट तक लगाएं|
- 2 ग्राम राई पीसकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें|
- पुराना टाट या बोरी जलाकर भस्म बना लें| इसे प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ खिलाएं| रक्त प्रदर के लिए यह बड़ा कारगर नुस्खा है|
- बबूल का गोंद घी में तलकर पीस लें| फिर उसमें समान मात्रा में असली सोना गेरू पीसकर मिलाएं| उसमें से 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन सुबह के समय फांककर थोड़ा-सा दूध पी लें|
- सिंघाड़े का हलवा 15 दिनों तक 100 ग्राम की मात्रा में रोज खाएं| इससे रक्त प्रदर ठीक हो जाता है|
- बरगद के दूध की 5-5 बूंदें बताशे में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से रक्त प्रदर जल्दी ठीक हो जाता है|
- मूली का रस 50 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय उपयोग करें|
- 5 ग्राम सोंठ के साथ 25 ग्राम खूनखराबा पीस लें| इसमें से 2 ग्राम दवा घी में मिलाकर सेवन करें|
- जामुन का रस दो चम्मच तथा चावल का धोवन एक कप - दोनों को मिलाकर पीने से रक्त प्रदर में काफी लाभ होता है|
- केले के पत्तों को पीस लें| फिर इसकी खीर बनाकर कुछ दिनों तक सेवन करें|
विशेष
उपर्युक्त नुस्खों का प्रयोग करते समय घी, तेल, मिठाई तथा मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं| केवल सात्विक वस्तुओं - गेहूं व जौ की रोटी, मूंग की दाल, तरोई, लौकी, पालक, टमाटर, आलू आदि का सेवन करें| बहुत ठंडे फल न खाएं| पेट में गरमी पैदा करने वाली चीजों का भी सेवन न करें|
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